सिविल हीरो के लिए केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद का ट्वीट

Surendra Kumar Samaria

Updated: 11 Sep 2019, 10:26:59 PM (IST)

Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

देश की सुरक्षा में सरहद ( Border ) पर तैनात सैनिक ( indian soldier ) हमारे असली हीरो है। लेकिन इससे इतर आमजन के बीच रहकर उनकी पीड़ा और परेशानियों में मदद करने वाले भी शख्स भी कम नहीं है। समाज उन्हें सिविल हीरो के नाम से पुकारते है। ऐसा ही एक सिविल हीरो जयपुर ( Jaipur ) शहर से 30 किलोमीटर दूर आमेर ( Amber ) तहसील के गांव चीथवाड़ी निवासी 28 वर्षीय घनश्याम कांदेला है। जिन्होंने अपनी पहचान कम्प्यूटर पर बैठकर ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ देने से ज्यादा पीडि़तों के पास पहुंचकर लाभांवित करने से बनाई है।

उनकी इसी लगन का नतीजा है कि 9 अगस्त को केंद्र में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ( IT Minister Ravi Shankar Prasad ) ने ट्वीट कर कार्यों की सराहना की। इससे पहले नीति आयोग के तत्कालीन उपाध्यक्ष अरविंद पनगडिय़ा ( Arvind Panagariya ) भी मिलने के लिए गांव पहुंच चुके है। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ( Vasundhara Raje ) भी पुरस्कृत कर चुकी है।

सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के पूर्व प्रमुख सचिव आईएएस अखिल अरोड़ा, ई-मित्र प्रभारी आर.के. शर्मा भी सम्मानित कर चुके है। घनश्याम का कहना है कि ई-मित्र संचालन से परिवार में मदद तो कर पाता हूं, लेकिन समाज के बीच रहकर असहाय लोगों की मदद करने में ही मन को संतुष्टि मिलती है। मेरे कार्यों के चलते सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारी भी सेंटर पर आ चुके है। सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग राजस्थान के अधिकारियों ने कई बार प्रोत्साहित किया।

घनश्याम कहते है कि मेरे गांव चीथवाड़ी ही नहीं बल्कि 50 किलोमीटर दूर भी किसी भी असहाय की सूचना मिलती है तो निकल पड़ता है। मैंने 200 से अधिक लोगों के पास जाकर पेंशन, पालनहार, सरकारी आर्थिक मदद दिलाई है। इनमें ऐसे लोग भी है, जो बीमारी से सालों से बिस्तर पर है। मानसिक बीमारी है। जिनके पास बस में सफर कर सरकारी कार्यालय तक पहुंचने तक का पैसा नहीं था। मैंने 5 हजार ग्रामीणों को डिजिटल साक्षर बनाया है। इनमें ज्यादातर बुजुर्ग और महिलाएं शामिल है।

वहीं, ग्रामीण क्षेत्र में इंवेस्टमेंट अवेयरनेस प्रोग्राम चलाकर ग्रामीणों को सही जगह निवेश करना बताया। पंद्रह सौ महिलाओं के लिए कानूनी साक्षरता प्रोग्राम चलाया। घनश्याम ने बताया कि वर्ष संस्कृत से स्नातक हूं। वर्ष 2011 में घर पर ही एक कमरे में कॉमन सर्विस सेंटर शुरू किया। तब लोग 50 किलोमीटर दूर से काम कराने आते। मैंने उन्हीं लोगों को कम्प्यूटर शिक्षा दी। आज जिन्हें मैंने सीखाया, वे 70 से अधिक जगह ई-मित्र आईटी केंद्र खोल कर जीवनयापन कर रहे है। कॉमन सर्विस सेंटर दिल्ली के सीईओ डॉ. दिनेश त्यागी ने भी प्रोत्साहित किया।

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