मंत्री बोले, पहली से पांचवीं कक्षा में तृतीय भाषा के रूप में उर्दू नहीं

शिक्षामंत्री के विरोध में उर्दू शिक्षक

छठी से तृतीय भाषा के रूप में पढ़ाई जाती है उर्दू
अल्पसंख्यकों को मातृभाषा में तालीम लेने से वंचित कर रही सरकार: राठौड़

By: Rakhi Hajela

Updated: 21 Nov 2020, 02:53 PM IST

शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद सिंह डोटासरा की ओर से पिछले दिनों उर्दू शिक्षा को लेकर दिए गए एक बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। उर्दू शिक्षक डोटासरा के बयान की निंदा करते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से उन्हें पद से हटाए जाने की मांग कर रहे हैं। वहीं उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने भी डोटासरा के वक्तव्य की निंदा करते हुए कहा है कि सरकार अल्पसंख्यक वर्ग को उनकी मातृभाषा की तालीम लेने से भी वंचित कर रही है, जो इस सरकार के मुंह पर किसी कालिख से कम नहीं है।
यह है मामला
गौरतलब है कि पिछले दिनों उर्दू शिक्षकों का एक प्रतिनिधिमंडल शिक्षामंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के समक्ष उर्दू शिक्षकों की समस्याओं और उर्दू की पाठ्यपुस्तकों की कमी को लेकर ज्ञापन देने गया था। उस दौरान डोटासरा ने कहा कि प्रदेश के स्कूलों में पहली से पांचवीं तक तृतीय भाषा नहीं होती है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा के कार्यकाल में स्कूल शिक्षा में उर्दू शिक्षक के जो पद थे उसे कांग्रेस सरकार के समय बढ़ाया गया है। उर्दू के शिक्षक जो दूसरे विषयों के विरूद्ध लगे हुए थे उन्हें कांग्रेस सरकार ने उदू के पदों पर लगाया गया है। भाजपा सरकार ने तृतीय भाषा के साथ नाइंसाफी की थी लेकिन कांग्रेस सरकार किसी भाषा के साथ एेसा नहीं करती।
byte— गोविंद सिंह डोटासरा , शिक्षा राज्यमंत्री
शिक्षा मंत्री के बयान का विरोध
शिक्षा राज्य मंत्री की ओर से दिए गए इस बयान को लेकर उर्दू शिक्षकों में आक्रोश है। उनका कहना है कि एक ओर सरकार लगातार स्कूलों से उर्दू समाप्त करती जा रही है वहीं दूसरी ओर शिक्षामंत्री एेसे बयान दे रहे हैं। पहले शालादर्पण पोर्टल से उर्दू किताबों की डिमांड का ऑप्शन समाप्त करवा दिया गया, फिर स्कूलों से उर्दू शिक्षक के पद समाप्त कर दिए गए और अब पहली से पांचवीं तक तृतीय भाषा नहीं होने की बात शिक्षा राज्य मंत्री कह रहे हैं। शिक्षकों ने कहा कि यदि सरकारी स्कूलों में पांचवीं तक उर्दू पढ़ाई ही नहीं जा रही थी तो वर्ष २०१९ तक इस विषय की परीक्षाएं कैसे हो रही थीं, विद्यार्थियों की मार्कशीट में उर्दू का उल्लेख कैसे है। और तो और स्कूलों में उर्दू शिक्षक क्या कर रहे थे।

इनका कहना है,
अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को मातृभाषा में तालीम लेने से वंचित किया जा रहा है। स्कूलों को उर्दू भाषा से शून्य करने का प्रयास किया जा रहा है। शिक्षा राज्य मंत्री का कहना है कि प्राइमरी स्कूलों में उर्दू तृतीय भाषा के रूप में नहीं होती तो इतने साल तक स्कूलों में इस भाषा की परीक्षा कैसे हुई। २०१९ तक स्कूलों में उर्दू की परीक्षा होती रही है। अगर स्कूलों में उर्दू नहीं पढ़ाई जा रही थी तो स्कूलों में शिक्षक क्यों लगे हुए थे। शिक्षा राज्य मंत्री नाकारा साबित हो रहे हैं मुख्यमंत्री को चाहिए कि उन्हें बर्खास्त किया जाए।
अमीन कायमखानी, प्रदेशाध्यक्ष,
उर्दू शिक्षक संघ राजस्थान।

उर्दू सिंधी पंजाबी और गुजराती पढऩे वाले विद्यार्थियों के साथ वर्तमान सरकार नाइंसाफी कर रही है, जिससे जनआक्रोश पैदा हो रहा है। दिसंबर २००४ में भाजपा के शासनकाल में अल्पसंख्यक भाषाओं के लिए शिक्षा निदेशालय ने जो निर्देश जारी किए थे, इन निर्देशों की पालना सरकार नहीं कर रही है। कांग्रेस अपने चुनावी घोषणापत्र की पालना नहीं कर रही। सरकार अल्पसंख्यक वर्ग को उनकी मातृभाषा की तालीम लेने से भी वंचित कर रही है, जो इस सरकार के मुंह पर किसी कालिख से कम नहीं है।
राजेंद्र राठौड़, उप नेता प्रतिपक्ष।

Rakhi Hajela Desk
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