‘भारत बंद के दौरान दर्ज मुकदमे अविलम्ब वापस ले सरकार, दलित हितैषी का दे सन्देश’: हरीश मीना

अप्रैल 2018 को ‘भारत बंद आन्दोलन’ का मामला, विधायक हरीश मीना ने लिखा मुख्यमंत्री को पत्र, एससी- एसटी युवाओं पर दर्ज मुकदमें वापस लेने की उठाई मांग

By: nakul

Published: 22 Jun 2020, 09:47 AM IST

जयपुर।

देवली-उनियारा विधायक हरीश चन्द्र मीना ( MLA Harish Chandra Meena ) ने राज्य सरकार से वर्ष 2018 में भारत बंद आन्दोलन के दौरान दर्ज किए गए मुकदमों को वापस लेने की मांग की है। इस सिलसिले में उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ( Ashok Gehlot ) को पत्र लिखकर आग्रह भी किया है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति एक्ट पर दिए गए फैसले के विरोध में दलित संगठनों ने 2 अप्रैल 2018 को भारत बंद किया था। प्रदेश में कई जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झडपें हुई थी। जिसके बाद आन्दोलनकारियों के खिलाफ पुलिस ने मुकदमें दर्ज किये थे। विधायक मीना दौसा से पूर्व विधायक और प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक भी हैं।

ये लिखा विधायक मीना ने
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में विधायक हरीश चन्द्र मीना ने लिखा, ‘’2 अप्रैल 2018 को भारत बंद आंदोलन के दौरान अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के युवाओं द्वारा अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए देश भर में आन्दोलन किया गया था। राजस्थान में भी इस वर्ग के युवाओं ने प्रशासन से अनुमति लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आन्दोलन किया था। लेकिन प्रशासन ने in आन्दोलनकारियों पर ब्बर्बर्ता की और तत्कालीन सरकार ने दुर्भावनापूर्वक इन बेगुनाहों के विरुद्ध मुक़दमे दर्ज किए। सरकार से निवेदन है कि इन सभी मुकदमों को अविलम्ब वापस लिया जाए, ताकि प्रदेश की जनता को महसूस हो कि आपके नेतृत्व में प्रदेश में एक दलित हितैषी जन कल्याणकारी सरकार कार्य कर रही है।‘’

विधायक मीना ने मुख्यमंत्री को इस बात को लेकर भी अवगत करवाया कि इसी मांग को लेकर वे पहले भी आग्रह कर चुके हैं। साथ ही विधानसभा सत्र के दौरान भी इस मुद्ददे को उठा चुके हैं। वहीँ कई सामाजिक संगठनों ने भी उस आन्दोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस लेने की आवाज़ उठाई है।

इसलिए हुआ था आन्दोलन, दर्ज हुए थे मुकदमे
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में दलित संगठनों ने 2 अप्रैल 2018 को भारत बंद किया था। भारत बंद के दौरान राजस्थान सहित देश के कई हिस्सों में हिंसा भड़क गई थी, जिसमें कई लोगों की जान तक चली गई थी जबकि कई लोगों पर एफआईआर दर्ज हुई थी। प्रदेश में कई जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झडपें हुई थी।

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