MNIT के प्रोफेसर्स ने बनाया हैंड सेनेटाइजर

इस उत्पाद में पेराबेंस, ट्राईक्लोस्म, सिंथेटिक खुशबू और थेलेटेस जैसे रसायनों का उपयोग नहीं किया, घर पर भी बना सकते हैं सेनेटाइजर, बाजार में सेनेटाइजर की हो रही कालाबाजारी, डब्ल्यूएचओ की गाइड लाइन के अनुसार बनाया सेनेटाइजर

By: MOHIT SHARMA

Updated: 19 Mar 2020, 02:56 PM IST

जयपुर। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा कोरोना वायरस को महामारी घोषित किए जाने के बाद हैंड सेनेटाइजर की कालाबाजारी शुरू हो गई है। हालांकि सरकार ने इन चीजों को आवश्यकता वस्तु अधिनियम में शामिल किया है। बाजार से अच्छी किस्म का सेनेटाइजर गायब सा हो गया है, ऐसे में एमएनआईटी जयपुर के प्रोफेसर्स ने सेनेटाइजर बनाया है। यह डब्ल्यूएचओ की गाइड लाइन के अनुसार बनाया गया है। एमएनआईटी ने सोशल कॉन्ट्रीब्यूशन के चलते इसे बनाया है अब आमजन भी इसे घर पर बना सकता है।

बाजार में बेची जा रही कई नकली सामग्रियों की खबरों के बीच सेनिटाइजर जैसे उत्पादों की मांग बढ़ रही है। इसे देखते हुए एमएनआईटी के सेंटर फॉर एनर्जी एण्ड एनवॉरमेंट के हैड डॉ.विवेकानंद और डॉ.कपिल पारीक ने एक नया हैंड-सेनिटाइजर विकसित किया है। इस हैंड-सेनिटाइजर में प्राकृतिक गंध और अल्कोहल की मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के दिशा-निर्देशों के अनुसार उपयोग की गई है इस उत्पाद में पेराबेंस, ट्राईक्लोस्म, सिंथेटिक खुशबू और थेलेटेस जैसे रसायनों का उपयोग नहीं किया गया है

हर व्यक्ति को कर रहे सेनेटाइज
एमएनआईटी के डीन एकेडमिक के.आर.नियाजी ने बताया कि हर व्यक्ति को सेनेटाइज कर ही प्रवेश दिया जा रहा है। बाजार में सेनेटाइजर की कमी थी, तो हमारी फैकल्टी ने बना दिया यह बाजार से भी काफी इफेक्टिव है। इसे एमएनआईटी के सभी विद्यार्थी और स्टाफ काम में ले सकेंगे। उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए एमएनआईटी के दो गेट भी बंद कर दिए हैं।

ऐसे बनाए सेनेटाइजर
एमएनआईटी के सेंटर फॉर एनर्जी एण्ड एनवॉरमेंट के हैड डॉ.विवेकानंद और डॉ.कपिल पारीक ने बताया कि इसके लिए आइसो प्रोपाइल अल्कोहल, गिलसराल, हाइड्रोजन परॉक्साइड और डिशटिल वॉटर की जरूरत है। उन्होंने बताया कि यह हानीकारक नहीं है। जबकि बाजार में मिल रहे कई सेनेटाइजर हानीकारक भी हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि आइसो प्रोपाइल अल्कोहल हानीकारक नहीं है, गिलसराल माश्चराइजर का काम करता है, हाइड्रोजन परॉक्साइड और आइसो प्रोपाइल अल्कोहल से माइक्रोब्स मरते हैं। यह 150 से 200 रुपए लीटर में बन सकता है। इसमें किसी भी प्रकार की खुशबू नहीं डाली है, उससे एलर्जी हो सकती है। जैल भी नहीं डाला है, जैल से इसकी क्षमता कम होती है।

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