मां ही है इस दुनिया में भगवान जैसी

रुके तो चांद जैसी, चले तो हवाओं जैसी

By: Rakhi Hajela

Updated: 10 May 2020, 02:08 PM IST

कहते हैं ईश्वर मां के रूप में खास तौर से हमारे लिए इस धरती पर उपस्थ‍ित होते हैं। हमारी अनकही बातों को समझने से लेकर, अव्यक्त और अनजानी संवेदनाओं की सहभागी बनने के लिए। कुछ मामलों में जीवन में कई उतार चढ़ावों का अकेले सामना करने के बाद भी वह कमजोर नहीं बल्कि और मजबूती से खड़ी होती है अपनी संतान के लिए। वह किसी पद विशेष से नहीं पहचानी जाती, ना ही मां के सर्वोच्च पद के आगे उसके लिए कोई और पदवी महत्वपूर्ण होती है.... दुनिया के लिए वह कोई भी हो, लेकिन बच्चे के लिए वह हमेशा ममतामयी और दुनिया से लडऩे को तैयार रहती है। आज मदर्स डे पर हम आपको मिलवाने जा रहे हैं एेसी ही कुछ ङ्क्षसगल मदर्स से। जो हर मुश्किल और चुनौती का सामना करते हुए खुद अपनी पहचान तो बना ही रही हैं साथ ही अपने बच्चों को भी आगे बढ़ा रही हैं।

बेटे को सिखाया आगे बढऩा

मदर टेरेसा से प्रभावित अलका जैन एक शांत और सादगी से भरी जिंदगी जी रही हैं। वह अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों, ड्यूटी के साथ गरीब और असहार पीडि़तों की सेवा के लिए निरंतर प्रयासरत हैं और यही संस्कार उन्होंने अपने बेटे को देने का प्रयास किया है। जयपुर विद्युत वितरण निगम में कनिष्ठ अभियंता के पद पर कार्यरत अलका ने कभी नहीं सोचा था कि उनकी विवाहित जिदंगी अचानक एक झटके से इस प्रकार खत्म हो जाएगी। २००८ में सॉफ्टवेयर इंजीनियर कपिल से उनकी शादी हुई। ९ अप्रेल २०१० को बेटे गॢवत का जन्म हुआ। वर्ष २०१५ में हुए एक हादसे में अल्का के पति कपिल और ससुर इस संसार से विदा हो गए। हादसे में पांच साल का बेटा गर्वित बुरी तरह से जख्मी हुआ। उसके चेहरे में गाड़ी के कांच घुसने से गहरे घाव हो गए साथ ही शरीर के कई अन्य हिस्सों पर भी गंभीर चोटें आईं। अलका खुद भी दुर्घटना में बुरी तरह से घायल हुई थी। यह वह समय था जब अलका बुरी तरह से टूट चुकी थी। पति के जाने के बाद दुनिया की असलियत उनके सामने आने लगी थी। घर से बाहर निकालने के प्रयास शुरू हो गए। चरित्र पर भी इलजाम लगाए गए। चेहरे पर घाव आने से बेटे गर्वित अपना विश्वास खो चुका था। एेसे में अलका ने खुद को संभाला और एक बार फिर अपनी नौकरी पर जाने लगी। बेटे का खोया हुआ सेल्फ कॉन्फिडेंस वापस लाना उनके लिए सबसे बड़ा स्ट्रगल था। गर्वित अब दस साल का हो चुका है उसका कहना है कि जब स्कूल में बच्चे उससे चेहरे को लेकर सवाल करते थे तो

बड़ी तकलीफ होती थी एेसे में मम्मी ने मेरा हौंसला बढ़ाया। अलका के मुताबिक एक सिंगल मदर के लिए सबसे चैलेंजिंग होता है काम के साथ घर की जिम्मेदारी भी निभाना। जब तक पति थे हम मिलकर सब कर लेते थे लेकिन उनके जाने के बाद सब कुछ बदल गया। बेटे का लंबा इलाज चला कई ऑपरेशन के बाद अब वह काफी ठीक हो गया है साथ ही उसका आत्मविश्वास भी लौटा है। वह न केवल पढ़ाई में बल्कि स्पोट्र्स और पेंटिंग में भी अपने स्कूल में टॉप पर रहता है। वहीं गर्वित का कहना है कि मां ने सिखाया बुरे वक्त में परेशान होने से काम नहीं चलता। हमें शांत मन से स्थिति पर काबू पाना होता है।


..................

Rakhee Hajela, [09.05.20 16:31]
एेसी ही एक मां हैं मीनाक्षी भट। कृषि विभाग में कार्यरत मीनाक्षी की जिंदगी सुकून से भरी हुई थी। एक बेटा और पति के साथ आराम से जीवन बसर कर रही मीनाक्षी को नहीं पता था कि अचानक पति की मृत्यु से जिंदगी बदल जाएगी। मीनाक्षी कहती हैं कि वह अपने घर काम के लिए पति पर ही निर्भर रहती थी कभी सोचा नहीं था कि वह अचानक एेसे चले जाएंगे। २०१७ में पति की मृत्यु के समय बेटा दसवीं क्लास में था। अचानक उनकी मौत से दोनों सदमे में आ गए। बेटा इस कदर सदमे में था कि उस समय अपना एग्जाम नहीं दे सका। एक साल ड्रॉप करना पड़ा। सभी का कहना था कि पति की जगह बेटे को नौकरी मिल जाएगी लेकिन मीनाक्षी ने विरोध सहते हुए खुद नौकरी करना शुरू कर दिया। ससुराल और पीहर भीलवाड़ा और उदयपुर में था जहां उन्हें अपने बेटे ऋग्वेद का कोई भविष्य नजर नहीं आया। एेसे में पोस्टिंग भी जयपुर ली और एक बार खुद को और अपने बेटे के साथ नॉर्मल लाइफ जीने की कोशिश करने लगीं। उनकी कोशिशों का ही परिणाम है कि ऋग्वेद को नीदरलैंड से बेस्ट कॉलेज में एडमिशन मिला। ऋग्वेद का कहना है कि जब मुझे कॉलेज में एडमिशन होने की कन्र्फमेशन मिली तो सभी विरोध कर रहे थे, सभी का कहना था कि मम्मी जयपुर में अकेले रह जाएंगी लेकिन मम्मी ने मुझे मोटिवेट किया और आगे बढ़ाया। आज मुझे इकोनॉमिक्स के बेस्ट कॉलेज में एडमिशन मिला है तो उसकी वजह मम्मी ही हैं। वहीं मीनाक्षी का कहना है कि पति की मौत ने बेटे को समय से पहले ही मैच्योर कर दिया। मैं चाहती हूं कि वह इसी तरह से आगे बढ़ता रहे। वहीं ऋग्वेद का कहना है कि हम कितने भी अच्छे स्कूल या कॉलेज में पढ़ लें लेकिन मां जो सीख देती हैं, वो सिर्फ उन्हीं से मिल सकती है। और सिर्फ ये ही सीखें हैं, जो जिंदगी की चुनौतियों का सामना करना सिखा देती हैं। सिखा देती हैं कि हम हमेशा जीतेंगे नहीं और हमेशा हारेंगे भी नहीं। ऐसी ही कमाल की सीखें जो सिर्फ मां देती हैं, उनको मदर्स डे के दिन याद कर लीजिए। पत्रिका टीवी के लिए

Rakhi Hajela Desk
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned