दूध के दान से मिला जीवन का वरदान

दूध के दान से मिला जीवन का वरदान

Shalini Agarwal | Publish: Nov, 10 2018 02:51:17 PM (IST) | Updated: Nov, 10 2018 02:51:18 PM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

सिंगापुर में खुले मदर मिल्क बैंक ने एक साल में बचाई 600 बच्चों की जान

सिंगापुर के केके वुमंस एंड चिल्ड्रंस हॉस्पिटल (केकेएच) में उन 600 बच्चों को नया जीवन मिला है, जिनकी मां उन्हें ठीक से स्तनपान नहीं करा पा रही हैं। दरअसल बीते साल अगस्त में खुलने के बाद हॉस्पिटल ने अपने यहां 400 डोनर्स को रीक्रूट किया है। सिंगापुर का यह ऐसा इकलौता हॉस्पिटल है, जहां मां का दूध इकट्ठा किया जाता है और यही वजह है कि यहां नवजात या समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों की आंतों में संक्रमण होने से होने वाली मौतों में भी कमी आई है। बैंक शुरू होने से पहले यहां पैदा होने वाले 200 बच्चों में से 5.8 फीसदी को इस प्रकार का संक्रमण हुआ था, जो अब घटकर 1.8 फीसदी रह गया है।
इससे पहले इन बच्चों को ऊपर का दूध पिलाया जाता था, जो इन्हें पच नहीं पाता था और उनकी आंतों में संक्रमण हो जाता था। मां के दूध में ऐसे एंजाइम्स होते हैं तो बच्चों की दूध पचने में मदद करने के अलावा उन्हें पोषण, हार्मोन और सुरक्षात्मक एंटीबॉडीज प्रदान करते हैं। इस बच्चों में बीमारी का खतरा कम हो जाता है और उनका विकास तेजी से होने लगता है। पिछले साल यहां हुए बच्चों में से 10 फीसदी समय से पहले यानी प्रीमैच्योर हुए थे। वहीं 2007 से बीते साल के बीच प्रीमैच्योर बच्चों का जन्म 11 फीसदी से बढक़र 13.5 फीसदी हो गया है। हॉस्पिटल के ह्यूमन मिल्क बैंक के निदेशक डॉ. चुआ मे चेन के मुताबिक, प्रीमैच्योर बच्चों का जन्म इसलिए बढ़ा है कि क्योंकि यहां शादियों की उम्र बढऩे के साथ ही लड़कियां पहला बच्चा पैदा करने में देर कर रही हैं। मां का दूध न केवल उन बच्चों को उपलब्ध कराया जाता है, जो प्रीमैच्योर होते हैं बल्कि उन्हें भी दिया जाता है जिनका वजन जन्म के समय कम होता है, जिन्हें दिल की बीमारी होती है या फिर उन्हें आंतों का किसी प्रकार का संक्रमण होता है। हालांकि दूध केवल सिंगापुर मूल के लोगों या फिर यहां स्थाई रूप से बसने वालों को ही प्रदान किया जाता है। डॉ. चुआ के मुताबिक 13 दिन में 2.9 लीटर मां का दूध हर बच्चे को प्रदान किया जाता है। इस मिल्क बैंक में दूध दान करने वाली माताओं को अलग-अलग बीमारियों के लिए होने वाले ब्लड टेस्ट से गुजरना पड़ता है। दूध का विभिन्न तरह से परीक्षण करके उसके पाश्चराइज किया जाता है।

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