scriptMother of six daughters died in the accident, was buried under the wal | चौथी में पढ़ने वाली पूजा की कहानी जानकार रो देंगे आप.... आठवीं में पढ़ने वाली बहन उसे संभाल रही है... छह बहनों की मां अब नहीं आएगी | Patrika News

चौथी में पढ़ने वाली पूजा की कहानी जानकार रो देंगे आप.... आठवीं में पढ़ने वाली बहन उसे संभाल रही है... छह बहनों की मां अब नहीं आएगी

बारहवीं तक पढ़ी लिखी चीनू कहती है कि मां का सपना था हम बेटियां पढ़ें.... अब मां नहीं रही तो ये सपना मैं पूरा करूंगी।

जयपुर

Updated: June 22, 2022 11:02:01 am

जयपुर , फुलेरा
कहतें है ना कि समय किसी के लिए नहीं रुकता... निरंतर चलता जाता है। ऐसा जयपुर ग्रामीण के फुलेरा क्षेत्र में भी हुआ है। दो दिन पहले बारिश के चलते दीवार गिरने से जो हादसा हुआ, उस हादसे में दो बहनों की मौत हो गई। उनमें से बड़ी बहन की छह बेटियां हैं और अब परिवार में कोहराम मचा हुआ है। दस साल से बीस साल तक की छह बेटियां में से सबसे बड़ी ने मां की जिम्मेदारी संभाल ली है। बारहवीं तक पढ़ी लिखी चीनू कहती है कि मां का सपना था हम बेटियां पढ़ें.... अब मां नहीं रही तो ये सपना मैं पूरा करूंगी।
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चौथी से लेकर सैंकेंड ईयर की छात्राएं हैं बेटियां
फुलेरा के उद्योग नगर में रीको की दीवार गिरने से चपेट में आई बड़ी बहन संतोष देवी की छह बेटियां हैं। सबसे बड़ी चीनू है जो बीस साल की है। उसने बारहवीं तक पढ़ाई कर मां का हाथ बंटाने के लिए पढ़ाई छोड़ दी थी। उससे छोटी मीनू 18 वर्ष की है और सरकारी महाविद्यालय में सैंकेंड ईयर में अध्ययनरत है। तीसरी पुत्री पायल 12 वी कक्षा में अध्ययनरत है । चौथी पुत्री कोमल दसवीं कक्षा में अध्ययनरत है। 5वी पुत्री निक्की आठवीं कक्षा में और 6टवी पुत्री पूजा 10 वर्ष की है जो कक्षा 4 में पढ़ रही हैं।
हमारी परवरिश के लिए मशीन बन गई थी मां, हम हम उनके सपने पूरें करेंगे
बीस साल की चीनू ने बताया कि पिता मजदूरी करते हैं, हाड तोड मेहनत करते हैं। जैसे तैसे दो भैंसे लीं थी, अभी तक तो उनका पूरा हिसाब भी चुकता नहीं हुआ था। मां तो मानों मशीन ही थी। सवेरे चार बजे से रात के बारह बजे तक खपती थी। इतनी मेहनत हम बेटियां मिलकर भी नहीं कर पाते थे जितनी अकेली करती थी। उस दिन भी मां सवेरे उठकर दूध दुह रही थी। अचानक तेज आवाज आई। पता चला तो मैंने दौड़ लगाई, देखा मां गायब है। काफी देर तक मलबा हटाया जाता रहा, बाद में मां हमे छोड़कर चली गई। चीनू ने कहा कि अब मां की जगह हम मेहनत कर रहे हैं। गरीब हैं लेकिन सपने देखने का हमारा भी हक है। पूरा भी करेंगे। मां का आर्शीवाद साथ है।

पूजा रोती रहती है... पूछती है कि हमारी मां को ही क्यों छीना ईश्वर ने
18 साल की मीनू कहती है कि मां हमारे साथ है, लगता ही नहीं है कि वे नहीं हैं। दस साल की सबसे छोटी बहन को संभालते हुए मीनू बोली कि पूजा को संभालना मुश्किल है। सबसे छोटी थी तो मां की लाडली थी, हमारे उपर हुकुम चलाती थी जब मां थी। अब मां नहीं है तो रो रोकर उसका बुरा हाल है। हर कुछ देर में बस यही सवाल करती है कि हमारी मां को ही भगवान क्यों ले गए.... बिना मां के कैसे बड़े होंगे। फिर से वह रोने लगती है और बड़ी बहन उसे चुप कराती है। आठवीं और दसवी में पढ़ने वाली निक्की और कोमल कहती हैं कि हम सब मिलकर मेहनत कर रही हैं... मां के सपने जरूर पूरे करेंगी।

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