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Parsa east kanta besan: परसा के ग्रामवासियों  का खदान शुरू करवाने के लिए आंदोलन

पिछले कुछ सप्ताह से राजस्थान की परसा ईस्ट एवं केते बासेन खदान के समर्थन में चल रहे अभियान के अंतर्गत परसा गांव क्षेत्र के लोगों ने एक बार फिर राहुल गांधी को पत्र लिखकर जल्द ही योजना करने का अनुरोध किया है।

जयपुर

Published: June 18, 2022 11:31:35 am

पिछले कुछ सप्ताह से राजस्थान की परसा ईस्ट एवं केते बासेन खदान के समर्थन में चल रहे अभियान के अंतर्गत परसा गांव क्षेत्र के लोगों ने एक बार फिर राहुल गांधी को पत्र लिखकर जल्द ही योजना करने का अनुरोध किया है। यह पत्र छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के अलावा स्थानीय कांग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव को भी लिखा गया है। परसा ईस्ट एवं केते बासेन कोयला खनन परियोजना अब बंद होने की स्थिति में है, जिसके कारण प्रभावित क्षेत्र के लोगों को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल आदि प्रकार के संकटो से जूझने की स्थिति बन जाएगी। मुख्यतः आर्थिक स्थिति पर विशेष प्रभाव पड़ेगा। इससे पहले भी स्थानीय लोगो ने जून 2 को राहुल गांधी को पत्र लिखकर ग्राम परसा, फतेहपुर, बासन, घटबर्रा, साल्हि, जनार्दनपुर तथा तारा निवासियों ने राजस्थान की खदान परियोजनाओं में हो रही देरी के कारण हो रहे नुकसान के बारे में विस्तार से बताया था। ग्रामवासियों का कहना है की महामारी के समय पर खदान परियोजना के तहत चलने वाले जनलक्षी कार्यक्रमों से वे कोविड से सफलता पूर्वक लड़ पाए थे तब ये बाहरी आंदोलनकारी गायब थे। ग्रामवासियों को फिक्र है कि जब बाहरी तत्व परसा के भविष्य को अंधकार में डालकर चले जाएंगे, तब वे रोजगार और विकास के लिए कई साल पीछे चले जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि देश के सबसे बड़े कोयला उत्पन्न करने वाले छत्तीसगढ़ में भारत सरकार द्वारा अन्य राज्य जैसे राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश इत्यादि को कोल ब्लॉक आवंटित किये गए हैं, जिसमें राजस्थान सरकार के 4400 मेगावॉट के ताप विद्युत उत्पादन संयंत्रों के लिए सरगुजा जिले में तीन कोयला ब्लॉक परसा ईस्ट केते बासेन (पीईकेबी), परसा और केते एक्सटेंशन आवंटित किया गया है। आज राजस्थान की पहेली ब्लॉक परसा ईस्ट एवं केते बासेन खदान अकेले पर करीब 5000 से ज्यादा परिवार निर्भर है और यह संख्या बाकी दो खदानों के शुरू हो जाने से तीन गुनी हो जाएगी। इससे स्थानीय ग्रामवासियों को रोजगार के लिए पलायन करना नहीं पड़ेगा।
Parsa east kanta besan: परसा के ग्रामवासियों  का खदान शुरू करवाने के लिए आंदोलन
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