भीलवाड़ा: थम गया प्रचार का शोर

भीलवाड़ा: थम गया प्रचार का शोर

Tej Narayan Sharma | Updated: 15 Aug 2015, 07:08:00 PM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

प्रत्याशियों ने लगाया पूरा जोर

नगर परिषद के 17 अगस्त को होने वाले चुनाव के लिए प्रचार अभियान का शोर शनिवार को शाम थम गया। नगरीय निकाय चुनावों में जीत हासिल करने के लिए प्रमुख दलों के साथ प्रत्याशियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। दोनों दलों के नेताओं ने प्रत्याशियों व चुनाव प्रभारियों के साथ घर-घर जाकर मतदाताओं से सम्पर्क साधा।


कोई रैली निकाल कर तो कोई घर-घर पहुंच कर अपने पक्ष में माहौल बनाने में लगा रहा। दोनों दल उन वार्डों पर विशेष फोकस कर रहे हैं, जहां उनका प्रत्याशी तुलनात्मक दृष्टि से कमजोर नजर आ रहा है। भाजपा व कांग्रेस ने प्रचार अभियान को गति देने के साथ ही मतदान दिवस पर अधिकाधिक वोट पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में डलवाने के लिए बूथ प्रबंधन की तैयारियों को भी अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। प्रत्येक बूथ की व्यवस्था संभालने के लिए कार्यकर्ताओं की नियुक्ति की जा रही है।

बागियों के खिलाफ कार्रवाई में आनाकानी

पार्टी कार्यकर्ता ही बगावत कर चुनाव मैदान में डटे है। अधिकृत प्रत्याशी का चुनावी गणित बिगाड़ रहे इन बागियों के खिलाफ कार्रवाई की निरन्तर गुहार लगा रहे हैं। इसके बावजूद कांग्रेस व भाजपा बागियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने से कतरा रहे हैं। इसका मुख्य कारण 21 अगस्त को होने वाला सभापति व पालिकाध्यक्ष का चुनाव माना जा रहा है।


इस बार निर्वाचित पार्षद ही निकाय प्रमुख चुनेंगे। एेसे में दोनों ही दल बागी के जीत जाने पर निकाय प्रमुख के चुनाव में उसके समर्थन की जरूरत पडऩे की संभावना के मद्देनजर कोई कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं। निकाय प्रमुख के चुनाव में संख्या बल के आधार पर कांटे का मुकाबला होने पर जीतने वाले बागी प्रत्याशियों की भूमिका अहम होगी।


यह माना जा रहा है कि मतगणना के बाद पर्याप्त पार्षद चुनकर आने पर ही राजनीतिक दल बागी प्रत्याशियों के खिलाफ पार्टी से निलम्बन या निष्कासन जैसे कदम उठा सकते हैं। गौरतलब है कि भीलवाड़ा नगर परिषद क्षेत्र में कांग्रेस के दस एवं भाजपा के 5 अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ पार्टी कार्यकर्ता ही बगावत कर निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनावी मैदान में डटे हुए हैं।


इस बार अलग हैं हालात
नगर परिषद चुनाव-2010 के मुकाबले इस बार हालात बदल गए हैं। पिछली बार सभापति के सीधे निर्वाचित होने से पार्षदों की उनके चुनाव में विशेष भूमिका नहीं थी। एेसे में कांग्रेस व भाजपा ने पार्षद के बागी प्रत्याशियों के खिलाफ तुरन्त अनुशासनात्मक कार्रवाई शुुरू कर दी थी। इस बार सभापति चयन पार्षदों के हाथ में होने से दोनों ही दल मतगणना की स्थिति स्पष्ट नहीं होने तक किसी प्रकार का जोखिम नहीं लेना चाह रहे हैं।


नियंत्रण परिधि का रखना होगा ध्यान
मतदान दिवस पर मतदान केन्द्र के भीतर या उसके 100 मीटर की परिधि में या उसके आसपास किसी भी मतदाता से वोट मांगना या किसी अभ्यर्थी के पक्ष में वोट नहीं देने के लिये मनाना भी आचार संहिता का उल्लंघन माना गया है। मतदान केन्द्र एवं उसके 100 मीटर की परिधि में चुनाव ड्यूटी में लगे अधिकारियों को छोड़कर अन्य कोई व्यक्ति मोबाइल, कोडलेस फोन  व वायरलेस फोन आदि नहीं ले जा सकेंगे।



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