Skand shasthi - शिव—पार्वती की इस तरह करें पूजा, कम हो जाते हैं संतान के कष्ट

संतान के लिए शुक्रवार का दिन बहुत श्रेष्ठ है. 26 जून को शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है जिसे स्कंद-षष्ठी के नाम से जाना जाता है। इसे चम्पा षष्ठी या गुहा षष्ठी भी कहा जाता है। पुराणों के अनुसार, इस दिन स्कंद भगवान की पूजा का विशेष महत्व है। दरअसल षष्ठी तिथि को कार्तिकेय भगवान का जन्म हुआ था। इसलिए स्कंद षष्ठी तिथि को भगवान शिव-पार्वती के पुत्र कार्तिकेय की पूजा की जाती है।

By: deepak deewan

Published: 26 Jun 2020, 09:16 AM IST

जयपुर.
संतान के लिए शुक्रवार का दिन बहुत श्रेष्ठ है. 26 जून को शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है जिसे स्कंद-षष्ठी के नाम से जाना जाता है। इसे चम्पा षष्ठी या गुहा षष्ठी भी कहा जाता है। पुराणों के अनुसार, इस दिन स्कंद भगवान की पूजा का विशेष महत्व है। दरअसल षष्ठी तिथि को कार्तिकेय भगवान का जन्म हुआ था। इसलिए स्कंद षष्ठी तिथि को भगवान शिव-पार्वती के पुत्र कार्तिकेय की पूजा की जाती है। भगवान कार्तिकेय की पूजा खासतौर से दक्षिण भारत में की जाती है जहां उन्हें मुरुगन के नाम से जाना जाता है.


ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर के अनुसार पंचमी से युक्त षष्ठी तिथि को व्रत के लिए श्रेष्ठ माना गया है। षष्ठी को भी उपवास रखते हुए स्कंद भगवान की पूजा का विधान है। मां दुर्गा के 5वें स्वरूप स्कंदमाता को भगवान कार्तिकेय की माता के रूप में जाना जाता है। इस षष्ठी को चम्पा षष्ठी भी कहते हैं, क्योंकि भगवान कार्तिकेय को सुब्रह्मण्यम के नाम से भी पुकारते हैं और उनका प्रिय पुष्प चम्पा है।

भगवान कार्तिकेय शक्ति और युद्ध के प्रतीक हैं। भगवान कार्तिकेय ने तारकासुर नाम के राक्षस को मारा था। सभी प्रकार के विवादों को समाप्त करने में स्कंद षष्ठी का व्रत विशेष फलदायी रहता है।ज्योतिषाचार्य पंडित दीपक दीक्षित बताते हैं कि हालांकि शत्रुओं पर विजय प्राप्ति के लिए इस दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा का बहुत महत्व बताया गया है पर संतान सुख के लिए भी इस तिथि की अहमियत है. संतान के कष्टों को कम करने और उसके सुख के लिए इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा श्रेष्ठ फलदायी मानी जाती है। खास बात तो यह है कि भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा बेहद साधारण रूप में भी की जा सकती है. उनकी पूजा में विशेष तौर पर बिल्व पत्र अर्पित करने का ही विधान है. स्कंद-षष्ठी पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर उनसे अपनी संतान के कष्ट कम करने की प्रार्थना करें.

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