फायदे का सौदा है मशरूम की खेती

मशरूम के लिए लंबे-चौड़ै रकबे की आवश्यकता नहीं होती इसकी शुरुआत छोटे प्लांट से भी की जा सकती है

जयपुर।
मशरूम के लिए लंबे-चौड़ै रकबे की आवश्यकता नहीं होती इसकी शुरुआत छोटे प्लांट से भी की जा सकती है । यही वजह है कि मशरूम की खेती आजकल युवा बेरोजगारों में खासी लोकप्रिय हो चुकी है। अपने किचन की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए घर की छत के कोने पर भी खेती की जा सकती है। विशेषज्ञों की माने तो घर की बड़ी छत पर भी मशरूम उगाई जा सकती है।
करीब पांच साल से किसानों में मशरूम की खेती तेजी से लोकप्रिय हुई है। किसानों की कड़ी मेहनत तथा अच्छे भाव मिलने के कारण मशरूम की खेती फायदे का सौदा साबित होने लगी।
इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसान सीमित संसाधन में मशरूम की खेती कर बढिय़ा मुनाफा कमा रहे हैं। कम जगह में अधिक से अधिक फायदा देने वाली यह खेती किसानों के आय का नया जरिया बन रही है। आचार फैक्टरी, सूप के पाउडर, होटलों व विवाह समारोह में सब्जी आदि में इस्तेमाल होने वाली सफेद बटन मशरूम का उत्पादन लगातार बढ़ा है।
मशरूम की खेती करने वाले सुरेन्द्र कुमार बताते है, 'मशरूम की खेती काफी हद तक मौसम पर निर्भर करती है। अधिक ठंड में इसका उत्पादन ठहर जाता है। अगर हल्की ठंड का मौसम लंबा चला तो उत्पादन और अधिक समय तक मिलता रहेगा।"
मशरूम की खेती के फायदे के बारे में सुरेन्द्र बताते हैं कि सीजन के शुरू में मशरूम का भाव 110 से 130 रुपए किलो होता है। वे अपने अनुभव के आधार पर बताते हैं कि मौसम में एकाएक बदलाव और जरा सी लापरवाही होने पर मशरूम की खेती में नुकसान होने में देर नहीं लगती।

मशरूम उगाने के लिए पहले लकड़ी के बांस की पट्टियों को रस्सियों की मदद से बांधकर ढांचा खड़ा किया जाता है। ढांचे में बांस की पट्टियों के ऊपर-नीचे चार खाने तैयार किए जाते हैं। ढांचे के चारों ओर धान की पराली से शेड खड़ा किया जाता है। बांस के ढांचे में पॉलीथीन की शीट बिछाई जाती है। शीट में भूसे से तैयार मेटेरियल में कंपोस्ट मिलाकर बीज डाला जाता है। करीब डेढ़ माह बाद मशरूम उगना शुरू हो जाता है।
व्यापारिक दृष्टि से पैंतीस गुणा साठ फीट साइज का शेड आदर्श माना गया है। इसमें करीब 45 हजार का खर्च आता है। मौसम सही रहने पर इस शेड में 12-12 कुंतल तक मशरूम उग आती है। भाव सही मिलने पर करीब 20-22 हजार तक का मुनाफा मिल जाता है।

Suresh Yadav Desk
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