गहलोत सरकार ने भंग कर दीं BJP बोर्ड की कमेटियां, तो गरमा गया सियासी पारा- जानें भाजपा का 'हल्ला-बोल'

जयपुर नगर निगम ग्रेटर की समितियां भंग करने का मामला, स्वायत्त शासन विभाग के आदेश पकड़ रहा राजनीतिक तूल, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पूनिया ने सरकार पर साधा निशाना, कहा, ‘राजनीतिक द्वेषता से लिया गया है फैसला’, ‘नगर निगम चुनाव में हार की हताशा निकाल रही सरकार’

 

By: nakul

Published: 26 Feb 2021, 01:24 PM IST

जयपुर।

राज्य सरकार द्वारा जयपुर नगर निगम ग्रेटर की 27 समितियों को भंग करने के आदेश का मामला राजनीतिक तूल पकड़ता दिख रहा है। सरकार के इस आदेश को ओछी राजनीति से प्रेरित बताते हुए भाजपा ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी नेता सरकार के इस आदेश को दुर्भाग्यपूर्ण करार दे रहे हैं।

 

‘विद्वेष की राजनीति का निम्नतम उदाहरण’
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया ने आज दिए एक बयान में कहा कि जयपुर ग्रेटर निगम द्वारा बोर्ड में गठित समितियों को राज्य सरकार द्वारा निरस्त करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सरकार के इस फैसले को विद्वेष की राजनीति का निम्नतम उदाहरण करार दिया है।

 

‘सरकार का फैसला हार की हताशा’
पूनिया ने कहा कि निगम चुनाव के दौरान कांग्रेस सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग और परिसीमन में धांधलियां करने के बावजूद हार गई, जिससे हताश होकर अब इस तरह के फैसले लिए जा रहे हैं।

 

'तानाशाही की पराकाष्ठा'

इधर उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि सत्ता का दुरुपयोग करके जयपुर ग्रेटर नगर निगम द्वारा गठित संचालन समितियों को निरस्त करना गहलोत सरकार की तानाशाही की पराकाष्ठा है। शहर के विकास के लिए बनी समितियों के निरस्तीकरण होने से विकास कार्य अवरूद्ध होंगे। सरकार का यह फैसला अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है।

 

ये है मामला
राज्य सरकार ने जयपुर नगर निगम ग्रेटर की 28 जनवरी की साधारण सभा में गठित की गई 28 संचालन समितियों में कार्यकारी समिति को छोड़ अन्य सभी समितियों के गठन को निरस्त कर दिया है। सरकार के स्वायत्त शासन विभाग ने इन समितियों के गठन को नगरपालिका अधिनियम की विभिन्न धाराओं के विपरीत मानते हुए कल आदेश जारी किये हैं।

 

नियमों की पालना नहीं हुई: सरकार
विभाग की ओर से जारी आदेश में बताया गया है कि सभी समितियों में 3-3 ऐसे लोगों को स्थाई सदस्य बनाए गए हैं, जो नगर निगम के सदस्य ही नहीं हैं। इनके चयन में निर्धारित नियमों की पालना नहीं की हुई है। साथ ही 7 अतिरिक्त समितियों के गठन के लिए सरकार से पूर्व स्वीकृति नहीं ली गई है।

 

कार्यकारिणी समिति यथावत रहेगी
स्वायत्त शासन विभाग ने कार्यकारिणी समिति के गठन को नियमानुसार मानते हुए स्वीकृति दी है। विभाग ने आदेश में लिखा है कि कार्यकारिणी समिति सहित कुल 21 समितियां ही गठित की जा सकती थी, लेकिन निगम के बोर्ड ने 7 अतिरिक्त समितियों का गठन किया, इसलिए इन 27 समितियों के गठन का प्रस्ताव खारिज किया गया है।

 

गौरतलब है कि निगम की बोर्ड बैठक में 28 समितियों के प्रस्ताव को पारित कर राज्य सरकार के पास स्वीकृति के लिए भेजा गया था। जिस पर सरकार ने प्रस्ताव को एक्ट के विपरित मानते हुए समितियों के गठन के प्रस्ताव को निरस्त कर दिया है।

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