नाहरगढ़ बायलॉजिकल पार्क में बढ़ी मुश्किलें: लकवाग्रस्त होने से रेंगकर चलने को मजबूर शेर 'तेजस'

प्रदेश की एकमात्र लॉयन सफारी पर संकट: लकवाग्रस्त होने से रेंगकर चलने को मजबूर हुआ शेर, बरेली भेजे सैम्पल, मेडिकल बोर्ड भी गठित

By: Deepshikha Vashista

Updated: 03 Dec 2019, 03:09 PM IST

देवेंद्र सिंह राठौड़ / जयपुर. नाहरगढ़ जैविक उद्यान से एक बार फिर बुरी खबर आई है। यहां इन दिनों हालात ठीक नहीं है। अब शेर तेजस के पैरों में लकवा हो गया है। जिससे वह रेंग-रेंंग कर चलने को मजबूर है। वहीं दूसरी ओर शेर त्रिपुर के पैर के घाव अभी ठीक नहीं हुए है।

नाहरगढ़़ जैविक उद्यान में करीब तीन महीने से स्थिति बेकाबू है। केनाइन डिस्टेंपर की मार के बाद एक बार फिर शेरों की जान पर आफत आ गई है। पिछले सोमवार और मंगलवार को शाम को तेजस जंगल में बने एन्कलोजर में नहीं आया और रात भर जंगल में घूमता रहा। बुधवार को शाम को वहां तैनात वनकर्मियों ने उसे ढूंढा, तो वह झाडिय़ों में घायल अवस्था में मिला। उसे चलने में दिक्कत हो रही थी, रेंग-रेंगकर चल रहा था।

ऐसी स्थिति में ट्रेंकुलाइज करके उसे एन्कलोजर में लाया गया। जहां वन्यजीव चिकित्सकों जांच में पाया कि उसके पिछले दोनों पांव लकवाग्रस्त हो गए है। इससे वह रेंग-रेंगकर चलने को मजबूर है। संभवना जताई जा रही है कि वह उंचाई से गिरा या फिर चोटिल हुआ है। जिससे उसकी रीढ़ की हड्डी मेें भी चोट लगी और उसे लकवा हो गया।

नहीं थम रहा मौत का सिलसिला-

इससे पहले भी तेजस एन्कलोजर में आने से कतरा रहा था। वहीं दूसरी ओर डेढ़ महीने बाद भी यहां रह रहे अन्य शेर त्रिपुर के हालत में सुधार नहीं हो पाया है। डेढ़ माह पूर्व उसे किडनी में इन्फेक्शन हो गया था। इस दौरान उसके पांव में भी घाव हो गए थे। इसमें एक अंगूठे का ऑपरेशन भी हुआ था। इस वजह से उसे सफारी में नहीं भेजा जा रहा था।

अब केवल शेरनी तारा को ही सफारी में भेजा जा रहा है। सितंबर माह में केनाइन डिस्टेंपर के प्रकोप में जूनागढ़ से लाई गई शेरनी सूजैन की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। वहीं सफेद बाघिन और बाघिन रम्भा की एक मादा शावक की भी संदिग्ध हालत में मौत हो गई थी। रिपोर्ट में संक्रमण होना सामने आया था।

मां तेजिका भी मौत कारण भी लकवा

शेर तेजस की मां शेरनी तेजिका की मौत भी लकवे से हुई थी। ऐसे में तेजस को लेकर चिंता बढ़ गई है। सूत्रों की मुताबिक शेर तेजस की जान अभी खतरे में है। वनाधिकारियों ने रक्त आदि के नमूने जांच के लिए बरेली भेजे है। साथ ही वहां से एक्सपर्ट की निगरानी में उपचार किया जा रहा है। इसके अलावा एक मेडिकल बोर्ड भी गठित किया है। संभवत: बरेली से टीम भी आ सकती है।

दो महीने से पिंजरे में कैद कैलाश

इधर जोधपुर से लाए गए शेर कैलाश को अभी जंगल नसीब नहीं हुआ है। दो महीेने से पिंजरे में बंद है। यहां लाने के दौरान पहली बार पिंजरे में बंद होने पर वह बुरी तरह से घायल हो गया था। काफी समय बाद उसके घाव भरे। अब उसे पिंजरे में बंद कर रखा है। जिससे दिनभर वह गुर्राते रहता है।

डेढ़ साल में हमने इनको खो दिया

-शेरनी तेजिका

-बाघिन रंभा ने दो मृत शावक जन्मे।

-एक भालू की मौत।

-बाघिन रभा का एक शावक पिंजरे में मृत पाया गया।

- आधा दर्जन से अधिक भेडि़ए की मौत हुई।

-शेरनी सुजैन की मौत।

- मादा शावक रिद्धि की मौत।

-सफेद बाघिन सीता की मौत।

Deepshikha Vashista
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned