नारकोटिक्स विभाग का काला कारनामा, जिस नशे को नष्ट करना था उसे तस्करों को बेचा, दो गिरफ्तार

नारकोटिक्स विभाग ने नष्ट करने की बजाय तस्करी के लिए किसान को सौंपा डोडा चूरा, पुलिस मुख्यालय ने पकड़ा, 210 किलो डोडा चूरा बरामद, डोडा चूरा नष्ट नहीं करवाने के मामले को दबाने के लिए बेगू विधायक को दिया गया था 35 लाख रुपए का ऑफर

मुकेश शर्मा / जयपुर। पुलिस मुख्यालय की सीआइडी क्राइम ब्रांच ने एक बार फिर नारकोटिक्स विभाग की पोल खोली है। इस बार नारकोटिक्स विभाग ने जिस डोडा चूरा को कागजों में नष्ट करना बताया था, वह डोडा चूरा पट्टेदार किसान के परिवार से ही बरामद किया गया है। क्राइम ब्रांच के एडीजी बीएल सोनी ने बताया कि चित्तौडगढ़़ में अफीम डोडा चूरा की तस्करी की पुख्ता सूचना पर उप अधीक्षक सूर्यवीर सिंह राठौड़ के नेतृत्व में टीम वहां पहुंची। टीम ने तस्करों के संबंध में सूचना एकत्र की और फिर थाना निकुम्भ के सहयोग से दो लोगों को पकड़ा। पकड़े गए आरोपियों से 210 किलो डोडा चूरा बरामद किया गया।

आरोपियों के परिवार की महिला के नाम से ही अफीम की खेती का पट्टे जारी हैं। एडीजी सोनी ने बताया कि अफीम की खेती करवाने का जिम्मा नारकोटिक्स विभाग का है। अफीम का दूध निकालने के बाद नारकोटिक्स अधिकारियों की मौजूदगी में डोडा चूरा को नष्ट करवाया जाता है। लेकिन गिरफ्तार आरोपियों ने नारकोटिक्स विभाग के क्षेत्रीय अधिकारियों से मिलभगत कर डोडा चूरा को कागजों में ही नष्ट करवा दिया। जबकि हकीकत में डोडा चूरा को नष्ट ही नहीं किया गया था।


इनको किया गिरफ्तार

- चित्तौडगढ के भाणुजा निवासी प्रकाश जणवा और रामनारायण जणवा को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के मकान और बाड़े की तलाशी में 210 किलो डोडा चूरा व पीसा हुआ डोडा चूरा बरामद किया गया


विधायक को कुल 50 लाख देना तय

एसीबी ने दो माह पहले ही चित्तौडगढ़़ के बेगू विधायक राजेन्द्र सिंह विधुड़ी ( MLA Rajendra Singh Bidhuri ) को 50 लाख रुपए की घूस का ऑफर करने वाले बेगू एसएचओ को गिरफ्तार किया था। एसीबी ने विधायक विधुड़ी को घूस की रकम में पहली किस्त करीब 11 लाख रुपए हवाला के जरिए देने आए हवाला कारोबारी से बरामद कर उसे भी गिरफ्तार किया गया था। विधायक को 35 लाख रुपए अफीम की खेती के बाद डोडा चूरा को नष्ट करने के मामले को दबाने के लिए ऑफर किए गए थे। जबकि 15 लाख रुपए पुलिस ने डोडा चूरा और अफीम के पकड़े गए ट्रकों को बिना कार्रवाई छोड़ दिया था। इस मामले को भी उजागर नहीं करने पर घूस का ऑफर किया गया था। मामले में नारकोटिक्स सहित कई विभागों के अधिकारियों के नाम भी सामने आए थे। लेकिन एसीबी की कार्रवाई एसएचओ तक ही सीमित रही।

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