नियमों के पेंच में फंसा राष्ट्रीय चंबल घडि़याल अभयारण्य

नियमों के पेंच में फंसा राष्ट्रीय चंबल घडि़याल अभयारण्य
नियमों के पेंच में फंसा राष्ट्रीय चंबल घडि़याल अभयारण्य

Rakhi Hajela | Updated: 06 Oct 2019, 03:06:44 PM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

नियमों के पेंच में फंसा राष्ट्रीय चंबल घडि़याल अभयारण्य
जलीय जीवों के संरक्षण की कवायद
अभयारण्य को घोषित करना था ईको सेंसेटिव जोन
राजस्थान में बाघ परियोजना के कारण अटका मामला

सवाईमाधोपुर ( Sawai madhopur ) जिले के चंबल घडिय़ाल अभयारण्य (National Chambal Gharial Sanctuary) का ईको सेंसेटिव जोन (Eco Sensitive Zone) नियमों के पेंच में फंसता नजर आ रहा है। वजह बनी है रणथंभौर ( Ranthambhore ) में बाघ परियोजना ( Tiger Project )। वन विभाग ( Forest depatrment ) की ओर से राजस्थान (Rajasthan), मध्यप्रदेश (MP) और उत्तरप्रदेश ( UP )में राष्ट्रीय चंबल घडिय़ाल अभयारण्य में घडि़याल और अन्य जलीय जीवों के संरक्षण के लिए ईको सेंसेटिव जोन घोषित करने की कवायद की जा रही थी। सरकार की ओर से तीनों राज्यों में एक सी सीमा का ईको सेंसेटिव जोन घोषित करने के निर्देश जारी किए गए हैं, लेकिन राजस्थान के रणथम्भौर में बाघ परियोजना होने के कारण मामला अटक गया है। आपको बता दें कि मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश में विभाग की ओर से चंबल अभयारण्य की सीमा से दो किलोमीटर के क्षेत्र को ईको सेंसेटिव जोन घोषित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया था, लेकिन राजस्थान के सवाईमाधोपुर के चंबल घडिय़ाल अभयारण्य की सीमा के एक किलोमीटर के बाद ही रणथम्भौर टाइगर रिजर्व की सीमा शुरू हो जाती है। ऐसे में यहां दो किलोमीटर का ईको सेंसेटिव जोन घोषित नहीं किया जा सकता है। गौरतलब है कि गत दिनों दिल्ली में इस मामले को लेकर तीनों राज्यों के वन अधिकारियों की बैठक हुई थी और जलीय जीवों के सरंक्षण के लिए ईको सेंसेटिव जोन घोषित करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी लेकिन अब इसमें पेंच फंस गया है। आपको यह भी बता दें कि ईको सेंसेटिव जोन में किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि और निर्माण पर पूरी तरह से प्रतिबंध होता है, जिससे जलीय जीवों को कोई परेशानी ना हो एेसे में रणथंभौर बाघ परियोजना की सीमा में भी किसी तरह का बदलाव नहीं किया जा सकता। इस संबंध में एसीएफ चंबल अभयारण्य सवाई माधोपुर संजीव शर्मा का कहना है कि इस संबंध में गत दिनों दिल्ली में तीनों राज्यों के अधिकारियों की बैठक हुई थी। एमपी और यूपी में दो किमी का ईको सेंसेटिव जोन बनाने का प्रस्ताव था। सवाईमाधोपुर में रणथम्भौर टाइगर रिजर्व के कारण यह संभव नहीं है। ऐसे में अभी इस पर फैसला नहीं हो सका है।


चंबल घडि़याल अभयारण्य पर एक नजर
1978 में हुई थी राष्ट्रीय चंबल घडि़याल अभयारण्य की स्थापना
5400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है अभयारण्य
400 किलोमीटर लंबी चंबल नदी है कोर एरिया में
03 राज्यों में फैला है अभयारण्य


घडि़यालों के कुनबे का गणित
2017 में 550 घडि़याल थे अभयारण्य में
2018 में इनकी संख्या हुई 600
वर्तमान में अभयारण्य में हैं 580 घडि़याल

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