राजस्थान: ... तो क्या गहलोत सरकार में 70 हज़ार का मोबाइल, तीन मंज़िला बंगले वाले मार रहे 'वंचितों' का हक़?

- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना पर गरमाई हुई है सियासत, भाजपा ने उठाया राज्य में योजना की गड़बड़ियों का मामला, अपात्र लोगों के भी योजना का लाभ उठाने के लगाए आरोप, भाजपा नेता बोले- 'प्रधानमंत्री को खत लिखने से पहले खुद का घर संभालें गहलोत'

By: Nakul Devarshi

Published: 29 Jul 2021, 02:54 PM IST

जयपुर।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना को लेकर प्रदेश की सियासत गरमाई हुई है। सप्ताह भर पहले जहां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस योजना के लाभार्थियों की सीमा को वर्त्तमान जनसंख्या के आधार पर संशोधित करने की अपील की थी, तो वहीं अब भाजपा ने इस योजना की राज्य में स्थिति को लेकर सवाल खड़े किये हैं। भाजपा का आरोप है कि राज्य में खाद्य सुरक्षा योजना के नाम पर बड़े स्तर पर धांधली हो रही है। आरोप है कि सरकार की अनदेखी और ढुलमुल कार्यशैली के चलते बड़ी संख्या में अपात्र लोग भी इस योजना का लाभ उठा रहे हैं, जबकि पात्रता रखने वाले वंचित हो रहे हैं।

 

 

लाखों अपात्र लोगों को खाद्य सुरक्षा!
प्रदेश भाजपा के महामंत्री व विधायक मदन दिलावर ने राजस्थान राज्य में खाद्य सुरक्षा योजना के तहत बड़े पैमाने पर अपात्र लोगों को भी लाभ मिलने के आरोप लगाए हैं। दिलावर का कहना है कि प्रदेश में खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ उठाने वालों में ऐसे कई लोग हैं जो 70 हज़ार रूपए के मोबाईल साथ रखते हैं, जिनके तीन मंज़िला मकान हैं या जो तीन-तीन कारें रखते हैं।

वरिष्ठ भाजपा नेता दिलावर ने गहलोत सरकार से केंद्र सरकार से योजना की समीक्षा और संशोधन की अपील करने से पहले प्रदेश में योजना के क्रियान्वयन की जांच करवाने की मांग की है। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने यदि योजना के लाभार्थियों के सम्बन्ध में जांच करवाई तो बड़े पैमाने पर अपात्र लोगों के आंकड़े सामने आएंगे। दिलावर ने खाद्य सुरक्षा में सरकारी अधिकारियों और कार्मिकों के अपात्र होते हुए भी 'सुरक्षित' दायरे में होने के आरोप लगाए हैं।

 

गहलोत कर चुके हैं 'संशोधन' की अपील
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पिछले सप्ताह ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के लाभार्थियों की सीमा को वर्तमान जनसंख्या के आधार पर बढ़ाने की अपील की है। पत्र में मुख्यमंत्री ने कहा है कि बीते 10 वर्षों में देश के सभी राज्यों की जनसंख्या बढ़ी है और कई परिवार खाद्य सुरक्षा की पात्रता के दायरे में आ गए हैं। ऐसे में जरूरतमंद परिवारों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वर्ष 2021 की अनुमानित जनसंख्या के अनुसार खाद्य सुरक्षा की सीलिंग का पुनर्निर्धारण किया जाना जरूरी है।

 

ज़रूरतमंदों तक पहुंचाएं तात्कालिक लाभ
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पिछले दिनों खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की एक समीक्षा बैठक के दौरान पात्र लोगों को खाद्य सुरक्षा का लाभ देने के अधिकारियों को निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री ने ऐसे प्रकरणों की समीक्षा करने के भी निर्देश दिए थे जिनमें कई माह से लाभार्थी राशन का गेंहू नहीं उठा रहे थे। उन्होंने अधिकारियों से कहा था कि वर्तमान विषम आर्थिक परिस्थितियों में उनके स्थान पर अन्य जरूरतमंद लोगों को तात्कालिक लाभ दिया जाए ताकि पात्र लोगों को सस्ता अनाज उपलब्ध कराया जा सके।

 

राज्य में खाद्य सुरक्षा- फैक्ट फ़ाइल-

- 4 करोड़ 46 लाख व्यक्तियों की सीमा (सीलिंग) निर्धारित है (वर्ष 2011 जनगणना आधार)
- लाभार्थियों को प्रति माह 2 लाख 30 हजार 882 मीट्रिक टन खाद्यान्न का हो रहा आवंटन
- बीते 10 वर्षों में बड़ी संख्या में परिवार खाद्य सुरक्षा योजना के पात्र हुए
- कोविड-19 के दौरान आजीविका पर विपरीत असर से कई लोग भी दायरे में आने की संभावना
- वर्ष 2021 में प्रदेश की जनसंख्या 8 करोड़ अनुमानित, लगभग 74 लाख अतिरिक्त व्यक्ति लाभार्थी की श्रेणी में संभावित

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