घर—घर पूजा—अर्चना और प्रार्थना

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर बुधवार को नवसंवत्सर 2077 (Nav Samvatsar 2077) और चैत्र नवरात्र (Navratri 2020) शुरू हुए, वहीं चेटीचंड महोत्सव के साथ गुडी पडवा का त्योहार मनाया गया। कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए के लोगों ने घर—घर परिजनों के साथ त्योहार मनाए। लोगों को पूजा—अर्चना के दौरान कोरोना वायरस से मुक्ति दिलाने की भगवान से प्रार्थना की।

घर—घर पूजा—अर्चना और प्रार्थना
— परिवार के साथ घर पर मना रहे त्योहार
— घर—घर नवरात्र पर घट स्थापना, पूजा—अर्चना
जयपुर। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर बुधवार को नवसंवत्सर 2077 (Nav Samvatsar 2077) और चैत्र नवरात्र (Navratri 2020) शुरू हुए, वहीं चेटीचंड महोत्सव के साथ गुडी पडवा का त्योहार मनाया गया। कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए के लोगों ने घर—घर परिजनों के साथ त्योहार मनाए। लोगों को पूजा—अर्चना के दौरान कोरोना वायरस से मुक्ति दिलाने की भगवान से प्रार्थना की।

नवरात्र पर लोगों ने घर—घर घट स्थापना की गई, परिजनों के साथ पूजा—अर्चना की। मंदिरों में घट स्थापना तो हुई, पर इस बार मंदिर दर्शनार्थियों के लिए बंद रहे। नवसंवत्सर पर सामूहिक आयोजन नहीं हुए, ठाकुरजी को नए साल का पंचांग सुनाया गया। चेटीचंड महोत्सव के बडे आयोजन नहीं हुए, सिंधी समुदान ने भी घर—घर झूलेलालजी का अभिषेक व पूजा—अर्चना की। वहीं महाराष्ट्र समाज के लोगों ने घरों में ही गुड़ी पड़वा पर्व मनाया।
आमेर स्थित शिलामाता मंदिर में घट स्थापना की गई। दर्शनार्थियों के लिए मंदिर के पट बंद रहे। पहली बार मंदिर में मेला नहीं भरा। पुजारी बनवारी लाल ने मंदिर में सुबह घट स्थापना की। मनसा माता मंदिर, दुर्गापुरा के दुर्गा माता मंदिर, पुरानी बस्ती के रुद्र घंटेश्वरी सहित अन्य दुर्गा मंदिरों में घट स्थापना की गई। लॉकडाउन होने से लोगों ने घर—घर घट स्थापना कर परिजनों के साथ पूजा—अर्चना की। मिटृी के कलश की जगह तांबे, पीतल के कलश की स्थापना की गई। शहर के कई घरों में लोगों ने नवरात्र स्थापना की, पूजा—पाठ की और व्रत रखा।


चैत्र प्रतिपदा पर नवसंवत्सर 2077 भी शुरू हुआ, लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण को देखते हुए इस बार बडे आयोजन नहीं हुए। गजपूजन, रंगोली जैसे आयोजन नहीं हुए। इस बार अश्व भी नहीं छोडे गए। ठाकुरजी को संत—महंतों ने पंचांग सुनाया और नए साल की पूजा—अर्चना की। गोविंददेवजी मंदिर में महंत अजंन कुमार गोस्वामी के सान्निध्य में मानस गोस्वामी ने पंचांग पूजा करवाई और ठाकुरजी को पंचांग भेंट किया गया। चांदपोल बाजार स्थित प्राचीन रामचन्द्रजी मंदिर में ठाकुरजी को नए साल का पंचांग सुनाया गया। 21 साल में पहली बार मंदिर में 9 दिवसीय श्रीराम जन्मोत्सव नहीं हुआ। पानों का दरीबा स्थित सरस निकुंज में ठाकुरजी को नए साल का पंचांग सुनाया गया।

सिंधी समाज की ओर से शहर में चेटीचंड महोत्सव मनाया गया। इस बार मंदिरों में आयोजन नहीं होकर लोगों ने घर—घर भगवान झूलेलाल की पूजा—अर्चना की। झूलेलाल का पंचामृत अभिषेक कर नवीन वस्त्र धारण कराए गए। लाल रंग की धर्मध्वजा फहराई गई। कलश पूजन कर दीप प्रज्जवलित किए गए। ढोल, मजीरे और शंख बजाए गए। भगवान को सुखो सेसा तहरी और कोहिरु (मीठे चावल और छोले) का भोग लगाया गया। लाल सांई को पंजिड़े गाकर रिझाया गया।

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को महाराष्ट्र समाज के लोगों ने गुड़ी पड़वा पर्व के रूप में मनाया। लोगों ने कोरोना से मुक्ति की प्रार्थना की। साथ ही सबके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की गई। श्रद्धालुओं ने घर—घर गुड़ी बांध कर उसकी पूजा की। पंचांग की पूजा भी की गई। इस अवसर पर विभिन्न प्रकार के पकवान बनाकर उसका भोग लगाया गया।

Girraj Sharma Desk
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