500 साल में पहली बार शारदीय नवरात्र पर शिला माता के साक्षात दर्शन नहीं कर सकेंगे भक्त

शक्ति स्वरूपा देवी की आराधना का पर्व शारदीय नवरात्र द्वितीय आश्विन शुक्ल प्रतिपदा शनिवार से शुरू होगा।

By: santosh

Published: 16 Oct 2020, 03:52 PM IST

जयपुर। शक्ति स्वरूपा देवी की आराधना का पर्व शारदीय नवरात्र द्वितीय आश्विन शुक्ल प्रतिपदा शनिवार से शुरू होगा। पहली बार 500 साल में आमेर स्थित शिला माता मंदिर का दरबार आम दर्शनार्थियों की आवाजाही मंदिर में वर्जित रहेगी। शुक्रवार को प्राचीन मंदिरों में विशेष अनुष्ठान करने से पूर्व साफ सफाई सहित अन्य तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

राजधानी में पर्व की रौनक देखते ही बन रही है। बाजारों में माता के श्रृंगार के लिए दुकानें सज चुकी है। इस बीच देवी की घर—घट घटस्थापना होगी। इस बार माता का आगमन अश्व यानि घोड़े पर होगा। इससे आगामी समय में देश की साख बढ़ेगी। साथ ही सीमा पर सकारात्मक परिणाम देश को मिलेंगे। वहीं विदाई भैंसे पर होगी।

मंदिरों का है विशेष महत्व
राजधानी में विभिन्न जगहों पर दुर्गा माता के मंदिर अपनी विशेष पहचान व महत्व रखते हैं। आमेर में शिला देवी, दुर्गापुरा में दुर्गा माता, झालाना वनक्षेत्र स्थित कालक्या माता विराजमान है। शिलामाता मंदिर को ट्रस्ट और पूर्व राजपरिवार के सदस्यों ने मंदिर को 31 अक्टूबर तक मंदिर बंद करने का निर्णय लिया है। पुजारी बनवारी शर्मा ने बताया कि सभी अनुष्ठान मंदिर पुजारी के सान्निध्य में होंगे। आमश्रद्धालुओं का प्रवेश मंदिर में निषेध रहेगा।

इसलिए है खास शिला माता का मंदिर
शिला माता मंदिर का निर्माण राजा मानसिंह (प्रथम) ने 16वीं शताब्दी में करवाया था। यहां स्थापित माता की प्रतिमा पूर्वी बंगाल के जैसोर से लाई गई थी। चमकीले काले पत्थर से निर्मित इस अष्टभुजा प्रतिमा के ऊपरी भाग में मस्तक के ऊपर बाएं से दाएं क्रमश: गणेश, ब्रह्मा, शिव, विष्णु और सरस्वती की छोटे आकार की मूर्तियां उत्कीर्ण हैं। मंदिर का मुख्यद्वार चांदी का बना है। जिस पर नवदुर्गा, शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की आकृतियां हैं। यहां दस महाविद्याओ के रूप में काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, छिन्नमाता, त्रिपुरभैरवी, धूमावती, बगलामुखी, श्रीमातंगी और कमला देवी को भी चित्रित किया गया है। पुजारी बनवारी लाल शर्मा के मुताबिक नवरात्र पर विशेष आयोजन होते हैं। इस बार यह मेला नहीं भरेगा। आम दर्शनार्थियों का प्रवेश निषेध रहेगा।

यह रहेगा घटस्थापना का मुहूर्त
पं.दामोदर प्रसाद शर्मा ने बताया कि घटस्थापना का सुबह 6.31 बजे से सुबह 8.47 बजे सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा। वहीं अभिजित मुहूर्त सुबह 11.49 से दोपहर 12.35 बजे तक रहेगा। 25 अक्टूबर को विजयादशमी यानि दशहरा पर्व मनाया जाएगा। आमेर स्थित शिला माता मंदिर में घटस्थापना सुबह 7.05 बजे होगी। 22 को छठ का मेला नहीं भरेगा। 23 को निशा पूजन रात 10 बजे होगी। 24 को शाम 4.30 बजे पूर्णाहुति होगी। 26 को सुबह 10.30 बजे नवरात्रा उत्थापना होगी। इस बीच पूरे नौ दिनों में सर्वार्थसिद्धि, अमृतसिद्धि सहित अन्य योगों में वाहनों, आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के शोरूम आदि पर एक से बढ़कर एक आफर्स की भरमार देखने को मिलेगी। हालांकि कोरोना के मद्देनजर आमजन ई शोपिंग को भी तवज्जो देंगे।

इनमें हुआ इजाफा
नवरात्र में फलाहारी और पूजा के लिए केला, सेब, अनार के दामों में 30 से 35 फीसदी का इजाफा देखने को मिल रहा है। सेब के दाम 60 से 90, अनार के दाम 50 से 80 और केले के दाम 30 से 45 रुपए तक देखने को मिल रहे हैं। वहीं गुलाब की माला 60 तो हजारे की माला के दाम 35 रुपए तक पहुंच गए हैं।

यहां कर सकेेंगे भक्त दर्शन
दुर्गापुरा स्थित दुर्गामाता मंदिर में 20 फीट दूरी से माता के दर्शन करेंगे। महंत महेन्द्र भट्टाचार्य ने बताया कि घटस्थापना सुबह 7 बजे होगी। सुबह 6 से 12 शाम 4 से 8 दर्शन कर सकेंगे। प्रसाद माला नहीं चढ़ा सकेंगे। अपेक्स सर्किल वन क्षेत्र स्थित कालक्या माता मंदिर सुबह सात से शाम छह बजे तक खुलेगा। पंचवटी सर्किल स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर में घटस्थापना दोपहर 12.51 बजे होगी। आम भक्त दर्शन सुबह 6.30 बजे से 11.30 बजे तक और शाम 5.30 बजे से रात 8.30 बजे तक कर सकेंगे। खोले के हनुमान मंदिर में घटस्थापना सुबह 11.15 बजे होगी।

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