संकट में राजस्थान का यह बांध, पानी पीना हो सकता है घातक

मुख्यमंत्री निवास से केवल 20 किलोमीटर दूर नेवटा बांध ( Nevta Dam Jaipur ) का पानी सड़ने लगा है। लापरवाही के कारण यहां लगातार सीवरेज और केमिकल युक्त पानी पहुंच रहा है। जिससे हालात बदतर हो गए हैं। प्रदूषण नियंत्रण मंडल की रिपोर्ट में यहां पानी में डिजॉल्वड (घुलित) ऑक्सीजन की मात्रा 0.21 मिलीग्राम प्रति लीटर से घटकर शून्य दर्ज की गई है। यानी इस पानी को पीना घातक हो सकता है...

By: dinesh

Updated: 24 May 2020, 02:15 PM IST

जयपुर। मुख्यमंत्री निवास से केवल 20 किलोमीटर दूर नेवटा बांध ( Nevta Dam Jaipur ) का पानी सड़ने लगा है। लापरवाही के कारण यहां लगातार सीवरेज और केमिकल युक्त पानी पहुंच रहा है। जिससे हालात बदतर हो गए हैं। इस मामले में प्रभावितों ने मुख्यमंत्री के नाम वकील के जरिए विधिक नोटिस भी भेजा। इसके बाद हड़कंप मच गया और जल संसाधन विभाग ने जिम्मेदारों का पता लगाने का काम शुरू किया है। इस बांध में सीवरेज का पता लगाने के लिए अब गूलर बांध के पानी की जांच होगी। प्रदूषण नियंत्रण मंडल की रिपोर्ट में यहां पानी में डिजॉल्वड (घुलित) ऑक्सीजन की मात्रा 0.21 मिलीग्राम प्रति लीटर से घटकर शून्य दर्ज की गई है। यानी इस पानी को पीना घातक हो सकता है।

लापरवाही के तीन स्रोत
1. तो एसटीपी व सीईटीपी फेल : रूट में एसटीपी बने हुए हैं। सांगानेर में कॉमन एफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट है जहां फैक्ट्रियों से निकलने वाला जहरीला पानी परिशोधित होना है। लेकिन ऐसा प्रभावी तरीके से नहीं हुआ। गूलर बांध में यहीं से पानी आ रहा है।

2. कोर्ट के आदेश तक पर : हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश है कि गूलर बांध के जरिए बारिश का पानी ही नेवटा बांध में पहुंचे। बारिश के बाद गंदा पानी आना शुरू हो जाता है।

3. भूल गए : मंडल ने फैक्टरी संचालकों के ।खिलाफ सख्त कार्रवाई की। डिस्कॉम के जरिए इनका बिजली कनेक्शन काटा गया, लेकिन कुछ समय बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया

खतरा पता, पर मौन
— नलकूप में गंदा पानी आ रहा
— सब्जियों, अनाज व अन्य उपज प्रभावित। खेती की जमीन खराब
— गंदे पानी में अवैध मछली पालन
— बांध के आसपास निवासियों का रहना मुश्किल

फैक्ट फाइल
— बांध की भराव क्षमता गेज 16 फीट पर 236.72 एमसीएफटी है।
— वर्तमान में गेज 6.6 पर 37 एमसीएफटी पानी है।
— बांध का कुल भराव क्षेत्र 443.583 हेक्टेयर है।

नेवटा बांध में गंदा पानी कहां से आ रहा है, पता लगा रहे हैं। सांगानेर में औद्योगिक प्रतिष्ठानों से आ रहे केमिकल के पानी पर प्रदूषण नियंत्रण मंडल को एक्शन लेना है।
— अंबुज त्यागी, अधीक्षण अभियंता, जल संसाधन विभाग

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