उद्योग, श्रम और रोजगार में संभावनाएं अपार

बड़े उद्योगों में राज्य के युवाओं को रोजगार देने के लिए कानून बनाने की हुई मांग



By: Ashwani Kumar

Published: 07 Mar 2020, 09:29 PM IST

जयपुर. विधानसभा में शनिवार को उद्योग, श्रम और रोजगार पर चर्चा हुई। सदस्यों ने तीनों ही विषयों पर अपनी बात रखी और सरकार को सुझाव दिए। अधिकतर सदस्यों का कहना था कि इन क्षेत्रों में राज्य में संभावनाएं अपार हैं। सिलकोसिल से होने वाली बीमारियों पर भी सदस्यों ने सरकार का ध्यान खींचा।
प्रताप सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से शुरू की गई मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया, डिजीटल इंडिया जैसी योजनाओं का उद्देश्य युवाओं को उद्योगपति बनाने की थी। उन्होंने सरकार से मांग की कि जो भी इंडस्ट्री लगे, उसमें हमारे राज्य के युवाओं को 70 फीसदी रोजगार मिले। 30 फीसदी नौकरियां बाहरी राज्यों के युवाओं को मिलें। पर्यावरण को लेकर उन्होंने कहा कि छोटे उद्योगों पर कार्रवाई कर दी जाती है और बड़ उद्योगों पर कोई कार्रवाई नहीं करता, जबकि कई जगह तो ट्रीटमेंट प्लॉन्ट ही खराब हैं।
वहीं शकुंतला रावत ने कहा कि देश के युवाओं को गुजरात मॉडल पेश कर रोजगार का सपना दिखाया गया था, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। युवा और किसाना ठगा हुआ महसूस कर रहा है। किसान दोगुनी आय होने का इंतजार कर रहा है।
अमीन खां ने कहा कि शिव विस क्षेत्र में उद्योग के बराबर हैं। पुराने समय में यहां दरियां और कम्बल बनते थे। गलत नीतियों की वजह से आज भेड़ के ऊन की कीमत 14 रुपए है। यह कभी 160 रुपए प्रति किलो हुआ करती थी। पचपदरा में रिफाइनरी तैयार होने में अभी दो साल लगेंगे। उम्मीद है कि इसके बाद युवाओं को रोजगार मिल सकेगा। बलजीत यादव ने कहा कि उद्योग लगाने के नाम पर किसानों को सरकार धोखे में रखे। जहां तक प्रदूषण की बात है तो मैं एक कम्पनी के बाहर धरने पर बैठा था, उसमें एक जज ने धरने खत्म करने के लिए कहा था। राजस्थान में ऐसा कानून बनाने की जरूरत है, जिससे उद्योगों में राज्य के युवाओं को ज्यादा नौकरियां मिल सकें।

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आज रुपया सबसे कमजोर
रफीक खान ने कहा कि नोटबंदी की सबसे बड़ी मार उद्योग और रोजगार पर पड़ी। उद्योगों पर ध्यान देने की जरूरत है। डॉलर की कीमत सर्वाधिक है। रुपए अब तक के निम्र स्तर पर है। 2013 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी कहते थे कि पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका की करेंसी नहीं गिरती। क्या कारण है कि भारत का रुपया दिनों दिन गिरता जा रहा हैं। आज की तारीख में रुपए की सबसे बुरी स्थिति है। अर्थव्यस्था को सुधारने के लिए केंद्र सरकार की ओर से कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। उन्होंने राजस्थान के परम्परागत उद्योगों को बचाने के लिए स्पेशल पैकेज की मांग की। साथ ही मार्बल उद्योग पर जीएसटी 18 फीसदी से भी कम करने के लिए केंद्र सरकार से बात करने को कहा।

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अपने उद्योगपतियों को नहीं बुला पा रहे
अशोक लाहोटी ने कहा कि राजस्थान के उद्योगपतियों का विश्वभर में नाम है। आज स्थिति यह हो गई है कि निवेश के लिए हम अपने ही लोगों को नहीं बुला पा रहे हैं। यह विभाग की कमजोरी है। सांगानेर का 300 साल पुराने कुर्ती उद्योग पर संकट के बादल हैं। इस पर सरकार ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने सरकार से सांगानेर में इंटरनेशनल हाट के लिए जमीन आवंटित करने की मांग की। वेयरहाउस को लेकर सरकार से नीति बनाने की मांग की।

Ashwani Kumar Reporting
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