डॉक्टर बनना पड़ेगा महंगा

डॉक्टर बनना पड़ेगा महंगा

Neeru Yadav | Publish: Aug, 08 2019 11:05:04 AM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

इन दिनों नेशनल मेडिकल कमीशन बिल (NMC Bill 2019)चर्चाओं में है.....देशभर में इसको लेकर बवाल मचा हुआ है। आज देशभर में डॉक्टर(Doctor) इसके खिलाफ हड़ताल पर हैं...डॉक्टर लॉबी पुरजोर तरीके से इसका विरोध कर रही है। हालांकि राज्यसभा (Rajyasabha)में इस बिल को मंजूरी मिल गई है...चिकित्सा संगठनों का कहना है कि इस बिल से चिकित्सा शिक्षा (Medical Education)मेडिकल कॉलेजों में महंगी हो जाएगी।

इन दिनों नेशनल मेडिकल कमीशन बिल (NMC Bill 2019)चर्चाओं में है.....देशभर में इसको लेकर बवाल मचा हुआ है। आज देशभर में डॉक्टर (Doctor)इसके खिलाफ हड़ताल पर हैं...डॉक्टर लॉबी पुरजोर तरीके से इसका विरोध कर रही है। हालांकि राज्यसभा (Rajyasabha)में इस बिल को मंजूरी मिल गई है...चिकित्सा संगठनों का कहना है कि इस बिल से चिकित्सा शिक्षा मेडिकल कॉलेजों में महंगी हो जाएगी। इस बिल में मौजूद सेक्शन -32 में साढ़े तीन लाख गैर चिकित्सा शिक्षा प्राप्त लोगों को एलोपैथी में इलाज करने का लाइसेंस मिल जाएगा। इसे मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ बताया जा रहा है। हम आपको बताते हैं कि आखिर क्या है एनएमसी बिल... अगर मेडिकल काउंसिल की जगह नेशनल मेडिकल कमीशन आता है तो क्या फायदे होंगे
मेडिकल एडवाइजरी काउंसिल बनेगी
एनएमसी बिल के तहत एक काउंसिल बनेगी जहां सभी प्रदेश मेडिकल एजुकेशन और ट्रेनिंग के बारे में अपनी समस्याएं और सुझाव दे सकेंगे। इसके बाद काउंसिल नेशनल मेडिकल कमीशन को मेडिकल एजुकेशन से जुड़े सजेशन देगी
मेडिकल कॉलेजों की फीस तय होगी
देश में अभी एमबीबीएस में 80 हजार सीटें है जिसमें 60 हजार सीटों की फीस सरकार तय करेगी। 80 हजार सीटों में आधी सीटें सरकारी मेडिकल कॉलेजों में है जिनकी फीस बेहद कम है। बाकी बची 40 हजार सीटों में बीस हजार सीटों का फीस निर्धारण सरकार करेगी। यही नहीं राज्य सरकारें चाहे तो निजी मेडिकल कॉलेजों के लिए छोड़ी गई पचास फीसदी सीटों पर फीस को नियंत्रित कर सकती है और इसके लिए मेडिकल कॉलेजों के साथ समझौता कर सकती है
ब्रिज कोर्स
इस बिल के सेक्शन - 49 के अनुसार एक ब्रिज कोर्स करते ही आयुर्वेद और होम्योपैथी के डॉक्टर एलोपैथी इलाज करने योग्य हो जाएंगे
एमबीबीएस के बाद होगी एक्जिट परीक्षा
एमबीबीएस पास करने बाद एक्जिट परीक्षा देनी पड़ेगी। इसके बाद डॉक्टरों को कोई परीक्षा नहीं देनी होगी। इसके अंकों के आधार पर पीजी में एंट्रेस मिल जाएगा। इस परीक्षा में पास होने के बाद प्रेक्टिस का अधिकार भी होगा। फेल होने पर अगले साल दोबारा परीक्षा दे सकते हैं। विदेश से पढ़कर आने वालों को भी एक्जिट परीक्षा देनी होगी

देशभर में डॉक्टरों का सबसे बड़ा संगठन इंडियन मेडिकल एसोसिएशन इस बिल का विरोध कर रहा है...उनका मानना है कि इस बिल के आने के बाद क्वेक्स बढ़ जाएंगे...मेडिकल एजुकेशन महंगी हो जाएगी...देश में हैल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर चरमरा जाएगा। अब आपको बताते हैं कि आखिर क्यों कर रहे हैं डॉक्टर इसका विरोध..क्या है इस बिल के नुकसान
चिकित्सा शिक्षा होगी महंगी
डॉक्टरों का कहना है कि इस बिल से मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा शिक्षा महंगी हो जाएगी। निजी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन 60 फीसदी सीटों को मनमर्जी के दाम से बेचने लगेंगे
बढ़ जाएंगे क्वेक्स
इस बिल के आने के बाद साढ़े तीन लाख गैर चिकित्सा शिक्षा प्राप्त लोगों को एलोपैथी में इलाज करने का लाइसेंस मिल जाएगा। इससे मरीजों को खतरा हो सकता है
पैरामेडिकल भी करने लगेगें प्रेक्टिस
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अऩुसार बिल में कम्यूनिटी हैल्थ प्रोवाइडर शब्द को सही से परिभाषित नहीं किया गया है। इससे नर्स, फार्मासिस्ट और पैरामेडिकल भी आधुनिक दवाओं के साथ प्रेक्टिस कर सकेंगे।

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned