अब आसान नहीं होगा पुलिस का कोर्ट में पेशी से बचना

अब आसान नहीं होगा पुलिस का कोर्ट में पेशी से बचना
Rajasthan Highcourt

Mukesh Sharma | Updated: 23 Aug 2019, 08:11:13 PM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

वीआइपी ड्यूटी (VIP Duty )या अन्य किसी बहाने के आधार पर कोर्ट (Court ) में हाजिरी(Prescence) से बचने का पुलिसकर्मियों(Police ) को चिरपरिचित बहाने अब नहीं चलेगें। हाईकोर्ट (Highcourt)ने बिना कोर्ट की पूर्व अनुमति के हाजिर नहीं होने वाले पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए अदालती दिशा—निर्देशेां(directions) की आवश्यकता जताई है।

जयपुर

कोर्ट ने मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) व पुलिस महानिदेशक से बिना पूर्व अनुमति कोर्ट में अनुपस्थित रहने वाले पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई करने को कहा है।
जस्टिस महेन्द्र माहेश्वरी ने भीम कुमार सैन की याचिका की सुनवाई के दौरान यह आदेश दिए हैं और सुनवाई 16 सितम्बर तक टालते हुए अलवर के तत्कालीन एसपी को हाजिर होने का निर्देश भी दिया है।

हाईकोर्ट ने राज्य के विभिन्न फौजदारी अदालतों में पुलिस अधिकारी व पुलिस कर्मचारियों के अनुपस्थिति से ट्रायल में देरी तथा बंदियों के अनावश्यक अभिरक्षा में रहने पर भी चिंता जाहिर की है। इस समस्या के समाधान के लिए हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह)व पुलिस महानिदेशक को दिशा निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने तीनों अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर पूरे पुलिस महकमे को सावचेत करने और दिशानिर्देशों की पालना में लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई कर संबंधित कोर्ट को सूचित करने के निर्देश दिए हैं।

यह हैं दिशा निर्देश
— तलब किए जाने पर पुलिस अधिकारी व पुलिस कर्मचारी कोर्ट में उपस्थित रहें
— बिना पूर्व स्वीकृति कानून व्यवस्था के नाम पर या अन्य औपचारिक सूचना के आधार पर अनुपस्थित रहने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए
इस तरह मिलेगी हाजिरी से छूट
कोर्ट ने कहा कि तय तारीख पर हाजिरी में असमर्थ होने पर पुलिस अधिकारी, कर्मचारी अथवा एक्सपर्ट संबंधित एसपी से, एसपी,एएसपी और डीएसपी स्तर के अधिकारी संबंधित रेंज आईजी से तथा रेंज आईजी व डीआईजी डीजीपी को प्रार्थना पत्र पेश करें।
इन प्रार्थना पत्रों पर संबंधित अधिकारी कोर्ट में उपस्थिति की आवश्यकता, अभियुक्त बंदी की जेल में रहने की अवधि, प्रकरण की ट्रायल में देरी के महत्वपूर्ण बिन्दुओं को ध्यान में रखकर गवाह, पुलिस अधिकारी, कर्मचारी व एक्सपर्ट की हाजिरी से छूट पर निर्णय करें और इस संबंध में संबंधित कोर्ट को अग्रिम सूचना दें।
अलवर एसपी से मांगी कार्ययोजना
कोर्ट ने मई 2015 में दो बच्चों की बलि के मामले में कार्रवाई नहीं होने के प्रकरण में अलवर पुलिस अधीक्षक पारिस देशमुख से सुनवाई की अगली तारीख 16 सितंबर तक अनुसंधान के बिन्दु व आगे की अनुसंधान प्रक्रिया की योजना से अवगत कराने को कहा है। इस विवरण की एक प्रति एडवोकेट एस डी खासपुरिया को देने के निर्देश भी दिए हैं।
बुलाया लेकिन वीवीआईपी सुरक्षा को दी तरजीह
मई 2015 में अलवर जिले में दो बच्चों की हत्या हो गई थी। अनुसंधान में पुलिस ने लापरवाही बरती और अभियुक्त तांत्रिक इकबाल की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इस मामले में अब तक इकबाल के खिलाफ मुकदमा शुरु करने लायक सबूत नहीं हैं। कोर्ट ने बुलाने के बावजूद अलवर एसपी के कोर्ट आदेश की पालना के बजाय वीवीआईपी सुरक्षा को तरजीह देने पर नाराजगी जताई है।
डीजीपी से भी पूछा था
कोर्ट ने निर्देश के बावजूद पुलिस अधीक्षक के हाजिर नही होने के कारण मामले को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम या सीबीआई को सौंपने पर जवाब मांगा था। कोर्ट ने डीजीपी से कोर्ट में हाजिर होने के मुकाबले वीआईपी सुरक्षा को तरजीह देने के प्रावधान भी बताने और ऐसा कोई प्रावधान नहीं होने पर संबंधित एसपी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई कर कोर्ट को बताने के निर्देश दिए थे।

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