बीटी बैंगन सहित किसी भी जीएम फसल को नहीं मिलेगी अनुमति

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री को दिया ज्ञापन

By: Rakhi Hajela

Published: 25 Aug 2020, 07:47 PM IST


केंद्रीय पर्यावरण मंत्री से हुई मुलाकात के बारे में जानकारी देते हुए प्रतिनिधिमंडल में शामिल भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय महामंत्री बद्रीनारायण चौधरी ने बताया,किसान संघ के द्वारा केंद्रीय मंत्री के सामने बात रखी गई कि पर्यावरण प्रदूषण, जैव विविधता को खतरा, पशु और मानव स्वास्थ्य,उत्पादकता, बाजार एकाधिकार आदि जैसे कई गंभीर मुद्दे हैं, जिन्हें जीएम फसलों के ऐसे परीक्षणों की अनुमति देने से पहले जानने और विश्लेषण करने की आवश्यकता है, जो कि अभी भी लंबित हैं।

बद्रीनारायण चौधरी ने कहा कि अधिकांश प्रतिष्ठित संस्थानों में, संसदीय स्थायी समिति, सर्वोच्च न्यायालय की तकनीकी विशेषज्ञ समिति, प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों के विचार, कुछ कृषि प्रधान राज्यों के संबंधित अधिकारी आदि ने अपनी आशंका व्यक्त की है। ऐसे में परीक्षण की अनुमति देना उचित नहीं होगा, जबकि कई राज्यों ने पहले ही जीएम खाद्य फसलों के परीक्षणों पर प्रतिबंध लगा दिया है। अभी देश कोरोना महामारी के संकट से जूझ रहा हैं, ऐसे समय, संबधित घटकों को अंधेरे में रखते हुएए बिना किसी से चर्चा करते हुए यह निर्णय लिया गया, जिसका किसान संघ ने विरोध किया।
इस संदर्भ में तमिलनाडु, कर्नाटक, छतीसगढ़ ,मध्यप्रदेश, झारखंड,बिहार, बंगाल और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों को भी ज्ञापन देकर अनुरोध किया है कि वे अपने राज्यों में इसकी परीक्षण की अनुमति न दे। भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय उपाध्यक्ष प्रभाकर केलकर ने बताया,सभी पहलूओं को स्पष्ट करने के बाद, पूरे देश में कही भी, संपूर्ण कृषक समुदाय और उपभोक्ताओं के लाभ के लिए बीटी बैंगन और अन्य जीएम फसलों के परीक्षण की अनुमति न देने का और देश अभी हैए इसलिए खाद्यानों पर भी रोक लगे ऐसा सरकार से आग्रह किया है। इस बारे में पर्यावरण मंत्री जावड़ेकर जी ने सभी पहलुओं पर विचार कर सकारात्मक कार्यवाही का आश्वासन दिया।

Rakhi Hajela Desk
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