सबसे बड़ी सजा फांसी......पर किसी को नहीं मिली

राजस्थान की बेटियों को न्याय का इंतजार: अदालतें सुना चुकी हैं फांसी, सालों हो गए, अपराधी सलाखों के पीछे कर रहे आराम, न्यायपालिका के लंबित मामले महिलाओं को न्याय दिलाने में विफल

Abrar Ahmad

December, 0912:56 AM

जयपुर. हैदराबाद में बलात्कार के आरोपियों की मुठभेड़ में मौत की घटना के बाद प्रदेश में ऐसे कुछ घिनौनी घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें निचली अदालत ने आरोपी को फांसी की सजा सुनाई है। ये मामले अब अपील में लम्बित चल रहे हैं। मासूम बालिकाओं की सुरक्षा के मामले में प्रदेश की स्थिति चिंताजनक है। यहां ऐसी कई घटनाएं सामने आर्ईं, जिसमें अबोध बालिकाओं से बलात्कार किया गया। कई मामलों में तो बालिका की हत्या कर दी गई। घटना की गम्भीरता को देखते हुए पुलिस जहां त्वरित जांच कर मामले में चार्जशीट पेश करती है तो अदालत भी उसी गम्भीरता से सुनवाई करती है। फांसी की सजा सुनाने के बाद कार्रवाई की रफ्तार जैसे धीमी पड़ जाती है। समय निकलने के साथ ही वह गम्भीरता कम हो जाती है। ऐसे कई मामले हैं, जो सजा होने के बाद आरोपी की याचिका पर अपील में लम्बित हैं।

गुनाह ही एेसा कि मिली फांसी

केस 1: झुंझुनूं: छह साल की बच्ची बनी शिकार

झुंझुनूं के निकट सीतसर गांव में हवाई पट्टी के पास 30 सितंबर 2015 को छह साल की बच्ची से बलात्कार के बाद गला घोंटकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने मामले में मध्यप्रदेश निवासी वेदप्रकाश को गिरफ्तार कर अदालत में चालान पेश किया। करीब एक माह में ही तत्कालीन जिला एवं सेशन न्यायाधीश ने आरोपी वेदप्रकाश को फांसी की सजा सुनाई थी। इसके बाद उसकी ओर से सजा के खिलाफ अपील की गई। यह मामला अभी तक लम्बित है।

केस 2: झुंझुनूं: तीन साल की मासूम से हैवानियत

झुंझुनूं जिले के मलसीसर क्षेत्र में गत वर्ष तीन वर्षीय मासूम बच्ची से बलात्कार की घटना सामने आई। पुलिस ने नौ दिन में तफ्तीश पूरी कर 13 अगस्त को चालान पेश किया। इस मामले में न्यायाधीश नीरजा दाधीच ने दौसा जिले के अलीपुर तन महरिया निवासी विनोद कुमार बंजारा को 31 अगस्त को धारा 450 के तहत दस वर्ष के कठोर कारावास, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम की धारा 3/4 के तहत आजीवन करावास और धारा 376 ए, बी के तहत मृत्युदंड से दंडित किया। यह मामला अपील में लम्बित है।

केस 3 : श्रीगंगानगर: ४ साल की बच्ची से बलात्कार फिर हत्या
श्रीगंगानगर में चार साल की बच्ची से बलात्कार के बाद उसकी हत्या कर दी गई। आरोपी पर हैवानियत इस कदर हावी थी कि उसने शव को दफना दिया। मामले में श्रीगंगानगर की एससी एसटी प्रकरणों की स्पेशल कोर्ट ने आरोपी कालू खान को वर्ष 2013 में फांसी की सजा सुनाई थी। उसकी ओर से इस आदेश के खिलाफ अपील की गई। मामला अभी हाईकोर्ट में अपील में है।

केस 4: श्रीगंगानगर: सिर भी कुचल दिया
श्रीगंगानगर में ही एससी एसटी मामलात की विशेष कोर्ट ने नाबालिग से बलात्कार कर हत्या के एक अन्य मामले में सादुलशहर निवासी सोनू उर्फ सोन को फांसी की सजा सुनाई थी। इस मामले में भी हाईकोर्ट में अपील लम्बित है। बलात्कार के बाद सिर कुचल कर हत्या की थी।केस ५: अलवर: छह माह पहले सुनाई थी सजा वर्ष 2017 के एक मामले में बहरोड़ की अदालत ने छह माह पहले ही आरोपी को फांसी की सजा सुनाई थी। वर्ष 2017 में बहरोड में रिवाली निवासी धर्मेन्द्र उर्फ राजकुमार ने पांच साल की बच्ची के साथ बलात्कार किया। इसके बाद पत्थर से सिर कुचल कर उसकी हत्या कर दी। अदालत ने इस मामले में धर्मेन्द्र को फांसी की सजा सुनाई है। यह मामला भी अपील में लम्बित है।

Abrar Ahmad Desk
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned