संसाधन मिलें तो 'मिट्टी बोले'

कृषि विभाग की ओर से शाहपुरा में मृदा परीक्षण प्रयोगशाला का भवन तैयार हुए छह माह हो गए, लेकिन उपकरण व स्टाफ के अभाव में मृदा परीक्षण नहीं हो रहा।

कृषि विभाग की ओर से शाहपुरा में मृदा परीक्षण प्रयोगशाला का भवन तैयार हुए छह माह हो गए, लेकिन उपकरण व स्टाफ के अभाव में मृदा परीक्षण नहीं हो रहा। इससे किसानों को इसका लाभ नहीं मिल रहा। यह प्रयोगशाला शुरू हो तो शाहपुरा समेत 5 पंचायत समिति क्षेत्र के किसानों के खेतों की मिट्टी का परीक्षण हो और उन्हें लाभ मिले।  
दो साल पहले की थी घोषणा

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने करीब दो साल पहले किसानों के लिए शाहपुरा में मृदा परीक्षण प्रयोगशाला खोलने की घोषणा की थी। राशि स्वीकृत होने पर सहायक कृषि निदेशक कार्यालय शाहपुरा परिसर में 21.50 लाख रुपए की लागत से प्रयोगशाला भवन का निर्माण हो चुका है, लेकिन संसाधन उपलब्ध नहीं करवाए गए। विभागीय सूत्रों के मुताबिक यहां मार्च माह तक मृदा परीक्षण शुरू होना था। परीक्षण के लिए क्षेत्र से मृदा के नमूने जयपुर प्रयोगशाला में ही भेजे जा रहे हैं।
इन उपकरणों की जरूरत
कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक यहां प्रयोगशाला में मृदा परीक्षण के लिए ताप मापन यंत्र, मृदा साफ करने की मशीन, फ्रीज समेत कई तरह की मशीनें व उपकरण जरूरी है। इसके अलावा मृदा परीक्षण करने के लिए एक कृषि अनुसंधान अधिकारी, प्रयोगशाला सहायक, तकनीकी व सहायक कर्मचारी और एक कम्प्यूटर ऑपरेटर समेत प्रशिक्षित स्टाफ भी अलग से होगा।
जल की भी होगी जांच
शाहपुरा सहित कोटपूतली, विराटनगर, पावटा आदि क्षेत्र डार्क जोन में शामिल हैं। ऐसे में भूमिगत जल पाताल तक पहुंच गया है। जल स्तर गिरने से सिंचाई के काम आने वाले जल में अनेक दूषित पदार्थ भी शामिल हो गए हैं। ऐसे में भूमि सुधार के साथ-साथ फसलों की सिंचाई भी शुद्ध जल से होगी तो उत्पादन में भी इजाफा हो सकेगा। यहीं कारण है कि प्रयोगशाला में ट्यूबवेल के जल की भी जांच होगी।
यह क्षेत्र होंगे लाभान्वित
सहायक निदेशक कृषि विस्तार शाहपुरा के अन्तर्गत शाहपुरा, कोटपूतली, जमवारामगढ़, विराटनगर और पावटा समेत 5 पंचायत समितियों का क्षेत्र आता है। यहां मृदा परीक्षण प्रयोगशाला शुरू होने पर उक्त पांचों पंचायत समिति क्षेत्र के किसानों को प्रयोगशाला शुरू होने का इंतजार है। प्रयोगशाला में मृदा परीक्षण रिपोर्ट में मृदा सुधार व स्वास्थ्य की सिफारिशों के अनुसार किसान अपनी भूमि में सुधार के उपाय अपना सकेंगे। साथ ही कृषि अधिकारियों की सलाह के अनुसार फसलों की बुवाई करेंगे। इससे उत्पादन बढ़ेगा और किसान अधिक लाभान्वित हो सकेंगे।   
जमवारामगढ़ में जमीन की तलाश
कृषि विभाग के सहायक निदेशक कार्यालय शाहपुरा के अधीन शाहपुरा के अलावा जमवारामगढ़ में भी मृदा परीक्षण प्रयोगशाला स्वीकृत हुई थी, लेकिन यहां तो अभी तक भवन का निर्माण ही शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में जमवारामगढ़ पंचायत समिति क्षेत्र में भी किसानों के लिए मृदा परीक्षण प्रयोगशाला दूर की कौड़ी बनी हुई है।
बिजली निगम की भी ढिलाई
बिजली निगम की ढिलाई से डिमांड राशि जमा कराने के बाद भी अभी भवन में बिजली कनेक्शन भी नहीं हुआ है।  भवन में थ्रीफेज बिजली कनेक्शन भी अनिवार्य है। जिसके लिए कृषि विभाग ने बिजली निगम में दो लाख 40 हजार की डिमांड राशि भी जमा करवा दी, लेकिन अभी बिजली कनेक्शन नहीं किया गया। अभी तक पानी की आपूर्ति के लिए भवन में पानी का कनेक्शन हुआ है।
इनका कहना...
मृदा परीक्षण प्रयोगशाला के भवन का निर्माण पूरा हो चुका है। मृदा परीक्षण के लिए विभाग से उपकरण आना शेष है। बिजली कनेक्शन के लिए डिमांड राशि जमा करवा दी है, शीघ्र कनेक्शन हो जाएगा। अप्रेल माह तक मृदा परीक्षण प्रयोगशाला शुरू होने की उम्मीद है।   
सरदारमल यादव, सहायक निदेशक, कृषि विभाग शाहपुरा
जयपुर जिले में शाहपुरा, चाकसू व जमवारामगढ़ में मृदा परीक्षण प्रयोगशाला स्वीकृत हुई थी, जिसमें शाहपुरा व चाकसू में तो भवन बनकर तैयार है और जमवारामगढ़ में भवन निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध नहीं हुई। प्रयोगशाला में काम आने वाले उपकरणों व मशीनों की खरीद के टेण्डर कर वर्क ऑर्डर दे दिए हैं।
डॉ. अजय पचौरी, संयुक्त निदेशक, मृदा, कृषि विभाग, जयपुर
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Abhishek sharma Desk
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