कामकाज नहीं, कोई उधार देने को तैयार नहीं

बिल्डिंग बनाने वाले मिस्त्रियों का काम बंद होने से बढ़ी परेशानी

जयपुर. गर्मी में सबसे ज्यादा बिल्डिंग बनाई जाती हैं। ऐसे में बिल्डिंग बनाने वाले मिस्त्री और बेलदार समुदाय के लिए अभी काम का मुख्य समय चल रहा है, लेकिन लॉकडाउन के चलते काम बंद होने से घर खाली बैठे हैं। शहर में दिहाड़ी मजदूरी पर जाने वाले मिस्त्रियों का कहना है कि नोटबंदी के चलते इतनी समस्या नहीं आई थी, जितनी लॉकडाउन में आ रही है। नोटबंदी में उधारी पर सामान मिल जाता था, लेकिन अब तो कोई उधारी भी देने को तैयार नहीं हैं।

By: Sudhir Bile Bhatnagar

Published: 23 Apr 2020, 03:01 PM IST


भूखमरी के डर से ज्यादातर मिस्त्री व मजदूर वापस अपने राज्यों की ओर पलायन कर गए, लेकिन जो यहां रूक गए, उनके लिए घर खर्च चलाना भी मुश्किल हो रहा है। शहर के मिस्त्रियों का कहना है कि एक महीना हो गया, कोरोना महामारी अभी जिस तरह बढ़ रही है उसे देखकर लगता नहीं लॉकडाउन खुल जाएगा।
कामकाज शुरू हो तो मिले राहत
जयपुर के मानसरोवर इलाके में मिस्त्री का कार्य करने वाले राम अवतार की कोरोना के चलते रोजी छिन गई है। काम की जो मजदूरी आनी थी अब वो भी लॉकडाउन की वजह से नहीं मिल पा रही। हालात ऐसे हैं कि कोई उधारी देने को भी तैयार नहीं है। राशन में गेहूं तो मिल जाता है, लेकिन बच्चों के लिए दूध-सब्जी की व्यवस्था भी नहीं कर पा रहे हैं।
राम अवतार का कहना है कि परिवार में पांच लोग हैं, दो छोटे बच्चे हैं, जिन्हें दूध की जरूरत होती है। लेकिन हमारी बेबसी यह है कि हम उनकी जरूरत भी पूरी नहीं कर पा रहे। लॉकडाउन खुले और कामकाज शुरु हो तो कुछ राहत मिले। अब कामकाज नहीं मिला तो अपने गांव वापस जाना पड़ेगा।
जमापूंजी खर्च, अब कैसे चलाएं घर खर्च
चाकसू निवासी मोहनलाल ने बताया कि वो मिस्त्री और ठेकेदारी दोनों कार्य करते हैं। लेकिन अचानक बंद हुए कामकाज के चलते हालत खराब हैं। बेरोजगार हो गए हैं, बचत राशी खर्च हो गई। प्रशासन से मदद की गुहार लगाई तो उन्होंने गेहूं मुहैया करवा दिया, लेकिन आटा चक्कियां बंद होने से गेहूं पिसवाने की समस्या है। ऐसे में गेहूं की जगह आटा मुहैया कराए या फिर चक्कियां खुलवाए। मोहन लाल ने बताया कि उनके पास राशन कार्ड है, इसलिए राशन मिल रहा है, जिनके पास नहीं है उनका क्या होगा।

Sudhir Bile Bhatnagar
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