किसानों की गैर खातेदारी भूमि को खातेदारी में बदला जाएगा - राजस्व मंत्री

विधानसभा में राजस्व मंत्री हरीश चौधरी ने कहा कि राज्य के सभी किसानों की गैर खातेदारी भूमि को खातेदारी में बदला जाएगा, विभागीय कैंप के माध्यम से यह कार्य किया जाएगा

 

जयपुर।
राजस्व मंत्री हरीश चौधरी ने गुरुवार को विधानसभा में कहा कि राज्य के सभी किसानों की गैर खातेदारी भूमि को खातेदारी में बदला जाएगा तथा इसकी जिलों से सूचना मंगवाकर विभागीय कैंप के माध्यम से यह कार्य किया जाएगा।

चौधरी प्रश्नकाल में विधायकों की ओर से इस संबंध में पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य में जहां कहीं भी गैर खातेदारी से खातेदारी भूमि में परिवर्तित करने के प्रकरण की सूचना प्राप्त हुई है, उनकी सभी जिलों से सूची मंगवाई गई है और ऐसे सभी गैर खातेदारों को राज्य सरकार खातेदारी का अधिकार देने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा कैंप लगाकर गैर खातेदारी भूमि को खातेदारी में बदल दिया जाएगा।

इससे पहले विधायक रामनारायण मीणा के मूल प्रश्न के जवाब में चौधरी ने कहा कि जिला कलक्टर, बून्दी के पत्र दिनांक 24 सितम्बर 1995 के द्वारा उप जिलाधीश तथा तहसीलदार बून्दी को खनन विभाग द्वारा खनन लीज आवंटन किये जाने से खातेदार एवं ठेकेदारों के मध्य विवाद उत्पन्न हो जाने के मध्यनजर आवंटन, नियमन एवं खातेदारी अधिकार नहीं दिये जाने के निर्देश प्रदान किये थे। उन्होंने इसकी प्रति सदन के पटल पर रखी।

उन्होंने बताया कि प्रमुख शासन सचिव राजस्व की अध्यक्षता में 14 मार्च 2005 को बैठक आयोजित कर बरड क्षेत्र में गैर खातेदारी से खातेदारी के अधिकार नहीं दिए जाने के निर्देश प्रदान किए गए थे, उक्त बैठक में खनिज विभाग के निदेशक भी उपस्थित थे। उन्होंने कार्यवाही विवरण सदन के पटल पर रखा।

राजस्व मंत्री ने बताया कि बरड क्षेत्र में खनन हेतु लीज आवंटियों व कृषकों के मध्य विवाद उत्पन्न होने की स्थिति के दृष्टिगत एवं इससे उत्पन्न विवादों के निराकरण के लिए गैर खातेदार कृषकों को खातेदारी दिए जाने के लिये उक्त प्रशासनिक आदेश द्वारा जिला कलक्टर बून्दी ने अस्थाई रोक लगाई गयी थी। चौधरी ने बताया कि प्रकरण में विधि विभाग से प्राप्त की गई राय अनुसार जिला कलक्टर बून्दी के आदेश दिनांक 24 सितम्बर 1985, राजस्थान भू-राजस्व (कृषि हेतु आवंटन नियम ) 1970 के नियम 14 (आवंटन शर्तों) एवं नियम 18 (खातेदारी अधिकार देने) के प्रावधानों के अनुरूप नहीं थे।

उन्होंने बताया कि बरड क्षेत्र में गैर खातेदारी से खातेदारी दिये जाने का प्रकरण वर्तमान में राज्य सरकार के स्तर पर राज्य के सभी जिलों से संर्दभित सूचना प्राप्त कर निर्णय हेतु विचाराधीन है। उन्होंने बताया कि निदेशालय, खान एवं भू-विज्ञान विभाग उदयपुर राजस्थान के परिपत्र क्रमांक 884 दिनांक 19 अगस्त 2008 से शासन के परिपत्र क्रमांक प.14(20)खान/ग्रुप-2/95 दिनांक 15 नवंबर 1995 के द्वारा राजस्थान अप्रधान खनिज रियायत नियमावली 1986 के अन्तर्गत खातेदारी एवं निजी भूमि में खनन पट्टा स्वीकृति एवं नवीनीकरण किये जाने के पूर्व खातेदार की सहमति प्राप्त किये जाने हेतु निर्देशित किया हुआ है। उन्होंने परिपत्र की प्रति सदन के पटल पर रखी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में राजस्थान अप्रधान खनिज रियायत नियमावली 2017 लागू होने से खातेदार को ही खनन पट्टा जारी किया जाता है।

राजस्व मंत्री ने बताया कि प्रकरण में खनिज संभावित क्षेत्र में खनन पटटाधारियों व राजकीय भूमि के आवंटी गैर खातेदारों के मध्य विवादों के नियंत्रण की ओर से जिला स्तर से पत्र दिनांक 24 सितम्बर 1985 द्वारा प्रशासनिक आदेश जारी किये गये है। उन्होंने बताया कि गैर खातेदारों की ओर से भूमि का समर्पण राज्य सरकार के पक्ष में किये जाने के पश्चात नामान्तरण सिवायचक होने से बरड क्षेत्र में रकबा 58.54 हैक्टेयर क्षेत्र में खनन पट्टे स्वीकृत किए गए हैं। न्यायालयों तत्कालीन तहसीलदार के आदेशों से गैर खातेदारी से रकबा 214.48 हैक्टेयर में खातेदारी अधिकार दिये गये है। वर्तमान में 1781.45 है0 भूमि गैर खातेदारी में दर्ज है।

चौधरी ने बताया कि राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955 की धारा 42, 46ए, 175 तथा राजस्थान भू-राजस्व (कृषि हेतु आवंटन नियम ) 1970 के नियम 6 (3) के प्रावधानों के अनुसार अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के कृषकों की भूमि को अनुसूचित जाति से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति से अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों को ही हस्तान्तरण का प्रावधान है।

Sunil Sisodia Reporting
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