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अब न चूड़ियां टूटेंगी, न ही पोंछा जाएगा सिंदूर

राजस्थान हो या फिर उत्तर प्रदेश। मध्यप्रदेश हो या फिर छत्तीसगढ़। सभी प्रदेशों के लिए महाराष्ट्र का एक गांव उदाहरण बनकर सामने आया है। महाराष्ट्र में कोल्हापुर जिले के एक गांव ने किसी महिला के पति की मौत के बाद अपनाई जाने वाली प्रथाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है। यानी गांव की कोई महिला अब पति की मौत के बाद न चूड़ियां तोड़ेगी, न माथे से सिंदूर पोंछेगी और न ही मंगलसूत्र हटाएगी।

जयपुर

Published: May 10, 2022 09:11:11 pm

राजस्थान हो या फिर उत्तर प्रदेश। मध्यप्रदेश हो या फिर छत्तीसगढ़। सभी प्रदेशों के लिए महाराष्ट्र का एक गांव उदाहरण बनकर सामने आया है। महाराष्ट्र में कोल्हापुर जिले के एक गांव ने किसी महिला के पति की मौत के बाद अपनाई जाने वाली प्रथाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है। यानी गांव की कोई महिला अब पति की मौत के बाद न चूड़ियां तोड़ेगी, न माथे से सिंदूर पोंछेगी और न ही मंगलसूत्र हटाएगी।
widow woman
Now the bangles will not break, nor will the vermilion be wiped
शिरोल तहसील के हेरवाड़ गांव की पंचायत ने इस संबंध में प्रस्ताव पारित किया है और इस फैसले पर गांव वालों का समर्थन मांगा है। हेरवाड़ ग्राम पंचायत के सरपंच सुरगोंडा पाटिल का कहना है कि महिलाओं को इन प्रथाओं से गुजरना पड़ता है, जो बहुत अपमानजनक है। हमें इस प्रस्ताव पर गर्व महसूस हो रहा है। इसने हेरवाड़ को अन्य ग्राम पंचायतों के लिए मिसाल के तौर पर पेश किया।
यह फैसला ऐसा समय किया गया, जब हम समाज सुधारक राजा राजर्षि छत्रपति साहू महाराज की 100वीं पुण्यतिथि मना रहे हैं। उन्होंने महिलाओं के उद्धार के लिए काम किया। महिला स्वयं सहायता समूह के साथ कार्यरत अंजलि पेलवान (35) का कहना है कि विधवा होने के बावजूद वह गहने पहनती हैं। उन्होंने बताया कि हमने महाराष्ट्र के मंत्री राजेंद्र यद्राकर को विधवाओं के हस्ताक्षर वाला एक ज्ञापन सौंपा है। इसमें विधवा संबंधी प्रथाओं पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानून बनाने की मांग की गई है।
समाज सुधारक की वसीयत :
विधवा प्रथाओं के खिलाफ पहल सोलापुर की करमाला तहसील में महात्मा फुले समाज सेवा मंडल के संस्थापक अध्यक्ष प्रमोद जिंजादे ने की। उन्होंने घोषणा कि उनकी मौत के बाद पत्नी को इस प्रथा के लिए मजबूर नहीं किया जाए। दो दर्जन पुरुषों ने इस घोषणा का समर्थन किया। कई विधवाओं की प्रतिक्रिया भी सकारात्मक रही।
सरपंच ने बताया, कोरोना की पहली लहर में हमारे एक सहयोगी की दिल के दौरे से मौत हो गई थी। उनके अंतिम संस्कार के दौरान मैंने देखा कि कैसे उनकी पत्नी को चूड़ियां तोड़ने, मंगलसूत्र हटाने और सिंदूर पोंछने के लिए मजबूर किया। इससे पत्नी का दुख और बढ़ गया। वह दृश्य हृदय विदारक था। तभी हमने तय किया कि गांव में इस तरह की प्रथाओं पर रोक के कदम उठाएंगे।
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Anand Mani Tripathi

आनंद मणि त्रिपाठी (@aanandmani) राजनीति, अपराध, विदेश, रक्षा एवं सामरिक मामलों के पत्रकार हैं। पत्रकारिता के तीनों माध्यम प्रिंट, टीवी और आनलाइन में गहरा और अपनी तेज तर्रार रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। पश्चिम बंगाल के कलकत्ता में जन्म हुआ। प्रारंभिक शिक्षा उत्तर प्रदेश के कानपुर और बस्ती में हुई। माध्यमिक शिक्षा नवोदय विद्यालय बस्ती, फैजाबाद और पूर्वोत्तर त्रिपुरा के धलाई जिले में हुई। अयोध्या के साकेत महाविद्यालय से स्नातक और 2009 में जेआईआईएमसी,दिल्ली से पत्रकारिता का डिप्लोमा किया। हरियाणा से पत्रकारिता आरंभ की। शिक्षा, विज्ञान, मौसम, रेलवे, प्रशासन, कृषि विभाग और मंत्रालय की रिपोर्टिंग की। इंवेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग से शिक्षा और रेलवे विभाग के कई भ्रष्टाचार का खुलासा किया। रक्षा मंत्रालय के रक्षा संवाददाता पाठयक्रम-2016 पूरा किया। इसके बाद रक्षा मामलों की पत्रकारिता शुरू कर दी। चीन, पाकिस्तान और कश्मीर मामलों पर तीक्ष्ण नजर रहती है। लेफ्टिनेंट उमर फैयाज की हत्या 2017, राइफलमैन औरंगजेब की हत्या 2018, जम्मू—कश्मीर में बदले 2018 में बदले राजनीतिक समीकरण, पुलवामा हमला 2019, कश्मीर से 370 का हटना, गलवान घाटी मुठभेड़ 2020 को बेहद करीब से जम्मू और कश्मीर में रहकर ही कवर किया। कोरोना काल 2020 में भी लददाख से नेपाल तक की यात्रा चीन के बदलते समीकरण को लेकर की। इसके साथ ही लोकसभा चुनाव 2019 में जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पंजाब की रिपोर्टिंग की। 9 नवंबर 2019 को श्रीराम जन्म भूमि अयोध्या मामले में आए फैसले की अयोध्या से कवर किया। 2022 उत्तरप्रदेश् चुनाव को सहारनपुर से सोनभद्र तक मोटर साइकिल के माध्यम से कवर किया। पत्रकारिता से इतर आनंद मणि त्रिपाठी को संगीत और पर्यटन का जबरदस्त शौक है। इन्हें किसी भी कार्य में असंभव शब्द न प्रयोग करने के लिए जाना जाता है...

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