'एनपीआर पर राज्य सरकार अपनी स्थिति करे स्पष्ट'

( NPR In Rajasthan ) जमाअते इस्लामी हिद के प्रदेशाध्यक्ष मुहम्मद नाज़िमुद्दीन ने कहा कि यदि राज्य सरकार ने एनपीआर ( National Population Register NPR ) न करवाने की आधिकारिक घोषणा नहीं की तो प्रदेश भर में चल रहे आन्दोलन को और तेज़ किया जाएगा

By: abdul bari

Published: 15 Mar 2020, 12:25 AM IST

जयपुर
सीएए, एनआरसी, एनपीआर विरोधी जन-आन्दोलन के संयोजक सवाई सिंह ने शनिवार को प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि 'तीन महीने से पूरे प्रदेश में सीएए, एनपीआर तथा एनआरसी के विरोध में जनता सड़कों पर है, जनता में भय व्याप्त है, परन्तु हमारी राज्य सरकार ( Rajasthan Government ) अभी तक एनपीआर ( NPR In Rajasthan ) पर अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं कर पाई है।' उन्होंने कहा कि देश भर में आगामी महीने से शुरू होने वाला एनपीआर सर्वे वास्तव में एनआरसी का ही प्रथम चरण है, अतः राज्य सरकार एनपीआर पर अपनी स्थिति स्पष्ट करे।

'हमें राज्य सरकार के इस क़दम का भी विरोध करना पड़ेगा'


जमाअते इस्लामी हिद के प्रदेशाध्यक्ष मुहम्मद नाज़िमुद्दीन ने कहा कि यदि राज्य सरकार ने एनपीआर ( National Population Register NPR ) न करवाने की आधिकारिक घोषणा नहीं की तो प्रदेश भर में चल रहे आन्दोलन को और तेज़ किया जाएगा तथा इस गांवों और मोहल्लों की सतह पर ले जाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यद्यपि हमारी लड़ाई राज्य सरकार से नहीं है। परन्तु अगर राज्य सरकार ने एनपीआर एवं एनआरसी पर रोक लगाने की घोषणा नहीं करती है और प्रदेश में एनपीआर की प्रक्रिया प्रारम्भ हो जाती है तो मजबूरन हमें राज्य सरकार के इस क़दम का भी विरोध करना पड़ेगा।

राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति का लगाया आरोप

इस मौके पर सभी वक्ताओं ने कहा कि केन्द्र की भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार लगातार जन-विरोधी एवं संविधान विरोधी निर्णय ले कर देश की जनता को संकट में डाल रही है। वह देश की जनता का ध्यान देश की मूल समस्याओं से भटका कर अपने राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति कर रही है। कई ऐसे क़ानून बनाए गए हैं जो संविधान की मूल भावना के विरुद्ध हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) तथा राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) के रूप में देश के सामने एक बड़ा संकट पैदा हो गया है।

NPR के विरुद्ध एक प्रस्ताव पारित करने की मांग


इस अवसर पर आन्दोलन कर रहे लोगों ने राज्य सरकार से मांग की कि वह आधिकारिक तौर पर यह आदेश जारी करे कि प्रदेश में NPR की प्रक्रिया प्रारम्भ नहीं की जाएगी और इस घोषणा को राज्य सरकार के गज़ेट में भी सूचित किया जाए, विधानसभा के जारी सत्र में में NPR के विरुद्ध एक प्रस्ताव पारित किया जाए, जिसमें केन्द्र सरकार से मांग की जाए कि वह NPR की प्रक्रिया को तुरन्त रोक दे। उन्होंने कहा कि CAA को असंवैधानिक क़रार देने तथा NPR एवं NRC को देश के लिए अनावश्यक घोषित करवाने के लिए राज्य सरकार उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर करे।

ये रहे मौजूद

इस अवसर पर भारतीय बोद्ध महासभा के अध्यक्ष तथा सेवा निवृत्त न्यायाधीश टी.सी. राहुल, जाट महासभा के अध्यक्ष राजाराम मील ने भी पत्रकारों को सम्बोधित किया। प्रेस कॉन्फ्रेन्स में जयपूर शिया जामा मस्जिद के इमामे जुमा मौलाना नाज़िश अकबर काज़मी, एनएफआडब्ल्यू की निशा सिद्धू , पॉपूलर फ्रन्ट ऑफ इण्डिया के मोहम्मद आसिफ़, दलित मुस्लिम एकता मंच के मोहन लाल बैरवा, मसीही शक्ति समिति के अध्यक्ष फादर विजय पॉल सिंह, तेली महापंचायत के अध्यक्ष अब्दुल लतीफ़ आरको, एसआईओ, राजस्थान के मौसूफ़ अहमद, एसडीपीआई के डात्र शहाबुद्दीन, वहदते इस्लामी के मोहम्मद इरफ़ान, आरक्षण अधिकार मंच के रामेश्वर सेवार्थी, राजस्थान नागरिक मंच के बसंत हरियाणा, संवैधानिक विचार मंच के गीगराज जोडली, जमियत उलमा हिन्द के जयपुर महासचिव मुफ़्ती मुहम्मद शफ़ीक़, डा. अम्बेडकर वेलफेयर सोसाइटी के महासचिव अनिल गोठवाल, छात्र नेता रोशन मुंडोतिया, जन-आन्दोलन के जन-सम्पर्क प्रभारी मुज़ाम्मिल रिज़वी, अश्फ़ाक़ हुसैन, नईम रब्बानी, वक़ार अहमद, धर्मेन्द्र आंचरा, महेन्द्र रोकड़ तथा रहबर रज़ा भी उपस्थित थे।

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