प्रदेश में एनटीटी कोर्स बंद, बाहर से पढ़ाई करने वालों पर भर्ती में संकट

राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) के जरिए हुई एनटीटी भर्ती (NTT recruitment) को लेकर युवाओं में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। प्रदेश में लगभग दस साल से एनटीटी कोर्स (NTT course) के बंद होने की वजह से हजारों विद्यार्थियों ने दूसरे राज्यों से यह पढ़ाई कर ली। पात्रता जांच में बोर्ड ने ऐसे ज्यादातर अभ्यर्थियों को रोक दिया है।

By: vinod

Published: 20 Nov 2020, 12:15 AM IST

सीकर। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (Rajasthan Staff Selection Board) के जरिए हुई एनटीटी भर्ती (NTT recruitment) को लेकर युवाओं में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। प्रदेश में लगभग दस साल से एनटीटी कोर्स (NTT course) के बंद होने की वजह से यहां के हजारों विद्यार्थियों ने दूसरे राज्यों से यह पढ़ाई कर ली। पात्रता जांच में बोर्ड ने ऐसे ज्यादातर अभ्यर्थियों को रोक दिया है। इस कारण अभ्यर्थियों ने न्यायालय की शरण लेना शुरू कर दिया है। बेरोजगारों का कहना है कि अंकतालिका जांच के नाम पर प्रोविजनल सूची में भी शामिल नहीं किया गया है। दूसरी तरफ आंगनबाड़ी केंद्रों के स्कूलों में एनटीटी शिक्षक नहीं होने की वजह से व्यवस्था बेपटरी हो रही है।
एनसीटीई ने भी दिया पत्र
प्रदेश के सैकड़ों विद्यार्थियों ने इस मामले में एनसीटीई में भी सूचना के अधिकार के तहत आवेदन किया। इसके जवाब में एनसीटीई ने कई राज्यों के केंद्रों को मान्य बताया है। इन केंद्रों से एनटीटी की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को पहली सूची में नौकरी नहीं दी गई है।
वर्ष 2018 में जारी हुई थी विज्ञप्ति
वर्ष 2018 में महिला एवं बाल विकास विभाग ने एनटीटी के पदों पर भर्ती के लिए कर्मचारी बोर्ड को अभ्यर्थना भेजी थी। इस दौरान आचार संहिता की वजह से परीक्षा नहीं हो सकी। इसके जरिए 1350 पदों पर भर्ती होनी थी। परिणाम के बाद बोर्ड ने डेढ़ गुणा से अधिक अभ्यर्थियों से दस्तावेज सत्यापन के लिए आवेदन लिए। पहली सूची में महज 504 अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी गई है।
इससे पहले भी हो चुकी है दो भर्ती
महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से वर्ष 2012 व 2013 में भी एनटीटी भर्ती परीक्षाओं का आयोजन हो चुका है। बेरोजगारों का कहना है कि पुराने नियमों के हिसाब से भी पुराने कॉलेजों से पढ़ाई करने वालों को अंतिम सूची में शामिल नहीं किया गया है।
दूसरे राज्यों से पढ़ाई करना मजबूरी
प्रदेश में सरकार की ओर से एनटीटी की भर्ती तो कराई जा रही है, लेकिन एनटीटी पाठ्यक्रम का संचालन करने वाले महाविद्यालयों की संख्या लगातार कम होती रही। इस वजह से पिछले दस सालों में यह पाठ्यक्रम पूरी तरह से बंद है। एेसे में यहां के विद्यार्थियों को मजबूरी में दूसरे राज्यों से एनटीटी की पढ़ाई करनी पड़ रही है। बेरोजगारों ने यहां के संस्थाओं में भी इस पाठ्यक्रम को दुबारा से शुरू कराने की मांग की है।

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