राजस्थान: कृषि विधेयकों पर भूमिपुत्रों का गुस्सा उबाल पर, हर जिले में विरोध में उतरेंगे किसान

विरोध में उतरे विभिन्न संगठनों में अब ऑर्गेनिक फार्मर प्रोड्यूज़र एसोसिएशन ऑफ इंडिया यानी ओएफपीएआई भी शामिल हो गया है। ओएफपीएआई ने केंद्र सरकार द्वारा पारित किए गए किसान विधेयकों का विरोध जताते हुए आंदोलन की घोषणा की है।

 

By: nakul

Published: 24 Sep 2020, 11:57 AM IST

जयपुर।

संसद में पारित हुए कृषि विधेयकों का विरोध जारी है। किसानों का एक तबका इन विधेयकों को किसान विरोधी बताते हुए मोदी सरकार के पुरजोर विरोध में उतर आया है। विरोध में उतरे विभिन्न संगठनों में अब ऑर्गेनिक फार्मर प्रोड्यूज़र एसोसिएशन ऑफ इंडिया यानी ओएफपीएआई भी शामिल हो गया है। ओएफपीएआई ने केंद्र सरकार द्वारा पारित किए गए किसान विधेयकों का विरोध जताते हुए आंदोलन की घोषणा की है।

ओएफपीएआई संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अतुल गुप्ता ने कृषि विधेयकों का विरोध जताते हुए प्रत्येक जिला स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने और प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन देने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि भारतीय जैविक किसान संघ की समस्त इकाईयों के माध्यम से जिला स्तर पर विरोध दर्ज कराया जाएगा। साथ ही संगठन के पदाधिकारी राजस्थान के सांसदों से मुलाकात कर उन्हें किसान हित में प्रधानमंत्री व कृषि मंत्री को बिल में संशोधन की मांग उठायेंगे।

इसके अलावा संगठन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के ज़रिये भी सरकार के नए कृषि विधेयकों का विरोध करने का मन बनाया है। इसके लिए फेसबुक, टिवटर, इंस्टाग्राम व व्हाट्स-ऐप के जरिए किसान विरोधी विधेयक के खिलाफ किसानों को जागरूक किये जाने की योजना बनाई जा रही है।

विरोध जताने के 6 मुख्य बिंदु

राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अतुल गुप्ता ने विधेयक का विरोध जताते हुए कई कारण बताये। उन्होंने जिन मुख्य कारणों का हवाला देते हुए विधेयक का विरोध जताया है उनमें कहा गया है कि -

- इस कानून को भारतीय खाद्य व कृषि व्यवसाय पर हावी होने की इच्छा रखने वाले बड़े उद्योगपतियों के अनुरूप बनाया गया है।

- 86 प्रतिशत छोटे किसान एक जिले से दूसरे जिले में नहीं जा पाते हैं तो किसी दूसरे राज्य में जाने का सवाल ही नहीं उठता है, यह बिल बाजार के लिए बना है न की किसान के लिए।

- इस कानून से किसान अपने ही खेत में एक मजदूर बनकर रह जाएगा। इससे कालाबाजारी को बढ़ावा मिलेगा। सरकार ने परोक्ष रूप से जमाखोरी को वैधता दे दी है।

- इस विधेयक के लागू होने से कंपनियां और सुपर मार्केट सस्ते दाम पर उपज खरीदकर अपने बड़े-बड़े गोदामों में इसका भंडारण करेंगे और बाद में ऊंचे दामों पर ग्राहकों को बेचेंगे।

- इन विधेयकों के लागू होने से राज्यों को राजस्व का नुकसान होगा क्योंकि वह मंडी शुल्क प्राप्त नहीं कर पाएंगे। यह किसानों की मोलतोल करने की शक्ति को कमजोर करेगा।

- इससे किसान पूरी तरह कांट्रेक्ट फार्मिंग के दायरे में आ जाएंगे, कंपनियां जमीदार की तरह किसानों से फसल उत्पादन करवाएंगी और मुनाफा कमाएंगी।

nakul Desk
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