हर दो मिनट में निमोनिया से एक बच्चे की मौत

One Child Dies of Pneumonia Every Two Minutes : जयपुर। Cold Weather शुरू होने के साथ ही Pneumonia का असर भी बढऩे लगा है। निमोनिया Children को जल्दी निसाना बनाता है और समय पर ध्यान नहीं दिया जाए तो खतरनाक स्थिति हो सकती है। India में प्रति दो मिनट में पांच साल तक के एक बच्चे की मौत निमोनिया से हो जाती है। निमोनिया से Lung Tissue पर असर होता है। इसका कारण आमतौर पर Bacterial से होने वाला Infection होता है। Virus से संक्रमण बहुत कम होता है।

वल्र्ड निमोनिया-डे पर खास:

One Child Dies of pneumonia Every Two Minutes : जयपुर। मौसम में ठंडक ( Cold Weather ) शुरू होने के साथ ही निमोनिया ( Pneumonia ) का असर भी बढऩे लगा है। निमोनिया बच्चों ( children ) को जल्दी निसाना बनाता है और समय पर ध्यान नहीं दिया जाए तो खतरनाक स्थिति हो सकती है। भारत ( India ) में प्रति दो मिनट में पांच साल तक के एक बच्चे की मौत निमोनिया से हो जाती है। निमोनिया से फेफड़े के ऊतकों ( Lung Tissue ) पर असर होता है। इसका कारण आमतौर पर बैक्टीरिया ( Bacterial ) से होने वाला संक्रमण ( Infection ) होता है। वायरस ( Virus ) से संक्रमण बहुत कम होता है। संक्रमण हवा से होता है। इससे बचाव के लिए टीकाकरण सबसे उपयुक्त उपाय है।

न्यूमोनिया के लक्षण
- तेज बुखार और दौरे पडऩा
- खाने-पीने को राजी नहीं होता। स्तनपान भी नहीं करना
- बच्चे का सुस्त रहना, देर तक नहीं जागना
- सांस लेते समय बच्चे की पसलियों का खिंचना
- सांस लेते समय सीने से सीटी जैसी आवाज आना
- त्वचा, होंठ, नाखून व चेहरे पर नीली सी झलक दिखती है।

निमोनिया के कारण जितनी जानें जाती हैं उतनी नहीं जानी चाहिए क्योंकि अब हमारे पास ऐसे टीके उपलब्ध हैं, जो लाखों बच्चों को इस जानलेवा बीमारी से बचाने में सक्षम हैं। दुनियाभर में 140 से ज्यादा देश इस न्यूमोकोकल कॉन्जुगेट वैक्सीन को अपने इम्युनाइजेशन प्रोग्राम में शामिल कर चुके हैं और हाल ही में भारत सरकार की ओर से भी ऐसा करने का फैसला लिए जाने से हमें 2018 तक 90 फीसदी इम्युनाइजेशन का अपना लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी।
निमोनिया में फेफड़ों के किसी भाग में शोथ हो जाता है। बैक्टीरिया, वायरस, फंगस से फेफड़ों में एक टाइप का संक्रमण जमा हो जाता है। इससे खून और ऑक्सीजन के फ्लों में रुकावट होने लगती है। इससे बच्चा तेज-तेज सांस लेने लगता है। शोथ से खांसी, बुखार और अन्य लक्षण जैसे भूख मरना, उल्टी और बहुत ज्यादा कमजोरी हो जाती है। आमतौर पर कोई और बीमारी होने पर जब शरीर की प्रतिरक्षा क्षमता कमजोर पड़ गई होती है तक निमोनिया हो जाता है। खसरे या किसी और श्वससन तंत्र की किसी वायरस से होने वाली बीमारी से ठीक हो रहे बच्चे, कुपोषित बच्चे, समय से पहले पैदा हुए बच्चे और कम वजन वाले बच्चों के निमोनिया के शिकार होने की संभावना अधिक होती है।

ऐसे करें बचाव -
बच्चों को निमोनिया का वेक्सीन लगवाएं
खांसी-बुखार होने पर स्कूल न भेजें
नवजात को ब्रेस्ट फीडिंग ज्यादा कराएं
बाहरी प्रदूषन से बच्चों को बचाएं
हैल्दी डाइट दें व घर व आस-पास रखें सफाई


भारत में बच्चों का न्यूमोनिया एक गंभीर बीमारी है। पांच साल से कम उम्र किसी भी शिशु को यह बीमारी कभी भी हो सकती है। इसके लक्षण फ्लू से मिलते-जुलते होते हैं। बुखार, खांसी और सांस तेजी से चलना, सीने में दर्द, बलगम वाली खांसी, ये लक्षण होने पर इसे न्यूमोनिया समझना चाहिए। बच्चों में न्यूमोनिया अक्सर जिवाणु या कभी कभी विषाणु से होता है। बीमारी की शुरुआत बुखार, सर्दी, खांसी से होती है। बच्चे का दम फूलता है। बीमारी फेफडों में होती है। यह सब 1-2 दिनों में होता है। इसमें खांसी सीने की गहराई से आती है, गले से नहीं। खांसने की आवाज से ही यह पता चलता है। इसी को भारी खांसी भी कहते हैं। शुरु में 1-2 दिन हल्का-मध्यम बुखार रहता है। बुखार निरंतर रहता है।


थमनिल
जानिए क्यों मर जाते हैं बच्चे निमोनिया से
वल्र्ड निमोनिया-डे पर खास

निमोनिया के लक्षण
- तेज बुखार और दौरे पडऩा
- खाने-पीने को राजी नहीं होता। स्तनपान भी नहीं करना
- बच्चे का सुस्त रहना, देर तक नहीं जागना
- सांस लेते समय बच्चे की पसलियों का खिंचना
- सांस लेते समय सीने से सीटी जैसी आवाज आना
- त्वचा, होंठ, नाखून व चेहरे पर नीली सी झलक दिखती है।

ऐसे करें बचाव -
बच्चों को निमोनिया का वेक्सीन लगवाएं
खांसी-बुखार होने पर स्कूल न भेजें
नवजात को ब्रेस्ट फीडिंग ज्यादा कराएं
बाहरी प्रदूषन से बच्चों को बचाएं
हैल्दी डाइट दें व घर व आस-पास रखें सफाई

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Anil Chauchan
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