सतीश पूनियां का एक साल, पार्टी की एकजुटता अब भी बड़ा सवाल

प्रदेशाध्यक्ष के रूप में डॉ. सतीश पूनियां का 14 सितंबर को एक साल पूरा हो चुका है। इस एक साल में पूनियां के समक्ष कई चुनौतियां आई और उन्होंन ज्यादातर का अच्छे तरीके से सामना भी किया। लेकिन सबसे बड़ी चुनौती पार्टी को गुटबाजी से दूर करते हुए एकजुट रखना था, लेकिन इसमें वो सफल होते नहीं दिख रहे हैं।

By: Umesh Sharma

Published: 15 Sep 2020, 04:24 PM IST

जयपुर।

प्रदेशाध्यक्ष के रूप में डॉ. सतीश पूनियां का 14 सितंबर को एक साल पूरा हो चुका है। इस एक साल में पूनियां के समक्ष कई चुनौतियां आई और उन्होंन ज्यादातर का अच्छे तरीके से सामना भी किया। लेकिन सबसे बड़ी चुनौती पार्टी को गुटबाजी से दूर करते हुए एकजुट रखना था, लेकिन इसमें वो सफल होते नहीं दिख रहे हैं। पार्टी का एक धड़ा आज भी पूनियां से नाराज है और इस धड़े की नाराजगी चलते ही पिछले दिनों राजस्थान के सियासी संग्राम में भाजपा फेल हो गई।

पूनियां के लिए सबसे बड़ी टास्क प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा करना था। इस घोषणा को पूरा करने में पूनियां को करीब 11 महीने का वक्त लग गया। इसके बाद भी कार्यकारिणी में पार्टी के कुछ नेताओं की अनदेखी साफ नजर आई। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी शामिल हैं। राजे और पूनियां के बीच अदावत लंबे समय से चल रही है। पार्टी के ज्यादातर कार्यक्रमों से उनकी दूरी इस अदावत के जगजाहिर भी कर चुकी है।

इसी तरह पूनियां ने कैसे—जैसे प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा तो कर दी, लेकिन अभी तक प्रदेश कार्यसमिति, मोर्चा और प्रकल्पों की घोषणा करना बाकी है। इनकी घोषणा में सभी को खुश रखने के चक्कर में देरी हो रही है। यही वजह है कि मामले को लेकर कई नेता मुखर भी हो रहे हैं। यही वजह है कि अब राजस्थान में प्रदेश कार्यसमिति, मोर्चा और प्रकल्पों की घोषणा केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी के बाद ही हो पाएगी।

कांग्रेस की फूट का नहीं उठा पाए लाभ

राजस्थान में पिछले दिनों सियासी संग्राम चला था। सरकार गिरने का खतरा पैदा हो गया था, लेकिन इस सुनहरी मौके को पूनियां नहीं भुना पाए। उलटे पार्टी की गुटबाजी भी खुलकर सामने आ गई। कई नेता पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का अनदेखा करने के आरोप भी लगाते रहे। नतीजा पाायलट गुट वापस सरकार में लौट आया और सियासी संकट खत्म हो गया।

कोरोना काल में कमाल का काम

कोरोना काल के दौरान भाजपा ने सामाजिक सरोकार का जबर्दस्त काम किया। लाखों लोगों को भोजन के पैकेट और कच्चा राशन उपलब्ध कराने के साथ ही प्रवासियों को उनके घर तक पहुंचाने में भाजपा कार्यकर्ता जुटे रहे। इसे लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा टीम राजस्थान की तारीफ भी की।

चुनौतियां अब भी कम नहीं

आने वाले दिनों में भी पूनियां के समक्ष चुनौतियां कम नहीं हैं। पंचायत और निकाय चुनाव में भाजपा को जीत दिलाने के साथ ही सभी नेताओं को एकजुट रखने की चुनौती पूनियां के समक्ष है। इसके अलावा 2023 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी किस तरह खुद को पेश करेगी, यह भी देखने लायक है।

Umesh Sharma Reporting
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