कीमतों में उछाल से इस खेती में बढ़ा किसानों का रुझान

Onion Price : बाजार में बढ़ी कीमतों ने एक बार फिर से प्याज को किसानों की पसंद बना दिया है।

By: Ashish

Published: 03 Jan 2020, 03:57 PM IST

जयपुर

Onion price : बाजार में बढ़ी कीमतों ने एक बार फिर से प्याज को किसानों की पसंद बना दिया है। पिछले कई महीनों से प्याज के दामों में सामान्य कीमतों की तुलना में बनी हुई बढ़ोतरी के बाद किसान प्याज की खेती का एरिया बढ़ाने में जुटे हुए हैं। किसानों को उम्मीद है कि प्याज उन्हें अच्छा फायदा देगी। प्याज के अच्छे खासे दाम को देखते हुए काफी किसानों ने प्याज का रकबा बढ़ा दिया है। दरअसल, 2019 में प्याज के दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी देखने को मिली। भारत ही नहीं पड़ौसी देशों में भी प्याज के दाम सामान्य से कई गुना बढ़ गए। भारत में कई स्थानों पर रिटेल में प्याज 80 से 100 रुपए किलो तक बिना। ऐसे में प्याज के कीमतों को देखते हुए किसानों ने अपना रुख प्याज की खेती की ओर तेजी से बढ़ा दिया है। धान की कटाई-मढ़ाई के बाद खाली हुए खेत में गेहूं के अलावा प्याज की रोपाई करने में किसान जुटे हुए हैं। किसान रबी सीजन की फसलों के साथ ही प्याज की खेती में रुचि ले रहे हैं। सिचाई की माकूल व्यवस्था कर किसान प्याज की खेती का एरिया भी बढ़ा रहे हैं। पहले जो किसान बिस्वा, दो बिस्वा में प्याज की खेती करते थे, उन्होंने अब प्याज का रकबा बढ़ा दिया है। अब काफी किसान कई बीघा में प्याज की खेती कर रहे हैं।

रोपाई में जुटे किसान
आपको बता दें कि प्याज की नर्सरी तैयार कर चुके किसान इन दिनों रोपाई कार्य में जुट गए हैं। सितंबर, अक्टूबर माह में बीज डाल चुके किसानों की नर्सरी पूरी तरह तैयार हो चुकी है। रोपाई के लिए खेत भी खाली हो चुके हैं। ऐसे में खेतों की कुड़ाई, निराई कर क्यारी बनाकर रोपाई करने में मध्यमवर्गीय, गरीब किसान पूरे मनोयोग से लग गए हैं। इसके पीछे मुख्य वजह प्याज की कीमत में बना हुआ उछाल है। किसानों को उम्मीद है कि अगर प्याज के दामों में सामान्य से थोड़ी भी बढ़ोतरी अगर बनी रही तो प्याज उनके लिए फायदे का सौदा साबित हो जाएगा।
इसलिए भी फायदेमंद
आपको बता दें कि पिछले साल प्याज की बढ़ी कीमतों ने सरकार की नाक में दम कर दिया। भारत को प्याज का निर्यात रोकना पड़ा। वहीं बांग्लादेश को दूसरे देशों से प्याज आयात करना पड़ा। इन स्थितियों के बीच किसानों के एक तबके की नजर प्याज की खेती की ओर है। किसानों का कहना है कि जंगली शूकर सहित अन्य वन्य जीव प्याज को निवाला नहीं बनाते। प्याज की अपेक्षा गेहूं, चना व अन्य दलहनी, तिलहनी फसलों को जंगली जीव निवाला बना ले रहे हैं। इससे यह खेती घाटे का सौदा साबित हो रही थी। प्याज के खेत को सिर्फ दो-तीन बार कुड़ाई व सिचाई करने के बाद यह पूरी तरह तैयार हो जाता है। मार्च, अप्रैल माह में तैयार हो जाने वाली प्याज की फसल को आसानी से बेचकर नगदी प्राप्त कर लेते हैं।

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