कार्टिस्ट की ओर से होगी 50 पेंटिंग्स की ऑनलाइन नीलामी, राशि को PM केयर्स फंड में किया जाएगा डोनेट

वर्ल्ड हेरिटेज डे के दिन कार्टिस्ट की ओर से ऑटोमोबाइल व आर्ट के संयोजन के सफर की शुरूआत की गई थी। आज इसी दिन कार्टिस्ट के संस्थापक हिमांशु जांगिड़ ने इन मुश्किल दौर में देश के प्रति अपनी एकजुटता दिखाने के लिए पीएम केयर्स फंड में अपनी 50 पेंटिंग्स की राशि देने का फैसला किया है।

By: abdul bari

Updated: 23 Apr 2020, 12:40 AM IST

इमरान शेख/जयपुर
वर्ल्ड हेरिटेज डे के दिन कार्टिस्ट की ओर से ऑटोमोबाइल व आर्ट के संयोजन के सफर की शुरूआत की गई थी। आज इसी दिन कार्टिस्ट के संस्थापक हिमांशु जांगिड़ ने इन मुश्किल दौर में देश के प्रति अपनी एकजुटता दिखाने के लिए पीएम केयर्स फंड में अपनी 50 पेंटिंग्स की राशि देने का फैसला किया है। कार्टिस्ट की ओर से 9 मई, 2020 को इन पेंटिंग्स की 24 घंटे की ऑनलाइन नीलामी की जाएगी। इनकी बिक्री से आने वाला पूरा पैसा कोविड-19 से लड़ाई के लिए 'कार्टिस्ट अगेन्स्ट कोविड-19' के तहत पीएम केयर्स फंड में डोनेट किया जाएगा।

वहीं दूसरी ओर युवा कलाकारों को समर्थन प्रदान करने के लिए कार्टिस्ट की ओर से इन कलाकारों की बनाई गई पेंटिंग्स व अन्य कलाकृतियों की ऑनलाइन एग्जीबिशन लगाई जाएगी और इनकी ऑनलाइन बिक्री भी की जाएगी। इससे प्राप्त होने वाले पैसे को सीधे इन कलाकारों के अकाउंट में ट्रांसफर किया जाएगा, ताकि इस कठिन समय में उन्हें आर्थिक मदद मिल सके।

हिमांशु जांगिड़ ने बताया कि कारों का नवीनीकरण के दौरान ही मुझे शाही महलों व औद्योगिक घरानों की दीवारों पर अपनी गहरी टिप्पणियों के जरिए कला से रूबरू होने का मौका मिला, जो मुझे यह काफी पसंद आया। एक मध्यमवर्गीय परिवार से होने की वजह से मुझे कला के बारे में ज्यादा जानने का अवसर नहीं मिला और मुझे स्कूल व कॉलेज में भी इसका अनुभव करने का मौका नहीं मिला।

मैं खुशकिस्मत था कि मैं जयपुर व राजस्थान के आसपास के कुछ युवा कलाकारों के संपर्क में था। मैंने उनसे कहा कि मैं अपना एक छोटा का आर्ट कलेक्शन बनाना चाहता हूं। धीरे-धीरे मुझे एहसास हुआ कि इन कलाकारों की आजीविका मेरे द्वारा खरीदी गई उनकी कलाकृतियों से होने वाली उनकी आय पर निर्भर थी। मैं इन कलाकारों को निरंतर समर्थन प्रदान करने के लिए अपनी दृष्टि को और व्यापक बनाना चाहता था। वह दौर जयपुर में कार्टिस्ट फेस्टिवल की शुरूआत का समय था, जिसने इन युवा कलाकारों को अपनी प्रतिभा दर्शाने और ऑटोमोबाइल की दुनिया में कलात्मक शुरुआत करने का एक मंच प्रदान किया।

निम्न कलाकारों की कलाकृतियां ऑनलाइन नीलामी -

राम कुमार - किशनगढ़, अजमेर के एक छोटे से गांव के स्व-शिक्षित कलाकार पहले घर की देखभाल का कार्य करते थे। उन्हें शायद ईश्वर की ओर से वरदान था कि उनकी बनाई कलाकृति शाही परिवारों व औद्योगिक घरानों में देखी जा सकती है। दुर्भाग्यवश अल्पायु में ही दिल का दौरा पड़ने से उनका असामयिक निधन हो गया। पीएम केयर्य फंड के लिए धन जुटाने के लिए नीलामी में उनकी चार कलाकृतियां शामिल की जाएंगी।

सुप्रिय शर्मा - इन्होंने राजस्थान स्कूल ऑफ़ आर्ट, जयपुर से कला की शिक्षा प्राप्त की। उनकी कलाकृतियों की विषयवस्तु रोजमर्रा के जीवन के उनके अनुभवों व राजस्थान के उनके स्वयं के ग्रामीण परिवेश के प्राकृतिक दृश्यों से प्रेरित है। उनकी कलाकृतियों में ग्रामीण संस्कृति व प्राकृतिक तत्वों का प्रत्यक्ष अहसास होता है। 2016 में उन्होंने अपनी अभिव्यक्ति को दर्शाने और यह बताने के लिए कुछ कलाकृतियां बनाईं कि वे ऑटोमोबाइल की दुनिया को किस नजरिए से देखते हैं। दुर्भाग्य से सुप्रिय अब हमारे बीच नहीं है, लेकिन वे हमेशा हमारी यादों में रहेंगे।

कोराना योद्धा का कलाकार बेटा तीर्थ -


20 वर्षीय युवा कलाकार तीर्थ पटेल कोविड-19 योद्धा के पुत्र हैं। उनकी मां अहमदाबाद के एक निजी अस्पताल में काम करती हैं और पिता एक कुशल बस बॉडी बिल्डर थे, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। तीर्थ अपने प्रारंभिक जीवन से ही कारों व मशीनों की ओर आकर्षित थे। वे अपने पिता के साथ बस बॉडी बिल्डिंग की दुकानों पर जाते थे और उन्होंनेे बस डिजाइन के विभिन्न रूप बनाने शुरू किए। हालांकि उनके लिए पैसे की हमेशा समस्या रहती थी, लेकिन डिजाइन में उनकी प्रतिभा को देखते हुए तीर्थ के चचेरे भाई ने अहमदाबाद के एक आर्ट कॉलेज में उनका एडमिशन करा दिया। उन्होंने सी. एन. कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट से फ्लाइंग कलर्स में ग्रेजुएशन पूरी की और वर्तमान में वे महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी ऑफ बड़ौदा से अपने मास्टर डिग्री कर रहे हैं। उनके काम की एक अनूठी शैली है, जहां वे बस के रूप में अपना विषय ढूंढते हैं। अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए वे एक माध्यम के रूप में बस का उपयोग करते हैं।

उनकी मां की अल्प आय को छोड़कर, अभी तक उनके परिवार के लिए आय का कोई अन्य स्त्रोत नहीं है। कोरोनो वायरस के प्रकोप के दौरान वे बड़ौदा स्थित अपनी यूनिवर्सिटी से वापस अहमदाबाद आ गए। वे करीब एक माह से अपने परिवार के साथ हैं। ऐसे में कोरोना योद्धा के बेटे की छोटी सी मदद उनका घर चलाने में सहायक साबित होगी। कार्टिस्ट द्वारा लगाई जा रही एग्जीबिशन में उनकी कृतियों को भी शामिल किया जा रहा है।

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