ऑनलाइन शिक्षा ही उच्च शिक्षा की निरन्तरता का एकमात्र विकल्प

Governor Kalraj Mishra : राज्यपाल एवं कुलाधिपति कलराज मिश्र ने कहा कि कोविड-19 जैसी विपदा के वर्तमान परिपेक्ष्य में उच्च शिक्षा की निरंतरता को बनाये रखना एक चुनौती है।

By: Ashish

Published: 18 Apr 2020, 06:26 PM IST

जयपुर

Governor Kalraj Mishra : राज्यपाल एवं कुलाधिपति कलराज मिश्र ने कहा कि कोविड-19 जैसी विपदा के वर्तमान परिपेक्ष्य में उच्च शिक्षा की निरंतरता को बनाये रखना एक चुनौती है। उच्च शिक्षा की निरंतरता को बनाए रखने के लिए ऑनलाइन शिक्षा ही एकमात्र विकल्प सभी के सामने उभर कर आया है। राज्यपाल ने कहा कि ‘मेरा सारा ध्यान उन सामान्य विद्यार्थी पर है, जो राज्य के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र में रहते हैं और इस आपदा के काल में शिक्षा से वंचित हैं।‘ राज्यपाल ने कहा कि ऐसे छात्र-छात्राओं तक कैसे शिक्षा पहुॅचे, जिसके पास लेपटाॅप जैसी सुविधा नहीं है, यह विचारणीय है। मिश्र ने कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए दस सदस्यों की एक टास्कफोर्स का गठन किया है। यह टास्कफोर्स उच्च शिक्षा की ऐसी ही चुनौतियों पर मंथन कर राजभवन को सुझाव भेजेगी।

राज्यपाल मिश्र ने शनिवार को एसोसिएटेड चैम्बर्स ऑफ कामर्स एण्ड इण्डस्ट्री ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित वेबीनार को सम्बोधित किया। राज्यपाल के इस सम्बोधन को देश के विभिन्न भागों से जुड़े लगभग बारह हजार लोगों ने सुना। राज्यपाल ने कहा कि कोविड-19 ने उच्च शिक्षा को प्रसारित करने के तरीके में परिवर्तन किया है, जिसके फलस्वरूप विश्वविद्यालयों को तेजी से बदलना होगा। उन्होंने कहा कि‘‘राज्य में भी कोविड-19 के कारण हमारे लगभग 28 लाख छात्र-छात्राओं को किसी प्रकार की परेशानी या अकादमिक हानि नहीं हो और महामारी के चलते विश्वविद्यालयों में शिक्षण, प्रशिक्षण, सैद्वान्तिक एवं प्रायोगिक परीक्षायें किस प्रकार से आयोजित की जाए, इसको देखते हुए टास्कफोर्स का गठन किया गया हैं।

राज्यपाल ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालयों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वे बाधा रहित बिजली एवं इन्टरनेट सप्लाई को कैसे जारी रख सकेंगे। छात्र-छात्राओं को कम से कम खर्च में इन्टरनेट डेटा उपलब्ध कैसे होगा। उन्होंने कहा कि ‘‘समय है यह सोचने एवं तैयार रहने का है कि विश्वविद्यालय आगामी सत्र में उन छात्र-छात्राओें को किस प्रकार से प्रवेश दे पायेंगे, जो अब तक या तो विदेश में पढ़ रहे थे या विदेश जाने की तैयारी में थे, साथ ही विश्वविद्यालय को उन सभी विद्यार्थियों को भी प्रवेश देना होगा जो इटली, स्पेन, जर्मनी, इग्लैण्ड, आदि देशों से भारत आकर पढ़ना चाहेगे।‘‘

नए प्रयोग करने की जरूरत
नेशनल ऑफ बोर्ड ऑफ एक्रीडेशन के अध्यक्ष प्रो. के.के. अग्रवाल ने कहा कि अब मोबाइल से स्वास्थ्य और शिक्षा को जोड़ना ही होगा। एसोचेम के अध्यक्ष डाॅ. निरंजन हीरानन्दानी ने कहा कि उच्च शिक्षा में परिवर्तन लाना एक बड़ी चुनौती है। एसोचेम के उपाध्यक्ष कुंवर शेखर विजेन्द्र के कहा कि इस बीमारी को विश्व मुसीबत के तौर पर देख रहा है। इस विपदा में हमें नए प्रयोग करने होंगे। वेबीनार में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के इनोवेशन सैल के निदेशक डाॅ. मोहित गम्भीर और डाॅ. अमरेन्द्र पानी भी मौजूद थे। वेबीनार में एसोचेम के महासचिव दीपक सूद ने स्वागत भाषण और डाॅ. प्रशान्त भल्ला ने भी अपनी बात रखी।

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