मंदिरों में जाए बिना ही दिल खोलकर करें दान, शुरू हुई ये सुविधा

Savita Vyas

Updated: 11 Oct 2019, 03:34:59 PM (IST)

Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

जयपुर। बदलते समय में अब भक्त भी हाईटेक हो गए है। अब ई—भुगतान से भक्त अपने आराध्य को भेंट चढ़ा रहे हैं। जयपुर के मदनमोहन और खोले के हनुमानजी मंदिर में अब ऑनलाइन दान दिया जा रहा है। पिछले साल प्रदेश के देवताओं और मंदिरों के लिए देवस्थान विभाग की ओर से शुरू की गई ई-भुगतान व्यवस्था अब भक्तों को रास आ रही है। देवस्थान विभाग की वेबसाइट पर जाकर भक्त जब चाहें तब चंद मिनटों में इच्छानुसार राशि की भेंट चढ़ा सकते हैं। खास बात यह कि यह राशि सीधे भगवान के खाते में जाती है।

आपको बता दें विभाग की सूची में अभी प्रदेश के 24 प्रमुख मंदिर-तीर्थ स्थलों के अलावा 34 देवी-देवताओं को शामिल किया है। इनमें जयपुर के मदनमोहन और खोले के हनुमानजी मंदिर के लिए यह सुविधा दी गई है। एक साल में 361 भक्तों ने ई-भुगतान से भेंट अर्पित की है और अब तक एक लाख से अधिक की राशि ई-पेमेंट से की गई है।

ई-भुगतान से भेंट पाने में अभी तक मेहंदीपुर बालाजी सबसे अव्वल है। इस महीने 34 में से 16 भक्तों ने बालाजी को भेंट चढ़ाई है। यहां ई-भुगतान से भक्त एक से लेकर 22 हजार रुपए तक की राशि भेंट चढ़ा रहे है।

इसके अलावा भरतपुर के बिहारीजी, बीकानेर के लक्ष्मीनारायणजी, बूंदी के केशवरायजी, हनुमानगढ़ के गोगाजी, झालावाड़ के पद्मनाथ जी, राजसमंद के गढ़बोर चारभुजाजी, टोंक के डिग्गी कल्याण जी, दौसा के मेहंदीपुर बालाजी, जैसलमेर के रामदेवरा, चूरू के सालासर बालाजी, अजमेर के पुष्करजी, चित्तौडगढ़ के सांवलिया जी, बांसवाड़ा की त्रिपुरा सुंदरी, सीकर के खाटू श्यामजी, उदयपुर के एकलिंग जी, सवाईमाधोपुर के चौथ माता, चौथ का बरवाड़ा, डूंगरपुर के बेणेश्वरधाम, विविध मंदिर में ऑनलाइन दान की सुविधा है।

ऑनलाइन भुगतान के समय भक्त को दान देने का व्यक्तिगत उद्देश्य और मंदिर संबंधी दान का प्रयोजन बताना होता है। उद्देश्य जहां दान कर रहे भक्त से जुड़ा होता है, वहीं प्रयोजन धर्मार्थ और पुण्यार्थ होता है। इससे भेंट सही प्रयोजन में ही खर्च होती है। इस सिस्टम से भक्त और मंदिर दोनों को ही फायदा पहुंच रहा है।

वेबसाइट पर दान के उद्देश्य के कॉलम में 17 व्यक्गित कारणों का उल्लेख किया गया है। इनमें तन-मन-धन का संवर्धन, स्वास्थ्य, सफलता, समृद्धि, प्रसिद्धि, प्रीति, मुक्ति, संतति, ग्रहशांति, सौहार्द, गुण अर्जन, सुरक्षा, विकास, पूर्वज-परिजन स्मृति, मांगलिक उत्सव, मनोकामना पूर्ति, विवध में से किसी एक को चुन सकते हैं। मंदिरों में दान का उपयोग करने के लिए 12 धर्मार्थ-पुण्यार्थ प्रयोजनों का विकल्प भी दिया गया है। इसमें आरती, भोगराग-शृंगार, विकास-निर्माण, वृक्षारोपण, पक्षियों के लिए दाना, गायों के लिए चारा, गरीबों के लिए भोजन वस्त्र, चिकित्सा सहायता, प्राणियों के लिए सेवा, आजीविका-पुनर्वास, मानव सेवा, विविध में से किसी एक को चुना जा सकता है।

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