बड़े उद्योग तो चल पड़े, छोटों पर मार आज भी बरकरार

— कोरोना से पहले की तुलना में अब तक शुरु हुईं सिर्फ 32 प्रतिशत इकाई, सरकारी कदमों का लाभ अभी तक जमीन पर नहीं दिखा

By: Pankaj Chaturvedi

Published: 30 Jun 2020, 09:18 PM IST

पंकज चतुर्वेदी

जयपुर. कोरोना काल में बदहाल आर्थिक स्थिति से जूझ रहे प्रदेश के छोटे उद्योग तीन माह बाद भी अपने पैरों पर खड़े नहीं हो पा रहे हैं। राज्य में वृहद स्तर के उद्योगों में तो उत्पादन का पहिया फिर भी धीरे—धीरे संतोषजनक स्थिति तक पहुंचा, लेकिन सूक्ष्म, लधु और मंझोले उद्योगों (एमएसएमई) पर आज भी लॉकडाउन की मार बरकरार है।
खासतौर पर विनिर्माण क्षेत्र की बात करें तो कोरोना से पहले की स्थिति की तुलना में महज 32 प्रतिशत इकाइयां ही शुरु हो पाई हैं। सरकार ने इनकी हालात सुधारने के कदम तो उठाएं हैं, लेकिन अफसरशाही के कागजों से निकल कर यह लाभ वास्तविकता में इकाइयों को अभी नहीं मिल पाया है।
इधर, विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार मांग घटना एक कारण हो सकता है, लेकिन सरकारों को इन इकाइयों की वित्तीय हालात सुधारने के निर्णयों को जल्द अमलीजामा पहनाना चाहिए।एमएसएमई के बकाया भुगतान अभी नहीं हो पा रहे, केन्द्र और राज्य के पैकेज का लाभ भी निचले स्तर की इकाइयों तक कम पहुंच पा रहा है।

55 हजार ही अब तक शुरू

उद्योग आयुक्तालय की ताजा रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में कोरोना लॉकडाउन के बाद अब तक महज 55 हजार विनिर्माण इकाइयां ही शुरू हो पाई हैं। कोरोना से पहले इस वर्ष जनवरी में 1.76 लाख इकाइयां उत्पादन कर रही थीं, लेकिन 25 जून की स्थिति में यह आंकड़ा सिर्फ 55 हजार तक ही पहुंच पाया है।

4.22 लाख को मिला रोजगार

लॉकडाउन में शुरु हुई विनिर्माण इकाइयों में अब 4.22 लाख से अधिक श्रमिकों को रोजगार मिलने लगा है। हालांकि सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों के चलते अभी यह संख्या तुलनात्मक तौर पर बहुत कम है। जनवरी में कुल नियोजित श्रमिकों की संख्या 14.14 लाख थी।

सीएम ने जताई चिंता

संयुक् राष्ट्र एमएसएमई दिवस के मौके पर शुक्रवार को स्वयं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस श्रेणी की इकाइयों के हालात पर चिंता जाहिर की है। गहलोत ने कहा कि लॉकडाउन का सर्वाधिक असर एमएसएमई पर पड़ा है। सीएम ने इस क्षेत्र को मजबूती के प्रयासों में नयापन लाने की जरूरत जताई।

इनका कहना है...

बाजार में मांग की कमी और इकाइयों को नए आॅर्डर नहीं मिलना एमएसएमई की कमजोर स्थिति के कारण हैं। सरकार पूरे प्रयास कर रही हैं, लोन वितरण में भी राजस्थान तीसरे नंबर पर है। श्रमिक समस्या पर भी हमने कदम उठाए हैं।

मुक्तानंद अग्रवाल, उद्योग आयुक्त

छोटे उद्योगों के आर्थिक हालात बेहद खराब हैं। इसे सुधारने के लिए जरूरी है कि लोन वितरण और एमएसएमई के बकाया भुगतान की ट्रेकिंग कर प्रकिया में गति लाई जाए। सरकार को आधारभूत ढ़ांचे पर खर्च बढ़ाना चाहिए, ताकि मांग पैदा की जा सके।
नितिन गुप्ता, निदेशक— सीआईआई राजस्थान

एमएसएमई

1 जनवरी को संचालित कुल एमएसएमई— 176216
25 जून को संचालित कुल एमएसएमई— 55805
प्रतिशत— 32

वृहद उद्योग

1 जनवरी को संचालित कुल वृहद इकाईयां— 547
25 जून को संचालित कुल वृहद इकाइयां— 456
प्रतिशत— 83.36

प्रदेश में एमएसएमई के हालात

जिला.... 1 जनवरी को संचालित ... 25 जून को संचालित ...वर्तमान श्रमिक संख्या
अजमेर...9921...2467...16795
अलवर...4552...1020...7815
बांसवाड़ा...1841...504...1750
बांरा...2056...1285...7419
बाड़मेर...7550...567...6113
भरतपुर...3607...1809...10141
भीलवाड़ा...6546...2259...18731
भिवाड़ी...3852...1480...60751
बीकानेर...8253...1417...9499
बूंदी...2134....499...1653
चित्तौड़गढ़...2548...289...2165
चूरू...3226...1245...4220
दौसा...1358...464...1313
धौलपुर...1380...585...3439
डूंगरपुर...1296...282...1198
हनुमानगढ़...1249...481...2219
जयपुर...51006...24864...112497
जैसलमेर...813...106...487
जालौर...2244...310...1521
झालावाड़...1144...418...1988
झुंझूनूं...2885...625...4203
जोधपुर...13639...1018...7977
करौली...3069...2376....8656
कोटा...6050...969...6694
नागौर...5283...475...4278
पाली...7185...728...5510
फलौदी...739...140...427
प्रतापगढ़...716...170...613
राजसमंद...1390...453...2026
सवाईमाधोपुर...1064...244...912
सीकर...2165...906...5094
सिरोही...2180...315...1475
श्रीगंगानगर...1400...755...8388
टोंक...1650...840...5552
उदयपुर...10225...3450...9507

Pankaj Chaturvedi
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