यात्री के खोए सामान की कीमत के साथ 32 हजार रुपए हर्जाना चुकाने के आदेश

ट्रेन को बीच रास्ते में रद्द करने से यात्री का खोया था सामान

जयपुर।

ट्रेन को बीच रास्ते में रद्द करने के बाद यात्री के वैकल्पिक इंतजाम नहीं करने का उपभोक्ता मंच ने सेवादोष करार दिया। उपभोक्ता मंच ट्रेन बदलने की गफलत में खोए सामान के लिए भी रेल्वे को दोषी करार दिया है। मंच ने रेल्वे को खोए सामान की कीमत नौ फीसदी ब्याज सहित चुकाने के आदेश दिए। इसी के साथ कुल 32 हजार रुपए भी रेलवे को देने होंगे।

गांधी नगर जयपुर निवासी डॉ बृजभूषण शर्मा ने 15 जून को जयपुर से मुरैना जाने के लिए तीन टिकट बुक करवाए। रेलवे ने आगरा कैंट तक पहुंचने के बाद ट्रेन को आगे के लिए रद्द कर दिया और सभी यात्रियों को उतार दिया। काफी मान मनोव्वल करने के बाद रेल्वे ने पुराने टिकट पर अगली ट्रेन में यात्रा करने की अनुमति दे दी। इस दौरान शर्मा का एक बैग भी चोरी हो गया। जिसमें सोने चांदी के जेवरात सहित कुल 49 हजार रुपए का सामान बताया गया। इसकी रिपोर्ट भी शर्मा ने पुलिस थाने में करवाई और रेलवे को क्षतिपूर्ति करने के लिए पत्र लिखा। रेलवे के सुनवाई नहीं करने पर शर्मा ने जिला उपभोक्ता मंच में परिवाद दायर किया। जिसके जवाब में रेलवे ने कहा कि गुर्जर आंदोलन की वजह से ट्रेन लेट हो गई थी और उसे रदद करना पड़ा। यात्री को अगली ट्रेन में यात्रा की अनुमति दी गइ थी। नियमानुसार यात्री को अपने सामान की सुरक्षा खुद करनी होती है। सामान चोरी होने या खोने के लिए रेलवे जिम्मेदार नही है। मंच के अध्यक्ष जैनेंद्र कुमार जैन एवं सदस्यों ने अचानक ट्रेन रद्द करने के बाद वैकल्पिक इंतजाम नहीं करने को सेवा दोष करार दिया। उपभोक्ता के सामान चोरी होने से मानसिक कष्ट हुआ और परेशानी का सामना करना पड़ा। मंच ने रेलवे को चोरी हुए सामान की कीमत 49 हजार रुपए मय नौ फीसदी ब्याज सहित देने के आदेश दिए। इसी के साथ मानसिक संताप के लिए 21 हजार रुपए और परिवाद व्यय के 11 हजार रुपए देने को कहा है।

KAMLESH AGARWAL Desk
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