कांग्रेस आलाकमान की रणनीति में बदलाव, राजस्थान में मंत्रिमंडल से पहले होगा संगठन विस्तार

जिलाध्यक्षों, प्रदेश कार्यकारिणी और कार्यकारी अध्यक्षों की होगी घोषणा, नवरात्र के बाद संगठन विस्तार होने के संकेत, संगठन विस्तार नहीं होने से प्रदेश कांग्रेस का जिलों में कामकाज ठप

By: firoz shaifi

Published: 20 Sep 2021, 07:51 PM IST

फिरोज सैफी/जयपुर।

जयपुर। छत्तीसगढ़ और पंजाब में सफल प्रयोग करने के बाद अब कांग्रेस आलाकमान ने अपना पूरा फोकस राजस्थान पर कर लिया है। जहां कांग्रेस आलाकमान आने वाले दिनों में मंत्रिमंडल फेरबदल विस्तार जैसे कामों का अंजाम देंगे लेकिन इसी बीच कांग्रेस आलाकमान ने अपनी रणनीति में थोड़ा बदलाव किया है।

बदली हुई रणनीति के तहत अब मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल से पहले कांग्रेस आलाकमान का पूरा फोकस संगठन विस्तार पर है। संगठन विस्तार का भी पूरा रोडमैप कांग्रेस आलाकमान ने तैयार कर रखा है।

संगठन विस्तार को लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की प्रदेश प्रभारी अजय माकन से भी लंबी चर्चा हो चुकी है। नई रणनीति के तहत प्रदेश कार्यकारिणी का विस्तार,जिलाध्यक्षों की घोषणा और पीसीसी में कार्यकारी अध्यक्षों की घोषणा होगी। सूत्रों के मुताबिक नवरात्र के बाद संगठन विस्तार हो सकता है।

42 जिलाध्यक्षों और चार कार्यकारी अध्यक्षों पर हो चुका है मंथन

पार्टी के रणनीतिकारों की मानें तो प्रदेश कांग्रेस के 42 जिला अध्यक्ष और चार कार्यकारी अध्यक्षों के नामों को लेकर आलाकमान के स्तर पर फाइनल मंथन हो चुका है।

हालांकि प्रदेश कांग्रेस में फिलहाल 39 ही जिलाध्यक्ष हैं लेकिन जयपुर, जोधपुर और कोटा में दो नगर निगम बनने के चलते यहां भी दो अध्यक्ष बनाए जाएंगे।

इसके अलावा प्रदेश कार्यकारिणी का विस्तार भी किया जाएगा।जिसमें दो दर्जन पदाधिकारियों का इजाफा होगा, इसमें वरिष्ठ उपाध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महामंत्री सचिव और प्रवक्ताओं के भी नाम है।

इसलिए किया रणनीति में बदलाव
दरअसल मंत्रिमंडल फेरबदल और विस्तार से पहले संगठन विस्तार करने की रणनीति में बदलाव की वजह यह है कि प्रदेश कांग्रेस ने विधानसभा उपचुनाव, पंचायतों और नगर निगम के चुनाव जिलों में बिना संगठन के लड़े हैं, जिससे कई जगह पार्टी को अपने ही कार्यकर्ताओं का साथ नहीं मिल पाया।

वही आने वाले दिनों में 2 सीट पर विधानसभा के उपचुनाव भी होने हैं। साथ ही विधानसभा चुनाव 2023 की तैयारी अभी से पार्टी को शुरू करनी पड़ेगी। जिसके लिए सबसे जरूरी संगठन विस्तार और संगठन का मजबूत होना है।

यही वजह है कि अब आलाकमान की मंशा पहले संगठन विस्तार करना है, संगठन विस्तार के बाद ही मंत्रिमंडल फेरबदल और विस्तार होगा और राजनीतिक नियुक्तियां भी होंगी।

जिलों में 13 माह से भंग संगठन

बीते साल जुलाई माह में सचिन पायलट कैंप के बगावत करने के बाद कांग्रेस आलाकमान ने प्रदेश के सभी जिलो के संगठन, प्रदेश कार्यकारिणी, विभाग और प्रकोष्ठों को भंग कर दिया था।

हालांकि तकरीबन 6 माह के बाद एक 39 सदस्यीय प्रदेश कार्यकारिणी तो बनाई गई थी लेकिन जिला अध्यक्षों, ब्लॉकध्यक्षों और विभाग प्रकोष्ठ अभी भी भंग पड़े हैं। जिसके चलते जिलों और प्रदेश लेवल पर संगठन के कामकाज प्रभावित हो रहे हैं।




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