अपनी ही मौत को पिलाता रहा दूध, अब परिवार हो गया अनाथ, दर्दनाक घटना

अपनी ही मौत को पिलाता रहा दूध, अब परिवार हो गया अनाथ, दर्दनाक घटना

Dinesh Saini | Updated: 15 Aug 2017, 05:17:00 PM (IST) jaipur, rajasthan, india

पिल्ले पर न्योछावर किए प्रेम की कीमत ३७ वर्षीय नरपत सिंह को जान देकर चुकानी पड़ी...

केआर मुंडियार/कमलेश दवे

बासनी/धुंधाड़ा (जोधपुर)। कहा भी जाता है कि मौत बहाने ढूंढती है। ऐसी ही कुछ घटना देखने को मिली जोधपुर के एक गांव में। जहां एक व्यक्ति अपनी ही मौत को पालता रहा। जिसके बाद एक दिन ऐसा आया कि वही उस पालनहार का काल बन गया। जोधपुर जिले की झंवर ग्राम पंचायत की राडों की ढाणी में रहने वाले नरपत सिंह के साथ भी एेसा ही हुआ। एक श्वान की मौत के बाद उसके दो पिल्लों को पाल-पोसकर बड़ा करना नरपत सिंह के लिए जानलेवा बन गया। पिल्ले पर न्योछावर किए प्रेम की कीमत ३७ वर्षीय नरपत सिंह को जान देकर चुकानी पड़ी।

 

दरअसल हुआ ऐसा कि, जहां नरपत सिंह रहता था उसी गली में रेबीज संक्रमित एक कुतिया ने दो पिल्लों को जन्म दिया था। कुछ ही दिन बाद उस कुतिया की मौत हो गई। उसके नवजात पिल्ले भी रेबीज से संक्रमित हो गए थे। लेकिन रेबीज के खतरे से अनजान नरपत सिंह दोनों पिल्लों को अपने घर ले आया और दूध-रोटी खिलाने लगा। उनकी पूरी तरह से देखभाल करने लगा। दो माह पहले एक पिल्ले ने नरपत सिंह के हाथ पर काट लिया जिसके बाद में वह अस्पताल भी गया, लेकिन कुछ दिन बाद ही रेबीज से उसकी मौत हो गई।

 

अब कौन पालेगा परिवार
नरपत सिंह की पत्नी प्रेमकंवर का कहना है कि कामकाज के बाद उसके पति घर लौटते ही सबसे पहले उन पिल्लों की सुध लेते थे। प्रेमकंवर के अनुसार पति की मेहनत-मजदूरी से ही घर चल रहा था। परिवार में वृद्ध माता-पिता के अलावा पांच छोटी-छोटी बेटियां भी हैं। लेकिन परिवार में एक मात्र कमाने वाले सदस्य नरपत सिंह की अकाल मौत से पूरे परिवार की दशा दयनीय हो गई है। अब कमाने वाला भी कोई नहीं हैं। जिससे खाने के भी लाले पडऩे लगे है।

 

- साढ़े तीन साल में 18 लोगों की हाइड्रोफोबिया से मौत

- इतने लोगों को साढ़े तीन साल में हाइड्रोफोबिया-रेबीज से मौतें
वर्ष                 मरीज       मौत
2014              21            06
2015               11            03
2016               22           09
2017               07           00
(स्रोत: चिकित्सा विभाग)

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