गहलोत मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलों पर पंचायत चुनाव ने लगाया ब्रेक

-पंचायत चुनाव की अधिसूचना के चलते रुकी मंत्रिमंडल फेरबदल की कवायद, सियासी संकट से सरकार बचाने के साथ ही शुरू हुई थी मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चाएं

By: firoz shaifi

Updated: 18 Sep 2020, 07:12 PM IST

जयपुर। प्रदेश की गहलोत सरकार में लंबे समय से मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल का इंतजार कर रहे विधायकों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। पंचायत चुनाव की अधिसूचना से मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की चल रही अटकलों पर फिर से ब्रेक लग गया है।

मंत्रिमंडल में जगह पाने के लिए जयपुर से दिल्ली तक भागदौड़ कर चुके विधायकों को अब और इंतजार करना पड़ सकता है। पंचायत चुनाव की अधिसूचना 15 अक्टूबर तक जारी रहेगी, ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल उसके बाद ही हो सकता है।

सरकार बचाने के साथ ही शुरू हुई थी मंत्रिमंडल की कवायद
दरअसल सचिन पायलट गुट के सरकार से बगावत करने के बाद आए सियासी संकट के बीच विधानसभा में बहुमत परीक्षण के दौरान बहुमत साबित के बाद ही मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की कवायद शुरू हो गई थी। मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर सीएम गहलोत की केंद्रीय नेताओं के साथ चर्चा भी हो चुकी थी।

सरकार बचाने में अहम भूमिका निभाने वाले निर्दलीय, बसपा से कांग्रेस में आए विधायकों को मंत्रिमंडल के साथ-साथ संसदीय सचिव और राजनीतिक नियुक्तियों में एडजस्ट करने की बात कही जा रही थी।

मंत्रिमंडल में 8 स्थान रिक्त
नियमों के मुताबिक गहलोत मंत्रिमंडल में अधिकतम 30 मंत्री बनाए जा सकते हैं। गहलोत मंत्रिमंडल में अभी आठ स्थान रिक्त हैं। इनमें मंत्रिमंडल से हटाए गए सचिन पायलट, विश्ववेंद्र सिंह और रमेश मीणा भी शामिल हैं।

इसके अलावा शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा और कैबिनेट मंत्री मास्टर भंवर लाल मेघवाल को भी मंत्रिमंडल से बाहर किया जा सकता है। शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी हैं ऐसे में उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर किया जा सकता है वहीं कैबिनेट मंत्री मास्टर भंवर लाल मेघवाल लंबे समय से अस्वस्थ हैं जिनका अस्पताल में उपचार चल रहा है।

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