आप बनाते हैं बच्चों पर दबाव!

आप बनाते हैं बच्चों पर दबाव!
आप बनाते हैं बच्चों पर दबाव!

Chand Mohammed Shekh | Updated: 06 Oct 2019, 01:32:19 PM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

पेरेंटिंग एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। कई पेरेंट्स परवरिश में कुछ गलतियां कर बैठते हैं। कई पेरेंट्स चाहे-अनचाहे अपने बच्चों पर दबाव बना देते हैं जो बच्चों के व्यक्तित्व विकास में बाधक होता है।

कमियां निकालते हैं
पेरेंट्स की हर वो आदत जिससे बच्चे पर दबाव बनता है, उससे बचा जाना चाहिए। पेरेंट्स को ध्यान रखना चाहिए कि वे हर वक्त अपने बच्चे को गलतियां ही नहीं बताते रहे। उनको इस बात पर गौर करना चाहिए कि बच्चे को लगातार उसकी गलतियां बताने से उस पर दबाव बनता है। कई पेरेंट्स इन बातों पर गौर नहीं कर पाते लेकिन कमियां निकालने की आदत के कारण बच्चे खुद पर बहुत बड़ा दबाव महसूस करते हैं। दबाव में रहने से बच्चों का व्यक्तित्व प्रभावित होने लगता है। वे अपने काम को लेकर आशंकित रहते हैं। उन्हें लगता है वे बेहतर कुछ नहीं कर पाते। उनमें नया कुछ करने का उत्साह कम होने लगता है। यह बच्चों के हित में नहीं होता है।

दूसरों से तुलना
अधिकतर घरों में देखा गया है कि माता-पिता हर छोटे बड़े काम में अपने बच्चों की अन्य बच्चों से तुलना कर उनकी प्रतिभा को कम आंकने लगते हैं। वे कहते हैं, तेरे साथी के इतने नंबर आए हैं तेरे उससे कम क्यों? वह इतना अच्छा खेल लेता है तू खेल में उससे कमजोर है। ऐसी कई बातें हैं जो माता-पिता अपने बच्चों से कहते हैं। लेकिन पेरेंट्स को सोचना चाहिए कि ये आदतें बच्चों पर काफी दबाव बना देती है। बच्चे खुद को दबाव में महसूस करते हैं। कई बार तो इस वजह से बच्चों में हीन भावना ग्रसित हो जाती है। ऐसे में पेरेंट्स को चाहिए कि वे बच्चों की तुलना कर उनमें हीन भावना पैदा नहीं करें, बल्कि बच्चों के काम की प्रशंसा कर उन्हें प्रोत्साहित करें।

कई एक्टिविटीज में शामिल
आजकल के माता-पिता अधिक महत्वाकांक्षी होते हैं। वे बच्चों से कई तरह की अपेक्षएं रखते हैं। यही वजह है कि वे चाहते हैं कि उनका बच्चा कई तरह के फील्ड का जानकार बनें। इसी सोच के चलते ज्यादातर माता-पिता अपने बच्चों को ढेर सारी गतिविधियों का हिस्सा बना देते हैं। यह भी देखने में आता है कि कई बार वो गतिविधियां बच्चों के बजाय अभिभावकों की रुचि की होती हैं। अधिक गतिविधियों में उलझा रहने के कारण बच्चों पर काफी दबाव बन जाता है। उसे खुद को साबित करना मुश्किल हो जाता है। इससे उसका व्यक्तित्व विकास बाधित होता है।

गुस्सा करते हैं!
कई पेरेंट्स अपने बच्चों की छोटी-छोटी आदतों पर भी गुस्सा होने लगते हैं। बच्चे उनकी अपेक्षा पर खरे नहीं उतरते तो उन पर क्रोध करने लगते हैं। पेरेंट्स केवल इसलिए ग़ुस्सा होते हैं, क्योंकि बच्चा उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता। पेरेंट्स की गुस्सा करने की इस आदत के कारण बच्चे पर दबाव बना रहता है और बच्चे दबाव महसूस करते हैं। छोटी-छोटी बात पर पैरेंट्स का गुस्सा उन पर बड़े दबाव का कारण बन जाता है। आप बच्चों को प्यार से समझाएं बजाय उन पर क्रोधित होने के।

उन्हें हौसला दें
पेरेंट्स को चाहिए कि वे अपने बच्चों की दिलचस्पी को ध्यान में रखते हुए उन्हें आगे बढ़ाएं। उन्हें अगर फुटबाल खेलने का शौक है तो आप उन्हें क्रिकेट खेलने के लिए नहीं कहें। इसी प्रकार बात-बात में इस तरह नहीं कहें कि ऐसा नहीं हुआ तो ऐसा हो जाएगा जैसे यह कहें कि तू इस तरह का रिजल्ट नहीं ला पाया तो कुछ नहीं कर पाएगा। इससे बच्चों पर दबाव बनता है। पेरेंट्स बच्चों को हौसला दें और कहें एक रास्ता बंद होने पर कई रास्ते खुलते हैं।

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