कोरोना से लड़ाई में पीएम मोदी और पत्रिका समूह के प्रधान संपादक कोठारी के बीच चर्चा

पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी के सुझाव सुनते ही प्रधानमंत्री ने तत्काल कहा कि गुलाबजी आज आपकी बातों को सुनकर एक बार फिर आपके पिताजी (स्वर्गीय कर्पूरचंद्र कुलिश) की याद आ गई। इस विषय पर उनके साथ मेरा बहुत लंबा संवाद हुआ था...

जयपुर। ऐसे समय में जबकि कोरोना की महामारी दुनियाभर में पैर पसार रही है, देश के प्रिंट मीडिया ने जन—जन को जागरूक करने और चेतना जगाने में प्रशंसनीय काम किया है। एक राष्ट्र के रूप में सीमित संसाधनों के बाद भी इस बीमारी से निबटने के लिए प्रिंट मीडिया का गांव—गांव तक फैला नेटवर्क मददगार साबित हुआ है। माइक्रो लेवल पर इस बीमारी से जुड़ी बातें और सावधानियां प्रिंट मीडिया के माध्यम से ही पहुंच सकी हैं। लोग आप पर भरोसा करते हैं। कोरोना के खिलाफ सोशल डिस्टेंसिंग के अभियान में समाचार पत्रों ने सराहनीय काम किया है।

राजस्थान, मप्र, छग से एकमात्र ‘पत्रिका’ के साथ ही अनुभव साझा
उक्त विचार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को देश के प्रिंट मीडिया समूह के प्रमुखों से साझा किए। उल्लेखनीय है कि राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ से एकमात्र ‘पत्रिका’ के साथ ही प्रधानमंत्री ने अनुभव साझा किए। संवाद कार्यक्रम के दौरान उन्होंने माना कि देश संकट के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में प्रशासन और आम आदमी के बीच प्रिंट मीडिया ने सेतु का काम किया है। समाचार पत्र सामान्य से सामान्य व्यक्ति को भी बीमारी के बारे में समझाने का काम कर रहे हैं। पीएम ने कहा कि समाचार पत्रों के स्थानीय पेजों को जनता पूरी गंभीरता से पढ़ती है। इन पेजों पर कोरोना से संबंधित जागरूकता के समाचार और भी ज्यादा आना चाहिए। इन्हीं पेजों की खबरों से पता चल पाता है कि कहां ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। इस दौरान पीएम मोदी ने माना कि समाचार पत्र भरोसे की विरासत के प्रतीक हैं। आज भी सामान्य आदमी किसी बात की प्रमाणिकता के लिए यही कहता है कि मैंने अमुक बात को समाचार पत्र में पढ़ा है।

पत्रकार, हॉकर सहित सभी की चिंता
समाचार पर बीमारी से जुड़ी कठिन बातें स्थानीय और सरल भाषा में लोगों को समझा सकते हैं। इस दौरान पीएम मोदी ने प्रिंट मीडिया से आग्रह किया कि वे देश में निराश का माहौल न बनने दें। सीमित संसाधनों के बावजूद आप देश के लिए बहुत कुछ कर रहे हैं। हमें भी पत्रकार, हॉकर सहित सभी की चिंता है। उन्होंने कहा कि भारत संभावनाओं का देश है। हम बेहतर स्थिति में रहेंगे।

जब बोले पीएम... मुझे आपके पिताजी की याद आ गई

चर्चा के दौरान पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी ने पीएम मोदी को बधाई दी और कहा कि उनके देश के साथ उनके संवाद से आत्मविश्वास का प्रवाह हुआ है। ऐसे प्राकृ तिक प्रकोप से लडऩे के लिए इसी तरह के नेतृत्व की जरूरत है। कोठारी ने कहा कि प्रेस तो हर आपका के दौरान एकजुट रहा है। आत्मबल ही चाहिए जो इस दौरान मददगार होता है। लोगों से बातचीत के दौरान अगर स्वास्थ्य मंत्री भी बात करें तो लोगों के बीच विश्वास का एक और बड़ा रास्ता हम खोल पाएंगे।

कोठारी ने कहा कि सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह भी है कि हम कुछ सप्ताह में इस बीमारी से बाहर भी आ गए तो पूरे देश को अपनी जीवन शैली में परिवर्तन करने होंगे, जोकि आपके ही सांस्कृतिक संबोधन से संभव है। जिस तरह से हमारे खाद्यान्न को केमिकल, फर्टिलाइजर ने विषाक्त बना दिया, वह हमारी इम्युनिटी को तोड़ रहा है। सिंथेटिक और इंजेक्शन से निकाला गया दूध बेहद खतरनाक है। हमें फिर से अपनी शिक्षा में भारतीय जीवन शैली को शामिल करना होगा कि कैसे वापस प्रकृति के साथ जीएं।

पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी के सुझाव सुनते ही प्रधानमंत्री ने तत्काल कहा कि गुलाबजी आज आपकी बातों को सुनकर एक बार फिर आपके पिताजी (स्वर्गीय कर्पूरचंद्र कुलिश) की याद आ गई। इस विषय पर उनके साथ मेरा बहुत लंबा संवाद हुआ था।

प्रिंट मीडिया का भरोसा बढ़ा
संवाद के दौरान तमिलनाडु के समाचार पत्र थाती के बालासुब्रमण्यम ने बताया कि इस महामारी के दौरान प्रिंट मीडिया किसी हेल्थ वर्कर की तरह काम कर रहा है। प्रिंट मीडिया और उसके पत्रकार जिस तरह से जनजागरूकता में जुटे हैं, उससे भरोसा बढ़ा हैै। हॉकर और प्रदेश के लोग पूरा सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि नए लोगों ने भी समाचार पत्र को खरीदना शुरू कर दिया है।

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