अपनी कमजोरी को बनाया ताकत और बन गए मिसाल, आज हैं चैम्पियन

Mridula Sharma

Updated: 07 Mar 2019, 12:01:19 PM (IST)

Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

देवेंद्र सिंह राठौड़/जयपुर. हौसले बुलंद हों तो फिर जिंदगी में कुछ भी मुश्किल नहीं रह जाता। शरीर की कोई भी कमी कभी सफलता के आड़े नहीं आती। इसलिए खुद को कभी कमजोर नहीं समझें बल्कि कमजोरियों को जीतना सीखें। ऐसा कर दिखाया उन दिव्यांगों ने, जो इन दिनों सवाई मान सिंह स्टेडियम में आयोजित राज्य स्तरीय पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता में खेलने के लिए आए हुए हैं। खिलाडिय़ों में शारीरिक कमी है, लेकिन वे आज पदक जीतकर अपना और अपने क्षेत्र का नाम रोशन कर रहे हैं। पत्रिका मिला ऐसे दिव्यांगों से-

पति—पत्नी की जोड़ी: कद साढ़े 3 फीट, जीत डाले दर्जन से अधिक पदक
गंगानगर जिले केबीरमाना गांव से आए दिव्यांग शीशपाल लिम्बा पत्नी निशा के साथ चैम्पियनशिप में खेल रहे है। निशा ने डिस्कस थ्रो में गोल्ड जबकि शीशपाल ने ब्रॉन्ज मैडल जीता है। राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी निशा ने बताया कि हम दोनों की हाइट साढ़े तीन फीट है, कई बार लोग हमें देखकर हंसते है। लेकिन हमने उसी को हथियार मान लिया है। शीशपाल भी प्रदेश स्तर मेें डिस्कस थ्रो में 6 पदक जीत चुके हैं। निशा आधा दर्जन से अधिक पदक जीत चुकी है। शीशपाल प्रशासनिक परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं और पत्नी को अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी के रूप में पहचान दिलाना चाहते है।

 

बचपन से पोलियो ग्रस्त, लेकिन संदीप ने नहीं हारी हिम्मत
झुंझुनूं जिले के सुलताना से आए पैरा एथलेटिक खिलाड़ी संदीप सिंह जकार्ता में आयोजित चैंपियनशिप में भारतीय फुटबॉल टीम से खेल चुके है। संदीप को बचपन से पोलियो है। उनका कमर के नीचे का हिस्सा काम नहीं करता। अपने हौसले की ताकत पर उन्होंने 1994 से अब तक 40 से अधिक पदक जीते हैं। संदीप बताते हैं कि जब गांव में खेलता था, तो लोग परेशान करते थे। मेहनत के दम पर आगे बढ़ा और मुकाम हासिल किया तो वह खुद को आइकन समझने लगे हैं। उनका कहना है कि खेल के प्रति युवा जागरूक भी हुए हैं।

 

नेत्रहीन, पर दुनिया में पहचान बनाने का है विष्णु और सलमान का सपना
जोधपुर से आए विष्णु नेत्रहीन हैं लेकिन दुनिया में खुद की एक अलग पहचान बनाना चाहते है। वे प्रतियोगिता में दौड़ और ऊंची कूद में हिस्सा लेते हैं। पहली बार में ही उन्होंने दौड़ में स्वर्ण पदक जीता। उसके बाद इनके कदम आगे बढ़ते गए। हाल ही स्वर्ण पदक जीता है। विष्णु को मोबाइल खेलना भी पसंद है। वे सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं। साथी सलमान भी ब्लांइड हैं। वह भी नेशनल स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक जीत चुके हैं। इनका कहना हैं कि मजाक उड़ाने वालों को हमें देख आगे बढऩे के लिए सोचना चाहिए।

 

पोलियो, फिर भी शोभा ने डिस्कस थ्रो में जीते 6 पदक
दौसा से खेलने आई दोनों पैरों से दिव्यांग पैरा एथलेटिक खिलाड़ी शोभा शर्मा खड़े भी नहीं हो पाती है, लेकिन उसका हौसला उन्हें लगातार ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। वे डिस्कस थ्रो में छह पदक जीत चुकी है और खुद की क्रिकेट टीम बनाने जा रही है। वे खेल के साथ सामाजिक सेवा में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेती है। उसका कहना है कि दिव्यांग को कभी खुद को दिव्यांग नहीं समझना चाहिए। हम वो कर रहे हैं, जो एकदम स्वस्थ होकर भी कई लोग नहीं कर पाते। इसलिए हमसें प्रेरणा लेनी चाहिए।

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