इलेक्ट्रिक बसों पर फिर लगे अनुमति के ब्रेक

 

जिस दिन मंत्री बोले- भले ही 10 इलेक्ट्रिक बसें लाओ, ताकि बीकानेर हाउस शुरू हो, उसी दिन चेयरमैन ने टेंडर प्रक्रिया की रोक दी, बोले-बिना बोर्ड अनुमति एमडी ने किए टेंडर

Ankit Dhaka

February, 1405:59 PM

विजय शर्मा. जयपुर
जयपुर-दिल्ली रूट पर इसी महीने 10 इलेक्ट्रिक बसों को शुरू करने की परिवहन मंत्री की उम्मीदों पर रोडवेज ने ही पानी फेर दिया। रोडवेज चेयरमैन ने इलेक्ट्रिक बसों की टेंडर प्रक्रिया को अंतिम पड़ाव पर आकर रोक दिया है। ऐसे में रोडवेज के बेड़े में शामिल होने आ रहीं 50 इलेक्ट्रिक बसों पर ब्रेक लग गया है। रोडवेज के चेयरमैन ने टेंडर प्रक्रिया की नोटशीट पर इस संबंध में आदेश दिए। ऐसा होने से अब विभाग के मंत्री और अधिकारियों को आमने- सामने होते देखा जा रहा है। इसी के साथ उन हजारों यात्रियों को भी झटका लगा है, जो इलेक्ट्रिक बस चलने से बीकानेर हाउस शुरू होने का इंतजार कर रहे थे।
गौरतलब है कि सात फरवरी को परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने रोडवेज मुख्यालय में ही एक कार्यक्रम में सार्वजनिक रूप से अधिकारियों को जयपुर-दिल्ली रूट पर इलेक्ट्रिक बसें जल्द शुरू करने के निर्देश दिए थे। मंत्री ने दो दिन के अंदर ही प्रक्रिया पूरी कर 10 बसों को चलाने के लिए कहा था। रोडवेज के चेयरमैन ने उसी दिन टेंडर प्रक्रिया रोक दी।

टेंडर प्रक्रिया रोकने का यह हवाला दिया
-आठ रूटों पर इलेक्ट्रिक बसें लाने जा रहे हैं, उसकी रेट बड़ी मुश्किल से 58 रुपए प्रति किमी से 52 तक आई है। इससे रोडवेज को नुकसान होगा
-वर्तमान में ऐसी नई तकनीक की बसें चल रही हैं जो 500 किमी तक एक बार चार्ज करने पर चलेंगी
- जो निविदा जारी की गई है, उसे रोक कर फिर से नई योजना बनाई जाए
-रेवेन्यू शेयरिंग के आधार पर नए टेंडर निकाले जाएं
-इसके लिए कमेटी बनाई जाए और नए कंपनियों को भी शामिल किया जाए

असर क्या: इलेक्ट्रिक बसें लेट हुईं, यात्रियों की परेशानी बढ़ी
टेंडर रोकने के बाद अब इलेक्ट्रिक बसों को आने की प्रक्रिया रुक गई है। इसी महीने बसों को लाकर जयपुर-दिल्ली रूट पर शुरू करना था। बसों के शुरू होने से बीकानेर हाउस से बसों का संचालन शुरू होता, इससे यात्रियों को राहत मिलती। वर्तमान में जयपुर-दिल्ली रूट घाटे में चल रहा है।

चेयरमैन : पूर्व एमडी ने बोर्ड से नहीं ली अनुमति
इधर रोडवेज चेयरमैन रविशंकर श्रीवास्तव का कहना है कि इलेक्ट्रिक बसों के टेंडर प्रक्रिया शुरू करने से पहले बोर्ड की अनुमति लेनी चाहिए। लेकिन पूर्व एमडी आलोक ने बिना बोर्ड की अनुमति के ही बसों के टेंडर जारी कर दिए। मेरे पास पहले फाइल नहीं आई। पिछले ही दिनों फाइल मेरे पास आई है। जो रेट लगी है उससे रोडवेज को नुकसान होगा।

मंत्री : राज्यपाल के अभिभाषण से बढ़कर नहीं चेयरमैन
इस मामले में परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि पूर्व एमडी आलोक की ओर से टेंडर प्रक्रिया जारी की गई थी, वह बिल्कुल सही है। प्रदेश में पहली बार जो बसें आ रही हैं, उसकी घोषणा को राज्यपाल के अभिभाषण में पढ़ा गया है। चेयरमैन समझ नहीं पा रहे हैं। अभिभाषण में जो शामिल है, वह कानूनन सही है। उसे गलत नहीं ठहराया जा सकता।

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