दिन भर परेशान हुए कार्मिक, विभाग ने नहीं दिए स्पष्ट निर्देश


अधिकारियों ने कर लिए मोबाइल बंद
कार्मिकों के पास ना परिचय पत्र ना ही बचाव के संसाधन

By: Rakhi Hajela

Updated: 19 Apr 2021, 11:35 PM IST

Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India



जयपुर, 19 अप्रेल
राज्य सरकार की ओर से कफ्र्यू को देखते हुए जारी की गई गाइडलाइन पशुपालन विभाग के कार्मिकों के लिए परेशानी का सबब बन कर रह गई। विभाग के अधिकारी दिन भर मोबाइल बंद करे रहे और कार्मिक परेशान होते रहे। कार्मिकों के समक्ष स्थिति स्पष्ट नहीं थी कि उन्हें पशु चिकित्सा संस्थाओं को खोलना है अथवा नहीं। न केवल राजधानी बल्कि प्रदेश भर में स्पष्ट आदेश नहीं मिलने से कार्मिक दिन भर अपने संभागों के उच्चाधिकारियों से सम्पर्क कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग करते रहे लेकिन हर जगह से उन्हें अलग अलग जवाब मिले। जैसलमेर में कार्मिक ने संभाग कार्यालय में संयुक्त निदेशक से स्थिति स्पष्ट किए जाने की मांग की लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। वहीं कोटा में तो कार्मिकों को कहा गया कि वह फ्रंटलाइन वर्कर हैं, इसलिए उनकी छुट्टी नहीं है। कार्यालय खोले जाएंगे। श्रीगंगानगर में पशु चिकित्सक संघ ने संयुक्त निदेशक को ज्ञापन देकर कार्यालय स्टाफ की ड्यूटी के संबंध में निर्देश मांगे और पूछा कि कार्यालय बंद किया जाए अथवा खुला रखा जाए आपको बता दें कि पशु पालन विभाग के कार्मिक राज्य सरकार की ओर से जारी की गई गाइडलाइन के मुताबिक कोविड वॉरियर नहीं हैं।
स्पष्ट निर्देश जारी करने की मांग
कार्मिकों की इस परेशानी को देखते हुए राजस्थान पशुचिकित्सा तकनीकी कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष बनवारी लाल बुनकर ने विभाग के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह को ज्ञापन भेजकर स्पष्ट निर्देश जारी करने की मांग की है। बुनकर ने कहा कि कोविड गाइडलाइन में जिन संस्थाओं, कार्यालयों को खोलने का उल्लेख किया गया है उसमें पशु चिकित्सा संस्थाओं का नाम नहीं है। ऐसे में विभाग में कार्यरत राज्य के सभी अधिकारी और कर्मचारी संशय की स्थिति में हैं। विभाग को स्पष्ट निर्देश जारी करने चाहिए जिससे कार्मिकों का असमंजस समाप्त हो सके।
ना परिचय पत्र मिले या अन्य सुविधाएं
बुनकर ने कहा कि यदि विभाग पशु चिकित्सा संस्थानों को खोलने के निर्देश देता है तो सबसे पहले कार्मिकों को परिचय पत्र दिए जाने चाहिए जिससे कफ्र्यू के दौरान कार्मिक बिना किसी परेशानी अपने संस्थान तक पहुंच सके क्योंकि यदि वह बिना परिचय पत्र बाहर जाते हैं तो उन्हें पुलिस प्रशासन का सामना करना होगा और यदि नहीं जाते तो वह विभाग उनका वेतन काटने में देरी नहीं करेगा। बुनकर ने यह भी मांग की कि कार्मिकों को सेनेटाइजर आदि भी प्रदान किए जाएं जिसकी मांग लंबे समय से कार्मिक कर रहे हैं। बुनकर ने कहा कि कोविड काल में विभाग के कार्मिकों ने कोविड वॉरियर के रूप में काम किया है लेकिन उन्हें फ्रंट लाइन वर्कर्स में शामिल नहीं किया गया।
कैसे हासिल करेंगे लक्ष्य
गौरतलब है कि गत वर्ष दिसंबर में कोविड के संक्रमण को देखते हुए तत्कालीन प्रमुख शासन सचिव कुंजी लाल मीणा ने सभी कार्मिकों और अधिकारियों का कोविड टेस्ट अनिवार्य किया था। उस दौरान भी बड़ी संख्या में कर्मचारी और अधिकारी कोविड पॉजिटिव पाए गए थे। इसके बाद भी कार्मिकों से बिना सुरक्षा संसाधन के डोर टू डोर पशुचिकित्सा के कार्य किया था। बुनकर ने यह भी कहा कि कोविड का दूसरा स्ट्रेन शहरी क्षेत्र की तुलना में ग्रामीण क्षेत्र में अधिक फैल रहा है। ऐसे में कार्मिक बिना सुरक्षा के विभागीय योजनाओं में अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर सकेंगे।

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