पेट्रोल-डीजल की तेजी थमी, सिलेंडर हुआ महंगा

जुलाई महीने के पहले दिन आम आदमी को बड़ा झटका लगा है। इस बार झटका पेट्रोल-डीजल ( petrol-diesal ) ने नहीं रसोई गैस सिलेंडर ( gasoline-diesel cylinder ) ने दिया है। बुधवार को सब्सिडी वाले एलपीजी रसोई गैस सिलेंडर ( LPG cylinder increased ) की कीमत एक रुपए प्रति सिलेंडर बढ़ गई, हालांकि पेट्रोल-डीजल के भाव कोई उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया। देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ( oil marketing companies ) ने बिना सब्सिडी वाले 14.2 किलोग्राम वाले गैर-सब्सिडाइज्ड एलपीजी सिलेंडर ( non-subsidized LPG cylinders ) के द

By: Narendra Kumar Solanki

Published: 01 Jul 2020, 11:27 AM IST

जयपुर। जुलाई महीने के पहले दिन आम आदमी को बड़ा झटका लगा है। इस बार झटका पेट्रोल-डीजल ने नहीं रसोई गैस सिलेंडर ने दिया है। बुधवार को सब्सिडी वाले एलपीजी रसोई गैस सिलेंडर की कीमत एक रुपए प्रति सिलेंडर बढ़ गई, हालांकि पेट्रोल-डीजल के भाव कोई उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया। देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने बिना सब्सिडी वाले 14.2 किलोग्राम वाले गैर-सब्सिडाइज्ड एलपीजी सिलेंडर के दाम एक रुपए प्रति सिलेंडर बढ़ा दिए है। अब नई कीमतें बढ़कर 594 रुपए पर आ गई है।देशभर में फैले कोरोना संकट के बीच पेट्रोल-डीजल के दामों में भी लगातार तेजी बनी हुई है। आम आदमी की मुश्किलें हर दिन बढ़ती जा रही है। सोमवार को जयपुर में पेट्रोल के दाम 06 पैसे चढ़कर 87.57 रुपए एवं डीजल 13 पैसे की तेजी के साथ 81.32 रुपए प्रति लीटर पर आ गए। मंगलवार को पेट्रोल-डीजल के भावों में कोई उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया। सात जून से सरकारी तेल कंपनियों ने ईंधन की कीमतों में किए जाने वाले रोजाना बदलाव को दोबारा शुरू कर दिया।

किसानों की मुश्किलें
अभी धान रोपाई का मौसम है बारिश नहीं होने पर किसान डीजल से पंपिंग सेट चलाते है और बुआई करते हैं। डीजल महंगा होने से किसानों की भी मुश्किलें बढ़ी हैं। मालवाड़ा महंगा होने से सब चीज महंगी हो जाएगा। इससे महंगाई को काबू में रख पाना मुश्किल होगा। माल ढुलाई बढऩे से सामान महंगा होगा।

महंगी हो सकती है कई वस्तुएं
माल ढुलाई बढऩे से फल और सब्जी जैसी जल्दी खराब होने वाली चीजों की कीमत में उछाल आना तय है। वहीं, दैनिक उपयोग के सामान की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है। डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण माल ढुलाई में इजाफे का असर एकसाथ पूरे देश पर दिखाई देगा। इससे एफएमसीजी कंपनियों पर दबाव बढ़ेगा और वे कीमतों में बढ़ोतरी को मजबूर होंगी। फल और सब्जियों की कीमतों में ढुलाई का हिस्सा दूसरी वस्तुओं के मुकाबले ज्यादा होता है। दरअसल, अलग-अलग किसानों के पास कम मात्रा में फल-सब्जी होती हैं। उन्हें अपने उत्पाद मंडी तक पहुंचाने में बड़ी कंपनियों के मुकाबले ज्यादा खर्च करना पड़ता है।

पेट्रोल कारों की बढ़ेगी मांग
पेट्रोल और डीजल के बीच का अंतर घटकर मात्र सात रुपए प्रति लीटर रह जाने से ऑटोमोबाइल कंपनियों की मुश्किलें बढ़ सकती है। बीएस-६ फेरे में चल रही इन ऑटो कंपनियों को अब यह तैयारी करनी होगी कि वह डीजल वाहनों की बिक्री के लिए नई रणनीति तैयार करें, क्योंकि डीजल वाहन पेट्रोल वाहनों के मुकाबले करीब डेढ़ से दो लाख रुपए तक महंगे आते है। पिछले कुछ सालों में डीजल और पेट्रोल के दामों में काफी अंतर था, जिससे वाहन कंपनियों को दोनों सेगमेंट में वाहन बेचने में कोई दिक्कत नहीं आ रही थी, लेकिन अब अंतर घटकर मात्र सात रुपए रह गया है। देश में जिस तरह से पेट्रोल और डीजल के बीच का अंतर कम हो रहा है, जिससे लगता है कि एक दिन डीजल देश में पेट्रोल से भी महंगा मिलेगा।

Narendra Kumar Solanki Desk
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