1000 का नोट बंद होते ही आधा रह गया दवा कारोबार

पुराने नोट बंद होने से बीमारी का उपचार करने में मदद करने वाले दवा बाजार की खुद की तबीयत बिगड़ गई है। नोटबंदी के बाद पहले कुछ दिन तक इमरजेंसी सेवा वाले इस बाजार को भी पुराने नोट लेने की अनुमति नहीं दी गई।

Ajay Sharma

26 Nov 2016, 11:24 PM IST

जयपुर: पुराने नोट बंद होने से बीमारी का उपचार करने में मदद करने वाले दवा बाजार की खुद की तबीयत बिगड़ गई है। नोटबंदी के बाद पहले कुछ दिन तक इमरजेंसी सेवा वाले इस बाजार को भी पुराने नोट लेने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद देश भर में समस्याएं आई तो इस सेवा को भी पुराने नोट लेने के लिए अधिकृत कर दिया गया। अब हाल ही में सभी विभागों की तरह ही यहां भी 1000 के पुराने नोट पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं, जिससे दवा कारोबार घटकर अब करीब आधा रह गया है। दवा कारोबारियों के अनुसार प्रदेश में रोजाना करीब 8 से 10 करोड़ का निजी दवा बाजार है। जो इस समय घटकर करीब 4-5 करोड़ के आस पास ही रह गया है। अधिक परेशान उन मरीजों को हो रही है, जिन्हें लगातार लम्बे समय से दवा लेनी पड़ रही है।



पांच सौ का पुराना नोट लेने से किया इनकार

मानसरोवर निवासी राजेश के अनुसार वह एसएमएस के पास दवा लेने गया, लेकिन वहां एक दुकान पर 500 का पुराना नोट लेने से भी इनकार कर दिया गया। कई जगह शिकायतें यह भी रही कि 500 के नोट के बदले खुल्ले नहीं दिए गए।



इनका कहना है

1000 रुपए का नोट बंद होने के बाद दवा कारोबार पर करीब 50 फीसदी असर पड़ा है। खुल्ले पैसों की भी किल्लत है। प्रदेश में आम तौर पर रोजाना करीब 10 करोड़ रुपए का दवा कारोबार होता है।

अजय अग्रवाल, प्रवक्ता, राजस्थान केमिस्ट एसोसिएशन 

Ajay Sharma Desk
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned