पेयजल परियोजनाओं की मॉनिटरिंग ऐप से


प्रो—एमआईएस मॉडयूल के तहत बनाया एप

By: PUNEET SHARMA

Updated: 07 Jul 2020, 08:12 AM IST

जयपुर।
प्रदेश में जलदाय विभाग के अधीन चल रही पेयजल परियोजनाओं की मॉनिटरिंग एक विशेष ऐप से होगी। यह एप प्रो—एमआईएस मॉडयलू के तहत तैयार किया गया है। इससे परियोजनाओं के कार्य के प्रत्येक स्तर पर जिओ टैगिंग के साथ फोटो भी लिए जाएंगे। जलदाय विभाग के प्रमुख सचिव राजेश यादव ने सोमवार को विभाग के अधीन चल रही परियोजनाओं की साप्ताहिक समीक्षा की। उन्होंने बताया कि इस ‘एप‘ को इसी माह क्रियाशील किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस ऐप के अतिरिक्त अधिशाषी अभियंता से लेकर जूनियर केमिस्ट के उपयोग के लिए जिम्स (जीआईएमएस-गवर्नमेंट इंस्टेंट मैसेजिंग सिस्टम) तैयार किया है। इससे विभाग की आंतरिक सूचनाओं का आदान प्रदान हो सकेगा। साथ ही जलदाय विभाग में सभी कार्यों के लिए यूनिफाइड बीएसआर होगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 52 शहरों में 570 टैंकरों के माध्यम से पेयजल आपूर्ति की जा रही है।

हैंड पम्प के कार्यों की होगी जांच
बैठक में हैंड पम्म रिपेयरिंग अभियान की प्रगति के दौरान प्रमुख शासन सचिव ने निर्देश दिए कि प्रदेश में जिन हैंड पम्पों की जिओ टैगिंग हो गई है, उनका डाटा आशा सहयोगिनी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सेवानिवृत शिक्षकों आदि के साथ साझा कर इनकी जांच कराई जाए। उन्होंने राज्य में वॉटर लैब्स एवं मोबाईल वॉटर लैब्स के जरिए पानी के नमूनों की जांच की प्रगति की समीक्षा करते हुए ब्लॉक स्तर पर जल प्रयोगशालाओं की स्थापना के लिए टेंडर प्रक्रिया को भी शीघ्रता से पूर्ण करने के निर्देश दिए।
सोलर पैनल्स से ऊर्जा उत्पादन की योजना
यादव ने बैठक में अधिकारियों के साथ विभाग के भवनों और अन्य परिसम्पतियों पर सोलर पैनल स्थापित करने के सम्बंध में भी विस्तार से चर्चा की। इस दौरान जोधपुर क्षेत्र में करीब 190 किलोमीटर लम्बी राजीव गांधी लिफ्ट कैनाल (आरजीएलसी) तथा पूरे प्रदेश में बड़े रिजर्वायर्स और अन्य जगहों पर सोलर पैनल्स लगाने के बारे में विचार विमर्श किया गया। इससे इन परिसम्पतियों के तहत काम कर रहे पम्पिंग स्टेशन पर काम में आने वाली बिजली की बचत के साथ ही अतिरिक्त ऊर्जा का उत्पादन किया जा सकता है।

आरजीएलसी क्षेत्र में करीब 110 मेगावाट का सोलर प्लांट लगाकर वृहद स्तर पर ऊर्जा का उत्पादन हो सकता है। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में ऐसे करीब 140 पम्पिंग स्टेशन चिह्नित किए गए है, जहां 75 किलोवाट क्षमता के सोलर संयत्र लगाए जाने की सम्भावना है। अधिकारियों को इस दिशा में आगे बढ़ने के निर्देश दिए गए।

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